इंस्टाग्राम पर किसी यूजर की मृत्यु के बाद उसका अकाउंट सीधे डिलीट नहीं होता बल्कि इसे ‘Memorialized Account’ में बदलने का विकल्प होता है। परिवार या करीबी लोग अकाउंट मेमोरियलाइज करने या डिलीट कराने के लिए इंस्टाग्राम को प्रमाणित दस्तावेज भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया से डिजिटल यादें सुरक्षित रहती हैं और मृतक का अकाउंट सुरक्षित स्मारक बन जाता है।
Instagram Memorialized Account: किसी यूजर की मृत्यु के बाद उसका इंस्टाग्राम अकाउंट सीधे डिलीट नहीं होता, बल्कि परिवार या करीबी इसे मेमोरियलाइज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया यूजर की यादों को संरक्षित करने के लिए है। अकाउंट में कोई लॉगिन नहीं कर सकता और पोस्ट एवं तस्वीरें जस की तस बनी रहती हैं। मृतक के अकाउंट को मेमोरियलाइज करने या डिलीट कराने के लिए डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी दस्तावेज आवश्यक होते हैं, ताकि डिजिटल स्मारक सुरक्षित और प्रमाणिक बना रहे।
डिजिटल यादों का स्मारक
किसी यूजर की मृत्यु के बाद परिवार या करीबी लोग इंस्टाग्राम को सूचित कर सकते हैं। इसके बाद अकाउंट को ‘Memorialized Account’ में बदल दिया जाता है। इसका मतलब है कि अकाउंट सक्रिय रहेगा, लेकिन कोई इसमें लॉग इन नहीं कर सकता। प्रोफाइल तस्वीर और पोस्ट जस की तस बनी रहती हैं, ताकि लोग उस व्यक्ति को याद कर सकें।
प्रमाण देना अनिवार्य है
इंस्टाग्राम अकाउंट मेमोरियलाइज करने से पहले परिवार या करीबी से डेथ सर्टिफिकेट, मृत्यु प्रमाण पत्र या अखबार में छपी खबर जैसी आधिकारिक जानकारी मांगी जाती है। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि कोई झूठी जानकारी के आधार पर अकाउंट को बदल न सके।

डिलीट करने का विकल्प भी है
यदि परिवार चाहता है कि मृतक का अकाउंट पूरी तरह हटा दिया जाए, तो ‘Request to Remove Account’ फॉर्म के जरिए यह संभव है। इसमें अकाउंट से जुड़ी पहचान, रिश्ते और कानूनी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
सुरक्षा और लॉगिन प्रतिबंध
मेमोरियल अकाउंट बनने के बाद किसी को भी उसमें लॉग इन करने या पासवर्ड बदलने की अनुमति नहीं होती। यह सुरक्षा कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई मृतक के नाम से पोस्ट या संदेश न भेज सके।
डिजिटल टाइम कैप्सूल
मेमोरियल अकाउंट लोगों को मृतक की पुरानी यादों, पोस्ट और तस्वीरों से जोड़ता है। यह एक डिजिटल स्मारक बन जाता है, जहां परिवार और दोस्त उसे याद कर सकते हैं। इंसान भले ही इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसका इंस्टाग्राम अकाउंट उसकी यादों को हमेशा जीवित रखता है। सोशल मीडिया अब सिर्फ कनेक्शन का माध्यम नहीं, बल्कि डिजिटल यादों का टाइम कैप्सूल बन चुका है।













