नाइजीरिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान फायरिंग, 9 महिलाओं की मौत पर देशभर में आक्रोश

नाइजीरिया में विरोध प्रदर्शन के दौरान फायरिंग, 9 महिलाओं की मौत पर देशभर में आक्रोश

नाइजीरिया के अदामावा राज्य में शांतिपूर्ण विरोध के दौरान सुरक्षा बलों की फायरिंग से 9 महिलाओं की मौत हुई, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया। सेना ने भूमिका से इनकार किया, जबकि Amnesty International की जांच ने सैन्य फायरिंग की पुष्टि की।

Nigerian Protest: नाइजीरिया के अदामावा राज्य में महिलाओं के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया है। प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर सेना द्वारा की गई फायरिंग में 9 महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना ने नाइजीरिया में सुरक्षा बलों के आचरण और बल प्रयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गवाहों और मृतक महिलाओं के परिजनों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सेना को रास्ता देने से इनकार किया, जिसके बाद सैनिकों ने उन पर सीधे फायरिंग कर दी।

घटना कैसे हुई

अदमावा के लामुर्दे इलाके में महिलाओं का समूह एक मुख्य सड़क पर विरोध प्रदर्शन कर रहा था। यह विरोध सांप्रदायिक झड़पों को नियंत्रित करने में सेना की विफलता और उनके रवैये के खिलाफ था। उसी दौरान सैनिकों का एक दल वहां से गुजर रहा था। गवाहों का कहना है कि सैनिकों ने पहले महिलाओं को हटने के लिए कहा, लेकिन जब रास्ता नहीं मिला तो उन्होंने गोलीबारी शुरू कर दी। इस फायरिंग में 9 महिलाओं की मौत और 10 अन्य लोग घायल हो गए। स्थानीय लोग इस घटना को सैन्य अत्याचार का सबसे ताज़ा उदाहरण मान रहे हैं।

नाइजीरियाई सेना का बयान

नाइजीरियाई Nigerian Army ने इस घटना में अपनी भूमिका से इनकार किया है। सेना का कहना है कि उन्होंने किसी पर गोली नहीं चलाई और मौतों के लिए एक स्थानीय मिलिशिया जिम्मेदार है, जिसने इलाके में फायरिंग की थी। हालांकि, यह बयान गवाहों और परिवारों के दावों से बिल्कुल विपरीत है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के नाइजीरिया कार्यालय ने कहा है कि उनकी जांच में पुष्टि हुई है कि फायरिंग सेना द्वारा ही की गई, जिसमें 9 महिलाओं की मौत हुई। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने गवाहों और मृतकों के परिवारों के बयान का हवाला देते हुए सेना के बयान को गलत बताया है।

नाइजीरिया में ऐसी घटनाएं कोई नई बात नहीं

नाइजीरिया में विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग कोई नई बात नहीं है। 2020 में पुलिस क्रूरता के खिलाफ चल रहे #EndSARS आंदोलन के दौरान भी लागोस में सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी थी। बाद में सरकार द्वारा गठित विशेष जांच आयोग ने उस घटना को नरसंहार बताया था। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि नाइजीरिया में सुरक्षा बलों को जवाबदेह ठहराने की प्रणाली बेहद कमजोर है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं।

क्या है विवाद की जड़

अदमावा में यह विरोध बाचामा और चोबो जातीय समूहों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद के कारण बढ़ी हिंसा से जुड़ा था। लगातार झड़पों के बाद स्थानीय प्रशासन ने लामुर्दे इलाके में कर्फ्यू लगाया था। लामुर्दे का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थानीय पार्षद लॉसन इग्नेशियस का कहना था कि प्रदर्शनकारी इस बात से नाराज थे कि सुरक्षा बल, जिनमें सैनिक भी शामिल थे, कर्फ्यू लागू करने में नाकाम रहे। इसी कारण झड़पें जारी रहीं और लोगों में असंतोष बढ़ता गया। महिलाओं का प्रदर्शन इसी प्रशासनिक ढिलाई के विरोध में था।

मृतक महिलाओं के परिवारों का दर्द

ग्येले कैनेडी नाम की महिला ने बताया कि उनकी बेटी भी उसी भीड़ में शामिल थी जिसे सैनिकों ने गोली मारी। कैनेडी ने कहा कि सैनिक उस दिशा से आ रहे थे जहां पहले झड़प हुई थी। उन्होंने बताया कि सैनिकों ने पहले हवा में गोली चलाई, लेकिन उसके कुछ ही पल बाद उन्होंने सीधे महिलाओं को निशाना बनाकर गोली चलाई। परिवारों को इस घटना ने गहरा सदमा दिया है और क्षेत्र में भय का माहौल है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे

घटना ऐसे समय में हुई है जब नाइजीरियाई सेना पहले से ही अमेरिका की निगरानी में है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में नाइजीरिया में सुरक्षा संकटों को लेकर चिंता जताई थी। ट्रंप ने कहा था कि ईसाइयों को लक्षित किया जा रहा है और सुरक्षा बल हिंसा रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे। इस घटना के बाद अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा नाइजीरिया पर दबाव और बढ़ सकता है। मानवाधिकार संगठनों ने मांग की है कि फायरिंग की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।

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