Nana Patekar Death: रंगमंच से बॉलीवुड तक ऐसा रहा शानदार सफर, 'गमन' से 'वेलकम' तक छोड़ी छाप

Nana Patekar Death: नाना पाटेकर ने रंगमंच से अपने अभिनय करियर की शुरुआत कर बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई। ‘गमन’ से ‘वेलकम’ तक उनकी यादगार फिल्मों और सफर पर डालें

हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय से पहचान बनाने वाले दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर की सुबह 5:20 बजे निधन हो गया। बताया गया कि गोवा के मणिपाल अस्पताल में मेडिकल टीम ने उन्हें मृत घोषित किया।

Nana Patekar: हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अभिनेता के निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है। करीब चार दशक लंबे करियर में नाना पाटेकर ने गंभीर, नकारात्मक, सामाजिक और हास्य से भरपूर कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शक लंबे समय तक याद करते रहे।

नाना पाटेकर ने अपने अभिनय की शुरुआत छोटे किरदारों से की, लेकिन धीरे-धीरे अपनी अलग संवाद अदायगी और प्रभावशाली अभिनय शैली के दम पर हिंदी सिनेमा में मजबूत पहचान बनाई। उनकी फिल्मों में मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक और मानवीय भावनाओं की झलक भी देखने को मिलती रही।

'गमन' से शुरू हुआ फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने 1978 में आई फिल्म 'गमन' से हिंदी सिनेमा में अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों और रंगमंच पर भी काम किया। उनकी शुरुआती भूमिकाएं भले ही बहुत बड़ी नहीं थीं, लेकिन अभिनय के प्रति उनकी गंभीरता ने जल्द ही फिल्म निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद उन्हें कई फिल्मों में काम करने का मौका मिला और उनका करियर लगातार आगे बढ़ता गया।

'परिंदा' ने बदली करियर की दिशा

1989 में रिलीज हुई 'परिंदा' नाना पाटेकर के करियर का अहम पड़ाव साबित हुई। फिल्म में उन्होंने एक गैंगस्टर की भूमिका निभाई और अपने दमदार अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों को प्रभावित किया। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का सम्मान मिला। 'परिंदा' के बाद नाना पाटेकर की गिनती हिंदी सिनेमा के भरोसेमंद और प्रभावशाली अभिनेताओं में होने लगी। उन्होंने ऐसे किरदार चुने, जिनमें उनकी अभिनय क्षमता को पूरी तरह सामने आने का मौका मिला।

'क्रांतिवीर' में दिखा अभिनय का अलग अंदाज

1994 में रिलीज हुई 'क्रांतिवीर' उनके करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में नाना पाटेकर ने एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाई, जो सामाजिक अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके बाद 'अग्निसाक्षी' के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का सम्मान मिला। इस तरह नाना पाटेकर उन चुनिंदा कलाकारों में शामिल हो गए, जिन्हें अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले।

गंभीर भूमिकाओं से कॉमेडी तक

नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खूबियों में से एक उनकी विविधता रही। उन्होंने 'अंगार', 'तिरंगा', 'अग्निसाक्षी', 'खामोशी: द म्यूजिकल', 'शक्ति: द पावर', 'अपहरण' और 'राजनीति' जैसी फिल्मों में अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। वहीं 2007 की फिल्म 'वेलकम' में 'उदय शेट्टी' के किरदार ने उनके अभिनय का एक बिल्कुल अलग पक्ष दर्शकों के सामने रखा। फिल्म में उनके कॉमिक अंदाज और संवादों को खूब लोकप्रियता मिली। बाद में वह 'वेलकम बैक' में भी इसी किरदार में नजर आए।

मराठी सिनेमा में भी महत्वपूर्ण योगदान

नाना पाटेकर का मराठी सिनेमा से भी गहरा रिश्ता रहा। 'नटसम्राट' में उनका अभिनय विशेष रूप से याद किया जाता है। फिल्म में उन्होंने एक वरिष्ठ रंगमंच अभिनेता का किरदार निभाया और अपने भावनात्मक अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। नाना पाटेकर सिर्फ अभिनेता ही नहीं थे। उन्होंने निर्देशन और लेखन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में कदम रखा। फिल्म में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन और लेखन की जिम्मेदारी भी संभाली।

पुरस्कारों से सम्मानित रहा करियर

नाना पाटेकर को उनके लंबे फिल्मी करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले। उन्हें 'परिंदा' के लिए सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता, 'क्रांतिवीर' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और 'अग्निसाक्षी' के लिए सर्वश्रेष्ठ सह-अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।

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