NASA अपने बैकअप Mars Rover PROMISE को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की संभावना पर विचार कर रहा है। यह न्यूक्लियर पावर से चलने वाला रोवर Artemis मिशनों के लिए संसाधनों की खोज और सतह का अध्ययन कर सकता है।
वॉशिंगटन: NASA ने Artemis Moon कार्यक्रम को मजबूत बनाने के लिए एक नई योजना पर काम शुरू किया है। एजेंसी अपने बैकअप Mars Rover PROMISE को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भेजने की संभावना का अध्ययन कर रही है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह रोवर भविष्य के मानव मिशनों के लिए वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने और संभावित संसाधनों की पहचान करने में अहम भूमिका निभाएगा।
Mars Rover का बैकअप मॉडल बन सकता है Moon Explorer
NASA अपने बैकअप इंजीनियरिंग रोवर PROMISE (Polar Rover for Observation, Mapping, and In-Situ Exploration) को एक नए मिशन के लिए तैयार करने पर विचार कर रहा है। यह वही फुल-स्केल इंजीनियरिंग मॉडल है, जिसका उपयोग वर्षों से Curiosity और Perseverance Mars रोवर के सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और कमांड की पृथ्वी पर जांच करने के लिए किया जाता रहा है।

पहले इस रोवर को OPTIMISM के नाम से जाना जाता था। NASA का मानना है कि मंगल मिशनों से मिले अनुभव के बाद अब इस इंजीनियरिंग मॉडल का उपयोग सीधे वैज्ञानिक मिशन में किया जा सकता है।
NASA के प्रशासक जारेड आइज़ैकमैन ने Artemis कार्यक्रम के अपडेट के दौरान इस प्रस्ताव की जानकारी देते हुए कहा कि एजेंसी मौजूदा तकनीक का बेहतर उपयोग करने के विकल्प तलाश रही है।
न्यूक्लियर पावर सिस्टम बनेगा सबसे बड़ी ताकत
PROMISE की सबसे बड़ी विशेषता इसका Radioisotope Thermoelectric Generator (RTG) है। यही न्यूक्लियर पावर सिस्टम Curiosity और Perseverance रोवर में भी इस्तेमाल किया गया है।
यह तकनीक रेडियोधर्मी पदार्थ के प्राकृतिक क्षय से बिजली पैदा करती है। इसके कारण रोवर को सूर्य की रोशनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वह लंबे समय तक लगातार काम कर सकता है।
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर कई इलाके ऐसे हैं जहां लंबे समय तक अंधेरा और अत्यधिक ठंड रहती है। ऐसे क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित रोवर की तुलना में न्यूक्लियर पावर से चलने वाला रोवर कहीं अधिक प्रभावी साबित हो सकता है।
Artemis मिशनों की तैयारी में निभाएगा अहम रोल
NASA का उद्देश्य भविष्य में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना है। इससे पहले एजेंसी वहां की सतह, जल बर्फ (Water Ice) और अन्य संसाधनों का विस्तृत अध्ययन करना चाहती है।
यदि PROMISE मिशन को मंजूरी मिलती है, तो यह रोवर चंद्र सतह की मैपिंग करेगा, संभावित जल बर्फ के भंडार की पहचान करेगा और भविष्य के लैंडिंग स्थलों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा यह चंद्रमा के कठिन भूभाग और विकिरण स्तर से जुड़ा महत्वपूर्ण डेटा भी जुटा सकेगा।
NASA का मानना है कि ऐसी रोबोटिक खोज यात्राएं भविष्य में Artemis अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुरक्षित और स्थायी आधार तैयार करने में मदद करेंगी।
Moon Base कार्यक्रम को मिलेगी नई गति
PROMISE रोवर का प्रस्ताव NASA के Commercial Lunar Payload Services (CLPS) कार्यक्रम के विस्तार के साथ सामने आया है। एजेंसी ने हाल ही में Astrobotic, Firefly Aerospace और Intuitive Machines जैसी कंपनियों को चंद्रमा पर वैज्ञानिक उपकरण पहुंचाने के लिए नए अनुबंध दिए हैं।
NASA की योजना 2029 तक लगभग 20 CLPS मिशन संचालित करने की है। इन मिशनों के जरिए चंद्रमा की धूल, विकिरण, सतह की संरचना और संसाधनों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि PROMISE को चंद्रमा पर भेजा जाता है, तो यह Moon Base कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल मौजूदा तकनीक का दोबारा उपयोग होगा, बल्कि भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी मानव बस्तियां बसाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त होगा।












