NASA का Neil Gehrels Swift Observatory लगातार ऊंचाई खो रहा है और 2026 के अंत तक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इसे बचाने के लिए एजेंसी पहली बार एक कमर्शियल स्पेसक्राफ्ट की मदद से ऑर्बिटल रेस्क्यू मिशन की योजना बना रही है।
United States: NASA अपने सबसे सफल अंतरिक्ष वेधशालाओं में से एक Neil Gehrels Swift Observatory को बचाने के लिए एक अनोखे मिशन की तैयारी कर रहा है। 2004 में लॉन्च किया गया यह टेलीस्कोप वायुमंडलीय खिंचाव के कारण धीरे-धीरे अपनी कक्षा खो रहा है। इसे नष्ट होने से बचाने के लिए पहली बार एक कमर्शियल स्पेसक्राफ्ट को भेजकर इसकी कक्षा ऊंची करने की योजना बनाई जा रही है।
20 साल से अधिक समय से अंतरिक्ष रहस्यों का अध्ययन कर रहा है Swift
Neil Gehrels Swift Observatory को नवंबर 2004 में लॉन्च किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य गामा-रे बर्स्ट (Gamma-Ray Bursts) का अध्ययन करना था, जिन्हें ब्रह्मांड की सबसे शक्तिशाली विस्फोटक घटनाओं में गिना जाता है। पिछले दो दशकों में इस वेधशाला ने हजारों खगोलीय घटनाओं का अवलोकन किया और वैज्ञानिकों को ब्लैक होल, न्यूट्रॉन स्टार तथा दूरस्थ आकाशगंगाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराई।

Swift ने खगोल विज्ञान के क्षेत्र में कई बड़ी खोजों में योगदान दिया है। इसकी तेज प्रतिक्रिया क्षमता के कारण वैज्ञानिक किसी भी अचानक होने वाली ब्रह्मांडीय घटना का तुरंत अध्ययन कर पाते हैं। यही वजह है कि यह मिशन आज भी वैज्ञानिक समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
बढ़ता वायुमंडलीय खिंचाव बना चुनौती
NASA के अनुसार, पृथ्वी की ऊपरी वायुमंडलीय परतों में बढ़ते घर्षण के कारण Swift की कक्षा धीरे-धीरे नीचे आ रही है। यह प्रक्रिया वर्षों से जारी है और अब स्थिति ऐसी हो गई है कि यदि कोई कदम नहीं उठाया गया, तो वेधशाला 2026 के अंत तक पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर सकती है।
वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने पर अत्यधिक गर्मी और घर्षण के कारण अंतरिक्ष यान के अधिकांश हिस्से जलकर नष्ट हो जाएंगे। इससे एक ऐसा वैज्ञानिक उपकरण खो जाएगा जिसने 20 वर्षों से अधिक समय तक लगातार अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान दिया है।
पहली बार होगा ऐसा ऑर्बिटल रेस्क्यू मिशन
Swift को बचाने के लिए NASA एक ऐतिहासिक कदम उठाने की योजना बना रहा है। एजेंसी एक कमर्शियल स्पेसक्राफ्ट को वेधशाला तक भेजने पर विचार कर रही है। यह यान Swift के पास पहुंचकर उससे जुड़ने या उसे पकड़ने का प्रयास करेगा और फिर उसे अधिक ऊंची तथा सुरक्षित कक्षा में पहुंचाएगा।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो यह अंतरिक्ष इतिहास में पहली बार होगा जब किसी सक्रिय वैज्ञानिक वेधशाला को कक्षा में ही बचाकर उसकी उम्र बढ़ाई जाएगी। इस तकनीक का भविष्य में अन्य उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के लिए भी उपयोग किया जा सकता है।
अंतरिक्ष सेवा मिशनों के लिए खुल सकते हैं नए रास्ते
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन केवल Swift को बचाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसकी सफलता भविष्य में सैटेलाइट सर्विसिंग, ऑर्बिटल रिपेयर और अंतरिक्ष यानों के जीवनकाल को बढ़ाने जैसी तकनीकों के विकास को गति दे सकती है।
फिलहाल NASA इस महत्वाकांक्षी योजना के विभिन्न तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन कर रहा है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो Swift Observatory आने वाले वर्षों तक अंतरिक्ष के रहस्यों को उजागर करने का काम जारी रख सकेगा और अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक नया अध्याय लिख सकता है।










