मुजफ्फरपुर-एक नेशनल स्तर की महिला रग्बी खिलाड़ी ने अपने ही कोच पर गंभीर आरोप लगाते हुए खेल जगत को हिला दिया है। खिलाड़ी का कहना है कि कोच लगातार मानसिक दबाव बनाता था और अशोभनीय मांगें करता था। उसने आरोप लगाया कि कोच कहता था—“हम जो बोलेंगे, वही करना पड़ेगा…साथ सोना होगा”, और यदि उसकी बात नहीं मानी गई तो करियर बर्बाद करने की धमकी दी जाती थी।
यह मामला सामने आने के बाद खेल जगत में हड़कंप मच गया है। पीड़ित खिलाड़ी के मुताबिक, यह कोई एक दिन या एक घटना की बात नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इस तरह का दबाव बनाया जा रहा था। धीरे-धीरे यह स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई अन्य लड़कियों ने भी खेल छोड़ने का फैसला कर लिया।
खिलाड़ी ने बताया कि कोच अपने पद और प्रभाव का गलत इस्तेमाल करता था। वह खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने, चयन न होने देने और भविष्य खत्म करने जैसी धमकियां देता था। इस डर के कारण कई खिलाड़ी खुलकर सामने नहीं आ पाईं और चुपचाप खेल से दूरी बना ली।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे मामले के चलते करीब 15 लड़कियों ने रग्बी खेलना ही छोड़ दिया। यह संख्या इस बात का संकेत है कि मामला कितना गंभीर और व्यापक हो सकता है। कई खिलाड़ियों ने मानसिक तनाव, डर और असुरक्षा की भावना के चलते खेल से किनारा कर लिया।
सूत्रों के अनुसार, पीड़ित खिलाड़ी ने संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की है और मामले की जांच की मांग की है। अब यह मामला खेल संगठनों और प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ा हो गया है।
इस घटना ने एक बार फिर खेलों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और कोचिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई और स्पष्ट नीतियों की जरूरत है, ताकि खिलाड़ियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर पहले भी कई बार आवाज उठ चुकी है, लेकिन इस तरह के गंभीर आरोप यह दिखाते हैं कि अभी भी जमीनी स्तर पर काफी सुधार की जरूरत है। खासतौर पर जूनियर और उभरती खिलाड़ियों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाना बेहद जरूरी है।
फिलहाल इस मामले की जांच की मांग तेज हो गई है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही सच्चाई सामने आएगी। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित कोच पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
यह घटना न केवल खेल जगत के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि किसी भी क्षेत्र में शक्ति का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए। खिलाड़ियों की सुरक्षा और सम्मान सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए