NCP Leadership Row: सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर कानूनी चुनौती, 15 दिन में नए चुनाव की मांग

NCP Leadership Row: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में सुनेत्रा पवार के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। फैसले को कानूनी चुनौती देते हुए

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर नया विवाद सामने आया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने पर एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने सवाल उठाते हुए 15 दिनों के भीतर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है।

मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में नेतृत्व को लेकर नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सुनेत्रा पवार के निर्वाचन को पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कानूनी चुनौती दी है। नोटिस में दावा किया गया है कि अध्यक्ष पद का चुनाव पार्टी के संविधान के अनुरूप नहीं हुआ और इसे अमान्य घोषित कर स्वतंत्र निगरानी में नए चुनाव कराए जाने चाहिए।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, NCP नेतृत्व ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चुनाव पूरी तरह संविधान और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संपन्न हुआ था।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर उठे सवाल

पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने एक विधिक नोटिस के माध्यम से 26 फरवरी 2026 को हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की वैधता पर सवाल उठाए हैं। यह नोटिस सुनेत्रा पवार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया पार्टी के संविधान के अनुरूप नहीं थी और इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। 

साथ ही, एक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव अधिकारी की देखरेख में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि जब तक नई चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नए पदाधिकारियों की सूची को प्रभावी नहीं माना जाना चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अजित पवार के निधन के बाद सामने आया। उनके निधन के बाद संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई थी। सच्चिदानंद सिंह का दावा है कि पार्टी ने फरवरी 2026 में चुनाव आयोग के समक्ष संशोधित संविधान प्रस्तुत किया था, जिसके अनुसार नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन तक कार्यकारी अध्यक्ष को संगठन की सभी प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त थीं।

नोटिस के अनुसार, यदि संशोधित संविधान लागू था, तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का अधिकार केवल कार्यकारी अध्यक्ष के पास होना चाहिए था। ऐसे में बैठक बुलाने की प्रक्रिया और उसके आधार पर हुए चुनाव की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गए आरोप

कानूनी नोटिस में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े कई बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज की गई है। आरोप लगाया गया है कि, केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन नहीं किया गया।निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई। चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा नहीं की गई। प्रतिनिधियों को नामांकन दाखिल करने या मतदान का अवसर नहीं मिला।

चुनाव आयोग को भेजे गए कुछ पत्रों को संबंधित कार्यकारिणी की स्वीकृति प्राप्त नहीं थी। इन आधारों पर नोटिस में मांग की गई है कि चुनाव से संबंधित सभी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा की जाए और 15 दिनों के भीतर नई चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए। ऐसा नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी भी दी गई है।

NCP ने आरोपों को बताया निराधार

पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। NCP के प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था और सुनेत्रा पवार का निर्वाचन लोकतांत्रिक तरीके से हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि शिकायत दर्ज कराने वाले नेता स्वयं अधिवेशन में उपस्थित थे और उन्होंने उसी बैठक में सुनेत्रा पवार के समर्थन में मतदान किया था। पार्टी के अनुसार, अब चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना तथ्यों से मेल नहीं खाता।

अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने सक्रिय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया और बाद में महाराष्ट्र सरकार में महत्वपूर्ण दायित्व भी मिले। इसके अलावा, बारामती विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर उन्होंने विधायिका में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व में उनकी भूमिका आने वाले समय में NCP की रणनीति और संगठनात्मक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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