Radiant Cooling System एक नई कूलिंग तकनीक है, जिसमें ठंडी हवा की बजाय पानी से ठंडी की गई दीवारें, फर्श और छत शरीर की गर्मी को अवशोषित करती हैं। इसे भविष्य में पारंपरिक AC का अधिक ऊर्जा-कुशल विकल्प माना जा रहा है।
Radiant Cooling System: भविष्य की ऐसी कूलिंग तकनीक है, जो पारंपरिक एयर कंडीशनर से अलग तरीके से काम करती है। इसमें ठंडी हवा नहीं छोड़ी जाती, बल्कि दीवारों, फर्श और छत में बहने वाले ठंडे पानी के जरिए वातावरण को ठंडा रखा जाता है। इससे शरीर की गर्मी स्वाभाविक रूप से कम होती है और कम ऊर्जा में आरामदायक कूलिंग का अनुभव मिलता है।
क्या है Radiant Cooling System और कैसे करता है काम?
गर्मियों में राहत पाने के लिए आज एयर कंडीशनर सबसे आम विकल्प बन चुका है। हालांकि, बढ़ती बिजली खपत, पर्यावरण पर असर और लगातार बढ़ती गर्मी के बीच वैज्ञानिक ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो कम ऊर्जा में बेहतर कूलिंग दे सकें। इन्हीं में से एक है Radiant Cooling System, जिसे भविष्य के एयर कंडीशनिंग सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

यह तकनीक पारंपरिक AC की तरह कमरे में ठंडी हवा नहीं छोड़ती। इसके बजाय इमारत की दीवारों, छत और फर्श के भीतर पाइपों का नेटवर्क बनाया जाता है, जिनमें लगातार ठंडा पानी बहता रहता है। ये सतहें ठंडी बनी रहती हैं और कमरे में मौजूद व्यक्ति के शरीर से निकलने वाली गर्मी को अपनी ओर खींच लेती हैं। इसी प्रक्रिया से बिना तेज हवा के भी ठंडक का एहसास होता है।
सामान्य AC से कितना अलग है यह सिस्टम?
पारंपरिक एयर कंडीशनर रेफ्रिजरेंट गैस और कंप्रेसर की मदद से कमरे की गर्म हवा बाहर निकालते हैं और ठंडी हवा अंदर भेजते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में काफी बिजली खर्च होती है। साथ ही रेफ्रिजरेंट गैस का पर्यावरण पर भी असर पड़ता है।
वहीं Radiant Cooling System में ठंडी हवा फेंकने की जरूरत नहीं होती। इसमें केवल ठंडे पानी के जरिए सतहों को ठंडा रखा जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पानी हवा की तुलना में लगभग 3,400 गुना अधिक गर्मी अवशोषित कर सकता है। यही वजह है कि इसे अधिक ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient) तकनीक माना जाता है।
किस तरह महसूस होती है इसकी कूलिंग?
अगर आपने कभी किसी बड़े भवन के भूमिगत पार्किंग बेसमेंट में गर्मी के मौसम में प्रवेश किया हो, तो आपने महसूस किया होगा कि वहां बिना AC के भी तापमान बाहर की तुलना में कम लगता है। Radiant Cooling System भी कुछ इसी सिद्धांत पर काम करता है।
कमरे में मौजूद ठंडी सतहें शरीर की गर्मी को धीरे-धीरे सोखती रहती हैं, जिससे वातावरण आरामदायक महसूस होता है। जरूरत पड़ने पर हल्के पंखों का उपयोग करके इस कूलिंग प्रभाव को और बेहतर बनाया जा सकता है।
अभी किन देशों में हो रहा है इस्तेमाल?
फिलहाल अमेरिका में Radiant Cooling System का उपयोग सीमित स्तर पर किया जा रहा है। कुछ आधुनिक इमारतों और सार्वजनिक स्थानों, जैसे ट्रेन स्टेशन, में इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू हुआ है। हालांकि, इसे बड़े स्तर पर अपनाने के लिए अभी आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह विकसित नहीं हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के बारे में आम लोगों और निर्माण क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के बीच जागरूकता बढ़ने के बाद इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ सकता है।
कितनी है इसकी लागत?
वर्तमान समय में Radiant Cooling System पारंपरिक AC की तुलना में महंगा विकल्प माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसे लगाने में लगभग 20 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ग फुट तक का खर्च आ सकता है। यही वजह है कि अभी यह तकनीक केवल चुनिंदा परियोजनाओं तक सीमित है।
हालांकि, नई तकनीकों की तरह इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन और अपनाए जाने के बाद इसकी लागत कम होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या भारत में सफल हो सकती है यह तकनीक?
भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां गर्मियों के दौरान कई राज्यों में तापमान 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ऐसे में ऊर्जा की बचत करने वाली कूलिंग तकनीकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
यदि Radiant Cooling System की लागत कम होती है और इसके लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाता है, तो यह भविष्य में भारत में पारंपरिक एयर कंडीशनर का प्रभावी विकल्प बन सकता है। इससे बिजली की खपत कम हो सकती है, पर्यावरण पर दबाव घट सकता है और लोगों को अधिक टिकाऊ तथा आरामदायक कूलिंग समाधान मिल सकता है।









