होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों पर मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत और कई लोग घायल हो गए। इसी बीच अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ गई हैं।
ईरान/अमेरिका वॉर: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट के निकट दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए हैं। इसके साथ ही अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट के पास तेल टैंकरों पर मिसाइल हमला
यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ओमान के समुद्री क्षेत्र के निकट होर्मुज स्ट्रेट में दो तेल टैंकरों—मोंबासा और अल बहिया—पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। हमले में एक भारतीय क्रू सदस्य की जान चली गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हमले के बाद दोनों जहाजों को सुरक्षित क्षेत्र की ओर ले जाने की कोशिश की गई। समुद्री सुरक्षा एजेंसियां घटना की जांच कर रही हैं और क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है।
अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान पर किए हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों एवं नागरिक नौवहन के लिए खतरे को कम करना बताया गया। CENTCOM के अनुसार, अभियान के दौरान बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर प्रिसिजन हथियारों से हमले किए गए। कार्रवाई लगभग पांच घंटे तक चली।
ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर शुरू करने का ऐलान
अमेरिका ने घोषणा की है कि उसकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात की निगरानी और नाकेबंदी फिर से शुरू करेगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जो जहाज निर्धारित नियमों का पालन करेंगे, उन्हें क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य हथियारों और सैन्य संसाधनों की आवाजाही को रोकना बताया गया है।
ट्रम्प का दावा: होर्मुज की सुरक्षा के बदले लगेगा शुल्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और इसके बदले इस मार्ग से गुजरने वाले प्रत्येक कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों पर नई आर्थिक पाबंदियां लागू की गई हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के व्यावहारिक और कानूनी पहलुओं पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है।
ईरान के नौसैनिक ठिकानों पर भी कार्रवाई
CENTCOM के अनुसार, बंदर अब्बास स्थित ईरानी नौसैनिक अड्डे और सबमरीन मेंटेनेंस फैसिलिटी को भी निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की समुद्री सैन्य क्षमता को कमजोर करना था ताकि भविष्य में जहाजों पर हमलों की संभावना कम हो सके।
ईरान का जवाब: होर्मुज पर नियंत्रण नहीं छोड़ेंगे
ईरान के शीर्ष नेतृत्व के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान अपना प्रभाव और नियंत्रण बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका के दबाव या सैन्य कार्रवाई से ईरान पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान ने दोहराया कि वह अपने समुद्री हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वयं करेगा।
बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरान का जवाबी हमला
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने बहरीन के अल-जुफैर सैन्य अड्डे पर मिसाइल और ड्रोन हमला किया है। संगठन के अनुसार, हमले में हथियारों के गोदाम, संचार केंद्र और अमेरिकी सैनिकों से जुड़ी एक इमारत को निशाना बनाया गया। ईरान ने इस अभियान को "नस्र-2" नाम दिया और इसे अमेरिकी कार्रवाई के जवाब के रूप में प्रस्तुत किया।

ट्रम्प का दावा: ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान
न्यूजमैक्स को दिए एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि हालिया अमेरिकी हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीँ वहीँ क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214PU तेहरान पहुंचा है। यह विमान आपातकालीन परिस्थितियों और बड़े सैन्य अभियानों के दौरान कमांड सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, रूस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही घटी
शिप ट्रैकिंग फर्मों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की संख्या पिछले लगभग दो महीनों में सबसे कम दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन लंबे समय तक बाधित रहा, तो तेल की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है, जिसका असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव एशिया, यूरोप और अन्य देशों की ऊर्जा सुरक्षा, शिपिंग उद्योग और वैश्विक व्यापार पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की दिशा अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।








