NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी होने के बाद अब अभ्यर्थियों की नजर काउंसलिंग प्रक्रिया पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि काउंसलिंग के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी मेडिकल सीट गंवाने की वजह बन सकती है। ऐसे में उम्मीदवारों को हर चरण में सावधानी बरतनी होगी।
नई दिल्ली: NEET UG 2026 में अच्छा स्कोर हासिल करने के बाद भी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश तभी मिलेगा, जब उम्मीदवार काउंसलिंग प्रक्रिया सही तरीके से पूरी करेंगे। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) जल्द ही ऑल इंडिया कोटा (AIQ) की काउंसलिंग शुरू कर सकती है। इस वर्ष देशभर के 823 मेडिकल कॉलेजों में 1,36,939 MBBS सीटों पर प्रवेश होना है। ऐसे में काउंसलिंग के दौरान की गई छोटी-सी गलती भी उम्मीदवार का मेडिकल सीट का सपना अधूरा छोड़ सकती है।
NEET काउंसलिंग क्यों है महत्वपूर्ण?
NEET UG में केवल अच्छा स्कोर हासिल करना मेडिकल कॉलेज में दाखिले की गारंटी नहीं है। उम्मीदवारों को मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) या संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण द्वारा निर्धारित पूरी प्रक्रिया का पालन करना होता है। सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के नियमों के अनुसार कोई भी मेडिकल कॉलेज सीधे प्रवेश नहीं दे सकता। सभी सीटों पर प्रवेश केवल काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से ही होता है।

काउंसलिंग में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीस जमा करना, चॉइस फिलिंग, चॉइस लॉकिंग, सीट आवंटन, दस्तावेज सत्यापन, कॉलेज में रिपोर्टिंग और प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
काउंसलिंग के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
उम्मीदवारों को सबसे पहले समय पर रजिस्ट्रेशन mcc.nic.in करना चाहिए और सभी जानकारियां सही भरनी चाहिए। आवेदन के दौरान नाम, जन्मतिथि, श्रेणी (Category), जेंडर और अन्य विवरण दस्तावेजों के अनुसार ही दर्ज करें। यदि किसी जानकारी में अंतर पाया जाता है तो दस्तावेज सत्यापन के समय परेशानी हो सकती है और दावा की गई श्रेणी भी रद्द हो सकती है।
कॉलेज और कोर्स का चयन करते समय केवल लोकप्रिय या टॉप मेडिकल कॉलेजों को ही प्राथमिकता देना सही रणनीति नहीं माना जाता। अपनी NEET रैंक, पिछले वर्षों के कटऑफ और सीट मिलने की संभावना को ध्यान में रखते हुए विकल्प भरना अधिक सुरक्षित रहता है।
चॉइस लॉकिंग और रिपोर्टिंग में न करें लापरवाही
चॉइस फिलिंग के बाद निर्धारित समय के भीतर चॉइस लॉक करना बेहद जरूरी होता है। यदि अंतिम समय तक लॉकिंग नहीं की जाती तो पोर्टल पर सेव की गई चॉइस ही अंतिम मानी जा सकती है। सर्वर संबंधी दिक्कतों से बचने के लिए अंतिम समय का इंतजार नहीं करना चाहिए।
सीट आवंटित होने के बाद उम्मीदवारों को तय समय सीमा के भीतर संबंधित मेडिकल कॉलेज में रिपोर्ट करना होता है। यदि समय पर रिपोर्ट नहीं की जाती तो सीट रद्द हो सकती है और अगले राउंड पर भी इसका असर पड़ सकता है।
दस्तावेज और कॉलेज की जानकारी पहले ही कर लें तैयार
काउंसलिंग से पहले सभी जरूरी दस्तावेज तैयार रखना आवश्यक है। इनमें NEET एडमिट कार्ड, स्कोरकार्ड, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, फोटो पहचान पत्र, पासपोर्ट साइज फोटो तथा लागू होने पर जाति या दिव्यांगता प्रमाण पत्र शामिल हैं।
इसके साथ ही उम्मीदवारों को जिस कॉलेज का चयन कर रहे हैं, उसकी वार्षिक फीस, हॉस्टल शुल्क, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बॉन्ड की अवधि, बॉन्ड पेनल्टी और स्टाइपेंड जैसी जानकारी भी पहले से जांच लेनी चाहिए, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
सीट छोड़ने पर लग सकती है पेनल्टी और बैन
विशेषज्ञों का कहना है कि सीट मिलने के बाद बिना सोच-समझे उसे छोड़ना भी महंगा पड़ सकता है। कई राज्यों में सीट ब्लॉक करके प्रवेश नहीं लेने वाले उम्मीदवारों पर सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने, आर्थिक पेनल्टी लगाने और भविष्य की काउंसलिंग से प्रतिबंधित करने जैसे प्रावधान लागू हैं।
हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने ऐसे अभ्यर्थियों पर दो वर्ष तक मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया से प्रतिबंध लगाने का प्रावधान किया है। यदि कोई उम्मीदवार अंतिम राउंड में सीट मिलने के बाद कॉलेज में रिपोर्ट नहीं करता और सीट खाली रह जाती है, तो उसे अगले दो वर्षों तक प्रवेश प्रक्रिया में भाग लेने से वंचित किया जा सकता है।
ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि उम्मीदवार MCC और संबंधित राज्य काउंसलिंग प्राधिकरण द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को ध्यान से पढ़ें, समय-सीमा का पालन करें और सभी औपचारिकताएं पूरी सावधानी के साथ पूरी करें। तभी NEET में हासिल किया गया अच्छा स्कोर मेडिकल सीट में बदल सकेगा।











