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संसद मे पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। अखिलेश यादव, गौरव गोगोई और अभिषेक बनर्जी ने सरकार को घेरा, सरकार ने कहा कानून जरूरी

लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर सरकार और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने सरकार की परीक्षा व्यवस्था और कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने नए कानून को परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सख्त कार्रवाई के लिए आवश्यक बताया।

नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा हुई। इस विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी और परीक्षा माफिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे केवल कानूनी बदलाव तक सीमित बताते हुए प्रशासनिक जवाबदेही और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग की।

सरकार ने बताया समय की जरूरत

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में कहा कि संशोधन विधेयक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाने और संगठित पेपर लीक नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत जांच एजेंसियों को अधिक अधिकार, त्वरित जांच और विशेष अदालतों के माध्यम से मामलों का शीघ्र निपटारा संभव होगा।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि सरकार ने सभी दलों से चर्चा के बाद बहस का समय बढ़ाने पर सहमति बनाई है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो चर्चा 10 घंटे तक भी जारी रखी जा सकती है, जिससे सभी दल अपनी बात विस्तार से रख सकें।

विपक्ष ने सरकार की परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने विधेयक पर चर्चा के दौरान कहा कि केवल नया कानून बना देने से समस्या समाप्त नहीं होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में भी कानून लागू होने के बावजूद 2026 में बड़े स्तर पर पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और परीक्षा प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए।

गोगोई ने यह भी पूछा कि यदि परीक्षा प्रणाली में सुधार की वास्तविक इच्छा थी, तो संबंधित संस्थानों और अधिकारियों की जिम्मेदारी क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों और उन पर हुई कार्रवाई का भी उल्लेख करते हुए सरकार से जवाब मांगा।

अखिलेश यादव ने सरकार पर साधा निशाना

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार वादे कम और "जुमले" अधिक देती है। उनके अनुसार देशभर में युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन किए और इन्हीं आंदोलनों के दबाव में सरकार को नया विधेयक लाना पड़ा।

उन्होंने कहा कि लगातार हुई पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित किया और सरकार समय रहते प्रभावी कदम उठाने में असफल रही। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

अभिषेक बनर्जी ने उठाए प्रशासनिक सवाल

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने चर्चा के दौरान कहा कि किसी भी छात्र का निष्पक्ष परीक्षा देना उसका अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब प्रशासनिक व्यवस्था विफल होती है तो सरकार नए कानून लाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती है।

उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली मजबूत होती तो बार-बार पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने नहीं आतीं। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली।

भाजपा सांसदों ने किया विधेयक का समर्थन

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि आज परीक्षा माफिया संगठित रूप से काम कर रहा है और उससे निपटने के लिए सख्त कानून आवश्यक है। उन्होंने बताया कि संशोधन के तहत विशेष जांच तंत्र, समयबद्ध जांच और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद लावु श्री कृष्ण देवरायलु ने भी विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने समस्या की जड़ को समझते हुए आवश्यक सुधार प्रस्तावित किए हैं।

NEET और परीक्षा प्रणाली पर भी हुई चर्चा

बहस के दौरान द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सांसद दयानिधि मारन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल एक परीक्षा मॉडल पूरे देश पर लागू करना व्यावहारिक नहीं है और राज्यों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों ने परीक्षा प्रणाली, शिक्षा सुधार, कोचिंग उद्योग, परीक्षा एजेंसियों की जवाबदेही और छात्रों के हितों पर अपने-अपने विचार रखे।

विधेयक में प्रस्तावित प्रमुख प्रावधान

संशोधन विधेयक में परीक्षा से जुड़े अपराधों के खिलाफ कड़े दंड, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन, समयबद्ध जांच, संगठित परीक्षा माफिया पर सख्त कार्रवाई और डिजिटल निगरानी तंत्र को मजबूत करने जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इससे सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

आगे क्या होगा?

लोकसभा में विस्तृत चर्चा के बाद विधेयक पर मतदान कराया जाएगा। यदि यह पारित होता है तो इसे राज्यसभा भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद संशोधित कानून पूरे देश में लागू हो सकेगा। परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों का विश्वास बहाल करने के उद्देश्य से यह विधेयक वर्तमान संसदीय सत्र के सबसे महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों में शामिल माना जा रहा है।

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