नेपाल में बाढ़ से तबाही, 157 मौतें 28 पुलिसकर्मी लापता, चितवन में 64 शव मिले

नेपाल में भीषण बाढ़ से 157 लोगों की मौत हो गई, 28 पुलिसकर्मी लापता हैं। चितवन में सबसे ज्यादा 64 शव मिले, जबकि कई इलाकों में राहत-बचाव जारी है।
नेपाल में बाढ़ से तबाही, 157 मौतें 28 पुलिसकर्मी लापता, चितवन में 64 शव मिले
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नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन की चपेट में आने से अब तक 157 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 28 पुलिसकर्मी अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा 64 शव चितवन जिले में बरामद हुए हैं। बाढ़ के बाद कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। नेपाल पुलिस के अनुसार अलग-अलग प्रभावित जिलों से शव बरामद किए जा रहे हैं और लापता लोगों की तलाश में सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं।

इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल-चीन सीमा के आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिला है। अचानक आई तेज बाढ़ ने रास्तों, पुलों, घरों और दूसरी आधारभूत संरचनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। पानी का बहाव इतना तेज था कि कई जगह वाहन, मकान और अन्य सामान देखते ही देखते पानी और मलबे में बह गए। प्रभावित इलाकों में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से लोगों को नदी किनारे के क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

नेपाल पुलिस की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 157 मृतकों में सबसे अधिक 64 शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। इसके अलावा धादिंग में 27, नवलपरासी ईस्ट में 22, गोरखा में 19, नुवाकोट में 13, तनहुन में 9 और रसुवा में 3 शव मिलने की जानकारी सामने आई है। शवों को संबंधित अस्पतालों और निर्धारित स्थानों पर रखा जा रहा है। चितवन में शवों की संख्या अधिक होने के कारण अस्पताल के मुर्दाघर में जगह की कमी की स्थिति भी सामने आई है।

चितवन में त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे बड़ी संख्या में शव और मानव अवशेष बरामद किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक बुधवार को बोटेकोशी नदी में आई बाढ़ का पानी और मलबा आगे बढ़ते हुए नदी तंत्र में पहुंचा, जिसके बाद नीचे के इलाकों में भी भारी तबाही हुई। चितवन में बरामद शवों को भरतपुर अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया है। जगह कम पड़ने के बाद आगे मिलने वाले शवों को रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी की जा रही है।

इस आपदा में नेपाल पुलिस के 28 जवानों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। अधिकारियों के मुताबिक लापता पुलिसकर्मियों की तलाश जारी है। प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के हजारों जवान राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार करीब 3,318 सुरक्षाकर्मी अलग-अलग जिलों में राहत, बचाव और सहायता कार्यों में जुटे हुए हैं।

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में अभी भी कई लोग अपने परिवार के सदस्यों की तलाश कर रहे हैं। कई लोगों का संपर्क अपने परिजनों से टूट गया है। प्रशासन की चुनौती यह है कि दुर्गम पर्वतीय इलाकों तक राहत टीमों को पहुंचाया जाए। कई जगह सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत एवं बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद सुरक्षाकर्मी नदी किनारे, बस्तियों और मलबे में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।

इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहा है। नेपाल-चीन सीमा के आसपास के क्षेत्रों में भी भारी नुकसान हुआ है। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी लोगों के मारे जाने और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। दोनों देशों की सीमा के पास बाढ़ के कारण सड़क और पुल संपर्क बाधित हुआ है। इससे प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

बाढ़ की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई स्थानों पर पानी और मलबे का तेज बहाव पूरे रास्ते में मौजूद संरचनाओं को अपने साथ बहा ले गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बाढ़ अचानक आई और लोगों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। कई इलाकों में घरों और दुकानों में पानी और मलबा भर गया। सड़कों पर कीचड़ और मलबा जमा होने के कारण सामान्य आवागमन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

शुरुआत में इस आपदा के पीछे भूकंप को संभावित कारण माना जा रहा था, लेकिन बाद के वैज्ञानिक विश्लेषण में भूस्खलन को महत्वपूर्ण कारण बताया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अतिरिक्त विश्लेषण के अनुसार शुरुआती तौर पर जिस भूकंपीय घटना को भूकंप माना गया था, वह वास्तव में भूस्खलन से पैदा हुई ऊर्जा हो सकती है। इससे बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के खिसकने के बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में मलबा पहुंचा और इसके बाद तेज बाढ़ आई।

इस पूरी घटना में बोटेकोशी नदी और उससे जुड़े जलप्रवाह की भूमिका महत्वपूर्ण रही। पहाड़ी क्षेत्र में अचानक मलबा और पानी नदी में पहुंचने के बाद उसका बहाव बेहद तेज हो गया। यही पानी आगे के इलाकों में पहुंचा और कई स्थानों पर तबाही मच गई। नदी के किनारे बसे लोगों के लिए अचानक बढ़ा जलस्तर सबसे बड़ी चुनौती बना रहा।

चितवन में 64 शव मिलने के बाद वहां प्रशासन ने नदी किनारे तलाशी अभियान और तेज कर दिया है। त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे पुलिस की टीमें लगातार खोजबीन कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगे भी नदी के किनारे से शव या मानव अवशेष मिलने की आशंका है। बरामद होने वाले शवों की पहचान करने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है।

नेपाल में इस समय सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों का पता लगाना है। बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा पर्यटकों और विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार सैकड़ों यात्री और पर्यटक आपदा के बाद संपर्क से बाहर हैं। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबरों ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है।

भारत ने भी नेपाल की स्थिति पर नजर बनाए रखी है और राहत एवं बचाव के लिए सहयोग की पेशकश की है। नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि नेपाल से निकलने वाली कई नदियां बिहार के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। ऐसे में नेपाल में भारी बारिश या अचानक आई बाढ़ का असर नीचे के क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने के रूप में दिखाई दे सकता है। बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे के जिलों में प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है।

बाढ़ से निपटने के लिए नेपाल में सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को बड़े स्तर पर लगाया गया है। हेलीकॉप्टर और अन्य संसाधनों की मदद से दुर्गम क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। हालांकि कई इलाकों में पानी का स्तर अधिक होने और रास्ते क्षतिग्रस्त होने के कारण हवाई और जमीनी राहत अभियान में मुश्किलें बनी हुई हैं।

इस आपदा ने नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे को भी सामने ला दिया है। हिमालयी क्षेत्र में भूस्खलन, ग्लेशियर से जुड़ी घटनाएं और अचानक आने वाली बाढ़ पहले भी तबाही मचाती रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी मिलने और नदी किनारे रहने वाली आबादी को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, घायलों को अस्पताल पहुंचाना और प्रभावित परिवारों तक जरूरी सहायता पहुंचाना है। मृतकों की संख्या और नुकसान का वास्तविक आंकड़ा आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकता है, क्योंकि कई दुर्गम इलाकों में अभी भी राहत टीमें पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं।

157 लोगों की मौत और 28 पुलिसकर्मियों के लापता होने की खबर ने पूरे नेपाल को झकझोर दिया है। चितवन में 64 शवों की बरामदगी इस आपदा की भयावहता को बताती है। नदी किनारे लगातार चल रही तलाशी के बीच प्रशासन को आशंका है कि प्रभावित क्षेत्रों में अभी और शव मिल सकते हैं। फिलहाल सुरक्षाबलों की टीमें मलबे और नदी किनारे के इलाकों में खोज अभियान जारी रखे हुए हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम भी चल रहा है।

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