नेतन्याहू की दो टूक- ‘गाजा में हमास का शासन नहीं होगा’, 7 अक्टूबर हमले की बरसी पर इजराइल का सख्त संदेश

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर हमले की बरसी पर कहा कि गाजा में हमास का शासन नहीं होगा। उन्होंने ईरान और हिजबुल्लाह को भी चेतावनी दी।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर हमले की तीसरी बरसी पर कहा कि गाजा में हमास का शासन नहीं होगा। यरुशलम में स्मृति समारोह के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने की बात कही और ईरान तथा हिजबुल्लाह को चेतावनी दी।

तेल अवीव: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर 2023 के हमले की तीसरी बरसी पर गाजा को लेकर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि वहां हमास का शासन नहीं होगा। यरुशलम के माउंट हर्जल सैन्य कब्रिस्तान में आयोजित राजकीय स्मृति समारोह में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने युद्ध के दौरान बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन अभी कई लक्ष्य पूरे किए जाने बाकी हैं।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय आया है जब गाजा के युद्ध के बाद वहां के प्रशासन और भविष्य की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। उन्होंने कहा कि इजराइल अपने सामने मौजूद मिशनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

7 अक्टूबर हमले की तीसरी बरसी पर राष्ट्रीय स्मृति दिवस

सोमवार को इजराइल में 7 अक्टूबर 2023 के हमले में मारे गए लोगों की याद में राष्ट्रीय स्मृति दिवस मनाया गया। सरकारी इमारतों पर सुबह 6:29 बजे झंडे आधे झुका दिए गए। इसी समय के आसपास 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में इजराइल पर हमला शुरू हुआ था।

माउंट हर्जल में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान नेतन्याहू ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी और स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। समारोह में हमले में मारे गए लोगों और उनके परिवारों को याद किया गया।

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल ने इस संघर्ष के दौरान बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन देश के सामने अभी भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां और चुनौतियां मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार अपने घोषित लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ती रहेगी।

‘गाजा में हमास का शासन नहीं होगा’

नेतन्याहू ने अपने भाषण में सबसे स्पष्ट संदेश गाजा के भविष्य को लेकर दिया। उन्होंने कहा कि गाजा में हमास का शासन नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 7 अक्टूबर के हमले में शामिल रहे लोगों और बंधकों को रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का उनका संकल्प कायम है।

यह बयान गाजा में युद्ध के बाद की व्यवस्था को लेकर चल रही बहस के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युद्ध के बाद गाजा का प्रशासन कौन संभालेगा, सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी और हमास की राजनीतिक एवं सैन्य भूमिका क्या होगी—इन सवालों पर अब तक व्यापक सहमति नहीं बन पाई है।

इजराइली प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में हमले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर रुख दोहराया और कहा कि इजराइल अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता रहेगा।

पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने की बात

एक अन्य भाषण में नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर के पीड़ितों के परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार और देश पीड़ित परिवारों के दुख को साझा करते हैं। उन्होंने हमले के दौरान हुई हत्याओं, अपहरण, आगजनी और लूट जैसी घटनाओं की कड़ी निंदा की। नेतन्याहू ने कहा कि हमले के लिए जिम्मेदार लोगों को लेकर इजराइल का रुख नरम नहीं होगा।

हालांकि, समारोह के दौरान एक व्यक्ति ने नेतन्याहू के भाषण में उन्हें टोकते हुए सवाल उठाया कि 7 अक्टूबर को उनके बेटे समेत बड़ी संख्या में लोगों की जान क्यों नहीं बचाई जा सकी। इस व्यवधान के कारण प्रधानमंत्री को कुछ देर के लिए अपना संबोधन रोकना पड़ा।

यह घटना दिखाती है कि हमले के वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों और सरकार के बीच सुरक्षा संबंधी जवाबदेही को लेकर भावनाएं बेहद तीव्र हैं।

7 अक्टूबर के हमले में क्या हुआ था?

7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में लड़ाकों ने इजराइल के दक्षिणी हिस्सों में बड़े पैमाने पर हमला किया था। हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। उपलब्ध आधिकारिक इजराइली आंकड़ों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, हमले में 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था। इनमें से कुछ बंधकों की बाद में मौत की पुष्टि हुई।

इस हमले के बाद इजराइल ने गाजा में व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। मंत्रालय हमास के प्रशासन के अधीन है, हालांकि उसके आंकड़ों को संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं व्यापक रूप से इस्तेमाल करती रही हैं।

युद्ध का असर गाजा से आगे तक पहुंचा

7 अक्टूबर के हमले के बाद शुरू हुआ संघर्ष केवल इजराइल और हमास तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्र में ईरान समर्थित समूहों के साथ इजराइल का टकराव भी बढ़ा। लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाया। नेतन्याहू ने अपने भाषण में हिजबुल्लाह को लेकर भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इजराइल संगठन के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा, लेकिन साथ ही उम्मीद जताई कि इससे भविष्य में शांति का रास्ता खुल सकता है।

उन्होंने कहा कि लेबनान के अधिकांश लोग इजराइल के साथ शांति चाहते हैं और सैन्य दबाव से ऐसी स्थिति पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें शांति का अवसर बनाया जा सके।

ईरान को भी नेतन्याहू की चेतावनी

नेतन्याहू ने अपने भाषण में ईरान के नेतृत्व को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इजराइल तेहरान में मौजूद अयातुल्ला शासन को अपने अस्तित्व के लिए खतरा पैदा करने की अनुमति नहीं देगा।

उन्होंने दावा किया कि ईरान का नेतृत्व पहले की तुलना में कमजोर स्थिति में है। नेतन्याहू के अनुसार, इजराइल अपने खिलाफ किसी भी गंभीर सुरक्षा खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।

ईरान और इजराइल के बीच तनाव लंबे समय से मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव ने क्षेत्रीय संघर्ष के और व्यापक होने की आशंका को बढ़ाया है।

गाजा के भविष्य पर दुनिया की नजर

7 अक्टूबर हमले की तीसरी बरसी पर नेतन्याहू के बयान से एक बार फिर यह सवाल केंद्र में आ गया है कि युद्ध के बाद गाजा की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी। इजराइल लगातार कहता रहा है कि वह हमास को गाजा की सत्ता और सैन्य क्षमता से दूर रखना चाहता है। दूसरी ओर, गाजा के भविष्य के प्रशासन को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रस्ताव सामने आते रहे हैं। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सुरक्षा, शासन, पुनर्निर्माण और मानवीय सहायता के मुद्दों के बीच ऐसा समाधान कैसे तैयार किया जाए जिसे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय पक्ष स्वीकार कर सकें।

7 अक्टूबर की बरसी पर नेतन्याहू का संदेश स्पष्ट था कि इजराइल हमास को गाजा का शासक स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। साथ ही, ईरान और हिजबुल्लाह को लेकर उनके बयान संकेत देते हैं कि इजराइल की सुरक्षा नीति आने वाले समय में भी मध्य पूर्व की राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को प्रभावित करती रहेगी।

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