MP के 11 जिलों में सूखे का संकट, इंदौर-उज्जैन समेत कई क्षेत्रों में 52% तक कम बारिश

मध्य प्रदेश के 11 जिलों में सामान्य से कम बारिश से सूखे का संकट बढ़ा। आलीराजपुर में 52% तक कमी, सरकार कराएगी फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन।

मध्य प्रदेश के 11 जिलों में इस मानसून सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। आलीराजपुर में सबसे ज्यादा 52 प्रतिशत कमी रही। सरकार अब प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन कराकर सूखे की स्थिति का आकलन करेगी।

भोपाल: मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण 11 जिलों में सूखे जैसी स्थिति सामने आई है। इंदौर और उज्जैन भी प्रभावित जिलों में शामिल हैं। राज्य में सामान्य 37.3 इंच के मुकाबले अब तक 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा कमी आलीराजपुर में रही, जहां सामान्य से 52 प्रतिशत कम वर्षा हुई। सरकार अब प्रभावित इलाकों का फील्ड सर्वे कराएगी।

MP के 11 जिलों में कम बारिश से सूखे का संकट

मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन बारिश की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है। राज्य के 11 जिलों में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई है। कमजोर मानसून के कारण इन जिलों में सूखे जैसी परिस्थितियां बनने लगी हैं। प्रभावित जिलों में इंदौर और उज्जैन जैसे प्रमुख जिले भी शामिल हैं।

मध्य प्रदेश में सामान्य मानसून के दौरान करीब 37.3 इंच बारिश होती है। इस बार राज्य में अब तक लगभग 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई है। हालांकि राज्य का कुल आंकड़ा सामान्य के काफी करीब है, लेकिन अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण असमान रहा है। कई जिलों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।

आलीराजपुर में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

कम बारिश से प्रभावित जिलों में आलीराजपुर की स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है। यहां सामान्य के मुकाबले करीब 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। इसके अलावा धार और झाबुआ भी उन जिलों में शामिल हैं जहां मानसून कमजोर रहा है।

बारिश की कमी का असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है, वहां फसलों के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका है। जल स्रोतों और भूजल स्तर पर भी इसका असर पड़ सकता है।

इंदौर और उज्जैन जैसे जिलों का प्रभावित सूची में होना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन क्षेत्रों में कृषि के साथ-साथ शहरी और औद्योगिक गतिविधियां भी बारिश और जल संसाधनों पर निर्भर रहती हैं।

सरकार कराएगी फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन

कम बारिश वाले जिलों में सूखे की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए राज्य सरकार फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया के जरिए यह आकलन किया जाएगा कि बारिश की कमी का फसलों, किसानों और स्थानीय जल संसाधनों पर कितना असर पड़ा है।

सिर्फ बारिश के आंकड़ों के आधार पर सूखे की स्थिति तय करने के बजाय जमीन पर वास्तविक परिस्थितियों की जांच की जाएगी। इसमें प्रभावित क्षेत्रों में फसल की स्थिति, जल उपलब्धता और बारिश की कमी से हुए संभावित नुकसान का जायजा लिया जा सकता है।

फील्ड सर्वे के बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित जिलों की स्थिति का आगे आकलन किया जाएगा। इसके बाद सरकार जरूरत के अनुसार राहत और अन्य कदमों पर निर्णय ले सकती है।

बारिश का असमान वितरण बना चुनौती

मध्य प्रदेश में इस बार मानसून की कुल बारिश सामान्य आंकड़े के करीब है, लेकिन जिलों के बीच बारिश का वितरण समान नहीं रहा। कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त बारिश हुई, जबकि कई जिलों में लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रही।

ऐसे में राज्य सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहां बारिश की कमी का सीधा असर कृषि और ग्रामीण जीवन पर पड़ा है। फील्ड सर्वे और ग्राउंड वेरिफिकेशन के जरिए सरकार इन परिस्थितियों की विस्तृत जानकारी जुटाएगी।

आने वाले दिनों में सर्वे की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि 11 जिलों में बारिश की कमी से कितनी गंभीर स्थिति बनी है और किन क्षेत्रों को अतिरिक्त सरकारी सहायता की जरूरत है।

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