Tata Trusts में Noel Tata परिवार का बढ़ा प्रभाव, 36 में से 17 ट्रस्टी पद; N Chandrasekaran के तीसरे कार्यकाल पर नजर

Tata Trusts में Noel Tata और उनके परिवार की पकड़ बढ़ी है। सात शेयरधारक ट्रस्टों में परिवार के पास 36 में से 17 ट्रस्टी पद हैं। वहीं N Chandrasekaran के तीसरे

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की संभावित वार्षिक आम बैठक से पहले शेयरधारक ट्रस्टों के बीच वोटिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को एक और अवधि के लिए बढ़ाने पर फैसला होने की संभावना है।

Tata Trusts: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय शेयरधारक ट्रस्टों को करना है। ऐसे में टाटा ट्रस्ट्स में नोएल टाटा और उनके परिवार के बढ़ते प्रभाव ने वोटिंग के संभावित समीकरण को चर्चा में ला दिया है।

चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल सामान्य तौर पर 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है। हालांकि, टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को हुई बैठक में उन्हें तीसरा कार्यकाल देने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया था। अब इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलने के लिए शेयरधारकों के समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि टाटा संस की संभावित वार्षिक आम बैठक से पहले ट्रस्टों की हिस्सेदारी और उनके ट्रस्टी बोर्ड की संरचना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

36 ट्रस्टी पदों में नोएल परिवार की मजबूत मौजूदगी

टाटा ट्रस्ट्स के अंतर्गत आने वाले सात प्रमुख ट्रस्टों में कुल 36 ट्रस्टी पद बताए जाते हैं। इनमें से 17 पदों पर नोएल टाटा और उनके परिवार के सदस्यों की मौजूदगी है। नोएल टाटा के साथ उनके बेटे नेविल टाटा और बेटियां लीया टाटा तथा माया टाटा कई ट्रस्टों का हिस्सा हैं। रतन टाटा के निधन से कुछ महीने पहले मई 2024 में लीया और माया को तीन-तीन ट्रस्टों में शामिल किया गया था। इसके बाद ट्रस्टों के भीतर नोएल परिवार की भागीदारी और प्रभाव पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है।

किस ट्रस्ट में कितना प्रभाव?

  • सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट: टाटा संस में करीब 27.98 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले इस प्रमुख ट्रस्ट में छह ट्रस्टी हैं। इनमें नोएल टाटा और उनके बेटे नेविल टाटा शामिल हैं।
  • सर रतन टाटा ट्रस्ट: टाटा संस में इस ट्रस्ट की हिस्सेदारी करीब 23.56 प्रतिशत बताई जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, यह ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से जुड़े कथित अनुपालन मामलों के कारण फ्रीज है।
  • जेआरडी टाटा ट्रस्ट: टाटा संस में करीब 4.01 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले इस ट्रस्ट में नोएल टाटा और नेविल टाटा की मौजूदगी महत्वपूर्ण है। दोनों के पास ट्रस्टी संरचना में करीब 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व बताया जाता है।
  • टाटा एजुकेशन ट्रस्ट: करीब 3.73 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले इस ट्रस्ट में नोएल, लीया और माया टाटा मिलकर लगभग 60 प्रतिशत ट्रस्टी प्रतिनिधित्व रखते हैं।
  • टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट: इस ट्रस्ट की टाटा संस में हिस्सेदारी करीब 3.73 प्रतिशत है। यहां नोएल, लीया और नेविल टाटा की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत बताई जाती है।
  • आरडी टाटा ट्रस्ट: इसमें नोएल, माया और नेविल टाटा की संयुक्त मौजूदगी करीब 50 प्रतिशत बताई गई है। इनके अलावा विजय सिंह, श्रीनिवासन और तुषाद बी. दुबाश ट्रस्टी हैं।
  • पब्लिक सर्विस ट्रस्ट: टाटा संस में करीब 0.1 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले इस ट्रस्ट में नोएल, लीया और माया टाटा की संयुक्त भागीदारी करीब 60 प्रतिशत है। जिमी टाटा और जेएन मिस्त्री भी इसके ट्रस्टियों में शामिल हैं।

चंद्रशेखरन के लिए क्यों अहम है वोटिंग गणित?

टाटा संस के चेयरमैन के तीसरे कार्यकाल का फैसला सिर्फ टाटा ट्रस्ट्स की आंतरिक संरचना से तय नहीं होगा। कंपनी के अन्य बड़े शेयरधारकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इनमें शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप प्रमुख है, जिसकी टाटा संस में 18 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी बताई जाती है। नोएल टाटा का विवाह शापूरजी पालोनजी परिवार से हुआ है। ऐसे में ट्रस्टों में उनके परिवार की मजबूत मौजूदगी और एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी को टाटा संस की वोटिंग के व्यापक समीकरण में अहम माना जा रहा है।

इसके अलावा टाटा समूह की प्रमुख कंपनियों—टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर—की टाटा संस में संयुक्त हिस्सेदारी भी करीब 12 प्रतिशत बताई जाती है। इसलिए चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर अंतिम फैसला कई बड़े शेयरधारकों के रुख पर निर्भर करेगा।

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