प्रयागराज के माघ मेला 2027 में दंडी संन्यासी पहली बार अखाड़ों की तर्ज पर सामूहिक ‘देव अमृत स्नान’ करेंगे। आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा ध्वज-पताका और बैंडबाजे के साथ संगम तक जाएगी।
प्रयागराज: माघ मेला 2027 में दंडी संन्यासियों के स्नान को लेकर नई परंपरा शुरू होने जा रही है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के निर्णय के अनुसार संन्यासी ध्वज-पताका और बैंडबाजे के साथ आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा निकालकर संगम पहुंचेंगे। वहां संगम पूजन के बाद सामूहिक स्नान किया जाएगा, जिसे ‘देव अमृत स्नान’ नाम दिया गया है।
पहली बार संगम में सामूहिक ‘देव अमृत स्नान’ करेंगे दंडी संन्यासी
माघ मेला 2027 में दंडी संन्यासियों के लिए स्नान की एक नई परंपरा शुरू होने जा रही है। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने अखाड़ों की तर्ज पर सामूहिक रूप से संगम में स्नान करने का निर्णय लिया है। इस स्नान को ‘देव अमृत स्नान’ नाम दिया गया है।

इस अवसर पर दंडी संन्यासी ध्वज-पताका और बैंडबाजे के साथ मेला क्षेत्र में शोभायात्रा निकालेंगे। शोभायात्रा में आदिशंकराचार्य की भव्य झांकी शामिल होगी। मेला क्षेत्र का भ्रमण करते हुए दंडी संन्यासी संगम तट तक पहुंचेंगे। वहां संगम पूजन के बाद सभी संन्यासी सामूहिक रूप से स्नान करेंगे।
अब तक दंडी संन्यासी अलग-अलग समूहों में गंगा स्नान करते रहे हैं। माघ मेला में यह पहली बार होगा जब वे अखाड़ों की तरह एक साथ शोभायात्रा के रूप में संगम तक जाएंगे।
पांच हजार से अधिक दंडी संन्यासी करते हैं कल्पवास
माघ मेला क्षेत्र के गंगोली शिवालय मार्ग पर हर वर्ष दंडी संन्यासियों के लिए अलग नगर बसाया जाता है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आए करीब पांच हजार दंडी संन्यासी कल्पवास करते हैं।
कल्पवास के दौरान दंडी संन्यासी भजन, पूजन और प्रवचन में समय बिताते हैं। इसके साथ ही विभिन्न स्नान पर्वों पर गंगा में आस्था की डुबकी लगाते हैं। पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा जैसे प्रमुख पर्वों पर भी वे स्नान करते हैं।
हालांकि, शिविर स्थल से संगम की दूरी होने के कारण अब तक सभी दंडी संन्यासी किसी एक समूह के रूप में संगम तक स्नान करने नहीं गए हैं। इस बार परिषद ने अखाड़ों की परंपरा से प्रेरित होकर सामूहिक स्नान का निर्णय लिया है।
वसंत पंचमी के बाद निकलेगी शोभायात्रा
दंडी संन्यासियों की प्रस्तावित शोभायात्रा वसंत पंचमी के बाद निकाली जाएगी। इसमें ध्वज-पताकाओं और बैंडबाजे के साथ आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा संगम की ओर जाएगी। वरिष्ठ दंडी संन्यासियों को रथ पर विराजमान किए जाने की भी योजना है।
अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम के अनुसार, आदिशंकराचार्य की शोभायात्रा निकालकर संगम में सामूहिक स्नान करने का निर्णय लिया गया है। इस आयोजन को ‘देव अमृत स्नान’ नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि दंडी संन्यासियों को भगवान नारायण का स्वरूप माना जाता है।
मेला प्रशासन से सुरक्षा और सुविधाओं की मांग
सामूहिक स्नान के आयोजन को देखते हुए अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद ने मेला प्रशासन से आवश्यक सुविधाएं और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। परिषद का कहना है कि स्नान के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, इसलिए आयोजन के लिए उचित व्यवस्था जरूरी है।
वसंत पंचमी के बाद स्नान करने का फैसला भी इसी उद्देश्य से लिया गया है, ताकि प्रमुख स्नान पर्वों के दौरान संगम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अतिरिक्त दबाव न बने।
माघ मेला 2027 में होने वाला यह ‘देव अमृत स्नान’ दंडी संन्यासियों की परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ सकता है। आयोजन के दौरान शोभायात्रा, संगम पूजन और सामूहिक स्नान प्रमुख आकर्षण रहेंगे।











