नोएडा। साइबर ठगों ने नोएडा में निवेश के नाम पर तीन लोगों को अपना शिकार बनाया और करीब 24.94 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने पहले पीड़ितों को WhatsApp और Telegram ग्रुप में जोड़ा। इसके बाद निवेश और ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर उनसे अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। जब पीड़ितों ने अपनी रकम वापस निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने तरह-तरह के बहाने बनाकर उन्हें फंसाए रखा। मामले सामने आने के बाद साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामले में सामने आई शिकायतों के मुताबिक तीनों पीड़ित अलग-अलग तरीके से साइबर ठगों के संपर्क में आए थे। आरोपियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर पहले भरोसा कायम किया और फिर निवेश के नाम पर पैसे जमा करवाए। यह तरीका साइबर अपराधियों के उस पैटर्न से मेल खाता है, जिसमें पहले WhatsApp या Telegram पर निवेश समूह में जोड़ा जाता है और ग्रुप में नकली मुनाफे की तस्वीरें और सफलता की कहानियां दिखाकर पीड़ित को ज्यादा पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है।
सेक्टर-26 निवासी नीतीश श्रीवास्तव ने पुलिस को बताया कि उन्हें अगस्त 2025 में Telegram पर एक मैसेज मिला था। मैसेज के जरिए उन्हें निवेश से संबंधित एक ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में मौजूद लोगों ने निवेश करने पर ज्यादा रिटर्न मिलने का दावा किया। शुरुआत में पूरी प्रक्रिया सामान्य निवेश जैसी दिखाई गई, जिसके बाद नीतीश आरोपियों के बताए बैंक खातों में रकम भेजने लगे।
शिकायत के मुताबिक उन्होंने करीब 20 अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कुल 8 लाख 64 हजार 410 रुपए आरोपियों के बताए खातों में ट्रांसफर किए। उन्हें उम्मीद थी कि निवेश की रकम बढ़ने के बाद पैसा वापस निकाल सकेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। न तो मूल रकम वापस मिली और न ही कथित मुनाफा उनके खाते में आया। इसके बाद उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा वेस्ट की गौड़ सिटी-2 स्थित महागुन मायवुड्स से जुड़ा है। यहां रहने वाले 35 वर्षीय हर्षित ने पुलिस को बताया कि सितंबर 2025 में उन्हें एक अनजान नंबर से WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया। कुछ समय बाद उन्हें Telegram के एक ग्रुप में भेज दिया गया।
ग्रुप में मौजूद लोगों ने ट्रेडिंग के जरिए बड़ा मुनाफा कमाने का लालच दिया। आरोपियों ने हर्षित को एक वेबसाइट का लिंक भी भेजा। वेबसाइट पर निवेश और मुनाफे से जुड़ी जानकारी दिखाई जाती थी। शुरुआत में उनसे सिर्फ 5 हजार रुपए जमा करवाए गए। इसके बाद वेबसाइट पर मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई दिया तो उनका भरोसा और मजबूत हो गया।
यहीं से ठगों ने उनसे ज्यादा रकम निवेश करवानी शुरू कर दी। हर्षित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 7 लाख 44 हजार 920 रुपए जमा कर दिए। जब उन्होंने अपनी रकम निकालने की कोशिश की तो आरोपियों ने कहा कि बैंक की डिटेल गलत दर्ज हो गई है। पीड़ित के मुताबिक बैंक की जानकारी सही होने के बावजूद आरोपियों ने रकम वापस नहीं की। इसके बाद उन्हें शक हुआ कि पूरा निवेश प्लेटफॉर्म ही फर्जी है।
साइबर अपराधियों के इस तरीके में अक्सर फर्जी वेबसाइट या ऐप पर पीड़ित को उसका पैसा और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता है। इससे व्यक्ति को लगता है कि उसका निवेश वास्तव में बढ़ रहा है। जब वह बड़ी रकम जमा कर देता है और पैसे निकालने की कोशिश करता है, तब ठग टैक्स, प्रोसेसिंग फीस, बैंक चार्ज या अन्य किसी बहाने से अतिरिक्त भुगतान की मांग कर सकते हैं। कई मामलों में रकम देने के बाद भी पैसा वापस नहीं मिलता।
नोएडा के इन मामलों में भी पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि पीड़ितों से जिन बैंक खातों में पैसे जमा करवाए गए, वे खाते किसके नाम पर हैं। इसके साथ ही उन मोबाइल नंबरों की भी जांच की जा रही है, जिनसे पीड़ितों से संपर्क किया गया था।
पुलिस WhatsApp और Telegram ग्रुप की भी जानकारी जुटा रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि ग्रुप किसने बनाया था, उसमें कौन-कौन लोग एडमिन थे और पीड़ितों को किस तरीके से निवेश के लिए तैयार किया गया।
फर्जी वेबसाइट भी जांच के दायरे में है। पुलिस यह पता लगाएगी कि वेबसाइट कब बनाई गई, उसका सर्वर कहां था और उसे कौन संचालित कर रहा था। यदि वेबसाइट के जरिए कई लोगों से पैसे जमा करवाए गए हैं तो जांच का दायरा नोएडा से बाहर भी बढ़ सकता है।
साइबर ठग अक्सर ग्रुप में कई फर्जी सदस्य बनाकर रखते हैं। ये सदस्य कथित तौर पर निवेश से मुनाफा कमाने की बातें करते हैं और स्क्रीनशॉट साझा करते हैं। इससे नए सदस्य को लगता है कि दूसरे लोग भी पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद वह भी निवेश शुरू कर देता है। प्रवर्तन निदेशालय और साइबर सुरक्षा एजेंसियां पहले भी ऐसे WhatsApp और Telegram आधारित निवेश घोटालों के इसी तरह के तौर-तरीके सामने ला चुकी हैं।
इस तरह के मामलों में ठग शुरुआत में कम रकम लगवाकर विश्वास हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। कभी-कभी छोटी रकम पर कथित मुनाफा भी दिखाया जाता है। इसके बाद पीड़ित को ज्यादा रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। जैसे ही बड़ी रकम जमा हो जाती है, निकासी रोक दी जाती है।
नोएडा पुलिस अब तीनों मामलों को जोड़कर भी देख रही है कि कहीं इनके पीछे एक ही साइबर गिरोह तो सक्रिय नहीं है। अगर मोबाइल नंबर, बैंक खाते, वेबसाइट या Telegram-WhatsApp ग्रुप में समानता मिलती है तो पुलिस को गिरोह तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं।
पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती ठगी की रकम को ट्रेस करना भी है। साइबर ठग अक्सर रकम सीधे अपने खाते में लेने के बजाय अलग-अलग बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को आम तौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है। रकम कई खातों में घूमने के बाद दूसरे माध्यमों से निकाल ली जाती है, जिससे जांच और रिकवरी मुश्किल हो जाती है।
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को सोशल मीडिया पर मिलने वाले निवेश प्रस्तावों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी WhatsApp या Telegram ग्रुप में शामिल होकर केवल ग्रुप में दिख रहे मुनाफे या दूसरे सदस्यों के दावों के आधार पर पैसा निवेश नहीं करना चाहिए।
सरकारी साइबर सुरक्षा सलाह में भी लोगों को ऐसे सोशल मीडिया निवेश ग्रुप से सावधान रहने को कहा गया है, जहां असामान्य रूप से ज्यादा या गारंटीड रिटर्न का दावा किया जाता है। किसी निवेश सलाहकार या वित्तीय संस्था की वास्तविकता की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन वित्तीय ठगी हो जाती है तो उसे देरी किए बिना साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करनी चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में 1930 पर तत्काल संपर्क करना जरूरी है।
फिलहाल नोएडा साइबर थाना पुलिस तीनों मामलों में ठगी की रकम, बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, WhatsApp-Telegram ग्रुप और वेबसाइट से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जुटा रही है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तीनों वारदातों के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग साइबर ठग सक्रिय थे।
कुल मिलाकर, करीब 24.94 लाख रुपए की इस ठगी में साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया के जरिए भरोसा बनाया और निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर रकम ट्रांसफर कराई। पीड़ितों को जब अपना पैसा वापस नहीं मिला, तब उन्होंने पुलिस से शिकायत की। अब साइबर पुलिस बैंक खातों और डिजिटल नेटवर्क की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।