जोशीमठ के उर्गम गांव स्थित कल्पेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार रात भारी बारिश के बीच भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से आए मलबे में कई मूर्तियां और शिवलिंग दब गए, जबकि भंडार कक्ष व पुजारी निवास को नुकसान पहुंचा।
ज्योर्तिमठ: उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच पंचम केदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर में पहाड़ी से भारी मलबा आ गया। सोमवार देर रात हुए भूस्खलन के कारण मंदिर परिसर में रखी कई मूर्तियां और शिवलिंग दब गए। भंडार गृह, पुजारी कक्ष और सुरक्षा दीवार को भी नुकसान हुआ है। राहत की बात यह रही कि मंदिर का गर्भगृह सुरक्षित है और घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
पहाड़ी से मलबा आने के बाद मंदिर परिसर में मची अफरा-तफरी
ज्योर्तिमठ के उर्गम गांव में स्थित कल्पेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार देर रात तेज बारिश के बीच पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। पहाड़ी का मलबा सीधे मंदिर परिसर में आ गया, जिससे वहां मौजूद कई छोटे मंदिर और धार्मिक प्रतिमाएं मलबे में दब गईं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मलबे की मात्रा काफी अधिक थी। घटना के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर मलबा हटाने का काम शुरू किया। बारिश के कारण राहत कार्य में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
कई शिवलिंग और देवी-देवताओं की मूर्तियां दबीं
भूस्खलन के कारण मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ कई शिवलिंग भी मलबे में दब गए। परिसर में बने भंडार गृह और पुजारी निवास को भी नुकसान पहुंचा है।
भंडार गृह के ऊपर लगा टीन शेड टूट गया। अंदर रखा सामान भी मलबे और बारिश की वजह से प्रभावित हुआ है। इसके अलावा मंदिर की भोग मंडी और पीछे की सुरक्षा दीवार को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
गर्भगृह सुरक्षित, नहीं हुई जनहानि
भूस्खलन से मंदिर परिसर के बाहरी हिस्से को काफी नुकसान हुआ, लेकिन मुख्य मंदिर का गर्भगृह सुरक्षित बताया जा रहा है। मलबा गर्भगृह तक नहीं पहुंचा। घटना के दौरान मंदिर में मौजूद लोगों या स्थानीय निवासियों के हताहत होने की भी सूचना नहीं है।
गर्भगृह के बाहर बने छोटे मंदिरों पर मलबा गिरने से उन्हें नुकसान हुआ है। स्थानीय लोग लगातार मलबा हटाकर दबे हुए धार्मिक स्थलों और प्रतिमाओं को सुरक्षित निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
तीन साल पहले भी हुआ था भूस्खलन
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कल्पेश्वर मंदिर के आसपास पहाड़ी क्षेत्र में पहले भी भूस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं। करीब तीन वर्ष पहले बरसात के दौरान इसी क्षेत्र में भूस्खलन हुआ था। उस समय भी भोग मंडी और पुजारी निवास को नुकसान पहुंचा था, लेकिन मलबा मंदिर परिसर तक नहीं पहुंचा था।
इस बार भूस्खलन ज्यादा व्यापक रहा और मलबा मंदिर प्रांगण तक पहुंच गया। इससे मूर्तियों, शिवलिंग और सुरक्षा दीवार को भी नुकसान हुआ है।
लगातार बारिश को देखते हुए क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। ऐसे में स्थानीय लोगों की प्राथमिकता फिलहाल मंदिर परिसर से मलबा हटाने और क्षतिग्रस्त हिस्सों को सुरक्षित करने की है।












