उत्तर कोरिया ने जापान सागर की ओर शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागकर एक बार फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है। जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने संयुक्त निगरानी शुरू कर दी है, जबकि इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी आलोचना हो रही है।
प्योंगयांग: उत्तर कोरिया ने एक बार फिर पूर्वी एशिया में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाते हुए जापान सागर (Sea of Japan) की दिशा में एक शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया है। दक्षिण कोरिया और जापान की सैन्य एजेंसियों ने पुष्टि की कि मिसाइल उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय शहर वॉनसान (Wonsan) क्षेत्र से स्थानीय समयानुसार शाम करीब पांच बजे दागी गई। इस घटना के बाद जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने संयुक्त रूप से स्थिति की निगरानी तेज कर दी है।
यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब उत्तर कोरिया ने एक दिन पहले ही जापान के तेजी से बढ़ते सैन्य बजट और रक्षा क्षमताओं की आलोचना करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया था। विश्लेषकों का मानना है कि मिसाइल परीक्षण केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों और अमेरिका के लिए एक राजनीतिक संदेश भी है।
दक्षिण कोरिया ने बुलाई आपात सुरक्षा बैठक
मिसाइल लॉन्च की जानकारी मिलते ही दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी आपात बैठक बुलाई। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस परीक्षण को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। सियोल ने कहा कि सेना पूरी तरह सतर्क है और किसी भी अतिरिक्त उकसावे का जवाब देने के लिए तैयार है। दक्षिण कोरिया की संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने बताया कि मिसाइल की उड़ान, गति और अन्य तकनीकी विशेषताओं का अमेरिका और जापान के साथ मिलकर विश्लेषण किया जा रहा है।
जापान ने जहाजों को जारी की चेतावनी
जापान के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मिसाइल का कोई हिस्सा जापानी क्षेत्र या उसके समुद्री इलाके में नहीं गिरा। इसके बावजूद जापान कोस्ट गार्ड ने समुद्र में मौजूद जहाजों और मछुआरों को सतर्क रहने की सलाह दी। प्रशासन ने कहा कि यदि समुद्र में किसी भी प्रकार का संदिग्ध मलबा या वस्तु दिखाई दे तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी जाए। सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे समुद्री क्षेत्र की निगरानी बढ़ा दी है।
जून के बाद पहला मिसाइल परीक्षण
यह उत्तर कोरिया का जून के अंत के बाद पहला बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण है। पिछले परीक्षण में उत्तर कोरिया ने एक सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल, उन्नत 240 मिमी मल्टीपल रॉकेट लॉन्च सिस्टम और 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर का परीक्षण किया था। उत्तर कोरिया लगातार अपने मिसाइल और हथियार कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण उसकी सैन्य क्षमता को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय दबाव का जवाब देने की रणनीति का हिस्सा है।

अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास से पहले बढ़ा तनाव
इस महीने के अंत में अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाएं अपना वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास आयोजित करने वाली हैं। दोनों देशों का कहना है कि यह अभ्यास पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है और इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखना है। हालांकि, उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों को अपने खिलाफ युद्ध की तैयारी बताता रहा है। हर वर्ष ऐसे सैन्य अभ्यासों से पहले या उनके दौरान उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण या सैन्य बयानबाजी के जरिए प्रतिक्रिया देता है। विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का मिसाइल परीक्षण भी उसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अमेरिका ने कहा- तत्काल खतरा नहीं
अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड ने बयान जारी कर कहा कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार यह मिसाइल अमेरिकी क्षेत्र, सैनिकों या सहयोगी देशों के लिए तत्काल खतरा नहीं है। अमेरिका ने दोहराया कि वह अपने सहयोगियों जापान और दक्षिण कोरिया की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उसने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
जापान बढ़ा रहा है रक्षा बजट
हाल के वर्षों में जापान ने अपनी रक्षा नीति में बड़े बदलाव किए हैं। वर्ष 2025 में जापान ने अपने रक्षा बजट में लगभग 9.7 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए इसे करीब 88.3 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। यह देश की जीडीपी का लगभग 1.4 प्रतिशत है और 1958 के बाद सबसे बड़ा रक्षा खर्च माना जा रहा है। जापान का कहना है कि उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम, चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए रक्षा क्षमता बढ़ाना आवश्यक हो गया है।
किम यो जोंग ने दी थी चेतावनी
मिसाइल परीक्षण से एक दिन पहले उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने जापान के सैन्य विस्तार पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि जापान अपनी सैन्य क्षमताओं को लगातार बढ़ाता रहा तो उत्तर कोरिया भी उसके जवाब में नए सैन्य विकल्प अपनाएगा। उनका बयान उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।
चीन भी जता चुका है चिंता
उत्तर कोरिया का प्रमुख सहयोगी चीन भी हाल के महीनों में जापान की रक्षा नीति को लेकर चिंता व्यक्त कर चुका है। बीजिंग का कहना है कि जापान का तेजी से सैन्य आधुनिकीकरण क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, चीन ने उत्तर कोरिया के इस ताजा मिसाइल परीक्षण पर फिलहाल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बढ़ता दबाव
पूर्वी एशिया में पिछले कुछ वर्षों से सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम, जापान का रक्षा आधुनिकीकरण, अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यास और चीन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी ने पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयासों को फिर से गति नहीं मिली तो आने वाले महीनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है।










