विश्व चैंपियन भारतीय ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने पुष्टि की है कि वह मई में होने वाले प्रतिष्ठित नॉर्वे शतरंज टूर्नामेंट में हिस्सा लेंगे, जिसमें दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी और गत चैंपियन मैग्नस कार्लसन सहित कई दिग्गज खिलाड़ी शामिल होंगे।
स्पोर्ट्स न्यूज़: भारतीय शतरंज के इतिहास रचने वाले मौजूदा विश्व चैंपियन डी. गुकेश ने प्रतिष्ठित नॉर्वे शतरंज (Norway Chess) 2026 में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है। 25 मई से 5 जून तक आयोजित होने वाले इस टूर्नामेंट में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और गत चैंपियन मैग्नस कार्लसन सहित कई दिग्गज ग्रैंडमास्टर्स भी हिस्सा लेंगे। इस साल यह टूर्नामेंट अपने पारंपरिक स्थल स्टेवेंगर से हटकर पहली बार ओस्लो में खेला जाएगा, जिससे प्रतियोगिता को नया ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयाम मिलेगा।
नॉर्वे शतरंज को दुनिया के सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी आमंत्रण टूर्नामेंटों में से एक माना जाता है, जहां सिर्फ शीर्ष रेटिंग वाले खिलाड़ी ही आमंत्रित किए जाते हैं। ऐसे में गुकेश की मौजूदगी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
गुकेश: सबसे युवा विश्व चैंपियन के रूप में वापसी

पिछले साल ओपन वर्ग में तीसरा स्थान हासिल करने वाले डी. गुकेश इस बार ओस्लो में शतरंज इतिहास के सबसे कम उम्र के विश्व चैंपियन के रूप में उतरेंगे। अपनी भागीदारी की पुष्टि करते हुए गुकेश ने कहा,
'मैं नॉर्वे शतरंज में फिर से खेलकर बेहद खुश हूं। यह हमेशा बेहद चुनौतीपूर्ण टूर्नामेंट रहा है, जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी आमने-सामने होते हैं। मैं कठिन मुकाबलों के लिए तैयार हूं और रोमांचक बाजियों का इंतजार कर रहा हूं।'
गुकेश ने 2024 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहले कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीता और फिर चीन के डिंग लिरेन को हराकर मात्र 18 वर्ष की उम्र में विश्व चैंपियन बनने का कारनामा किया। इसके साथ ही वह शतरंज इतिहास के सबसे युवा विश्व चैंपियन बने। उनकी अन्य उल्लेखनीय उपलब्धियों में शामिल हैं:
- 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर बनना
- 2750 Elo रेटिंग पार करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बनना
- शतरंज इतिहास के तीसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर होना
गुकेश बनाम कार्लसन: फिर से महामुकाबला
नॉर्वे शतरंज 2025 में गुकेश ने मैग्नस कार्लसन के खिलाफ अपनी पहली क्लासिकल जीत दर्ज की थी, जो उनके करियर के सबसे बड़े पल में से एक थी। ऐसे में इस बार भी दोनों के बीच मुकाबले को लेकर जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। कार्लसन ने पिछले महीने ही इस टूर्नामेंट में खेलने की पुष्टि की थी। 20 बार के विश्व चैंपियन (सभी प्रारूपों में) कार्लसन पिछले 13 वर्षों से लगातार अपने घरेलू टूर्नामेंट में खेलते आ रहे हैं।
हालांकि उन्होंने हाल के वर्षों में क्लासिकल शतरंज से धीरे-धीरे दूरी बनाने की बात कही थी, लेकिन नॉर्वे शतरंज जैसे प्रतिष्ठित इवेंट से वह दूर नहीं रह सके।नॉर्वे शतरंज क्लासिकल फॉर्मेट में खेला जाता है, और कार्लसन ने इसे रिकॉर्ड सात बार जीता है, जो टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा है।










