NPS निवेश में बदलाव: Gold-Silver ETF और Nifty 250 में खुला विकल्प

NPS, UPS और APY में अब गोल्ड-Silver ETF और Nifty 250 में निवेश का मौका। PFRDA के नए नियम से रिटर्न बढ़ाने और निवेश डाइवर्सिफाइड करने की सुविधा।

PFRDA ने NPS, UPS और APY निवेश नियम बदले हैं। अब निवेशक गोल्ड-Silver ETF, निफ्टी 250 इंडेक्स और AIF में निवेश कर सकते हैं। इससे रिटर्न बढ़ाने और निवेश को डाइवर्सिफाइड करने के अवसर मिलेंगे।

Business: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से जुड़े करोड़ों निवेशकों के लिए यह खबर बेहद अहम है। पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने NPS, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और अटल पेंशन योजना (APY) के निवेश नियमों में बड़ा बदलाव किया है। इन नए नियमों के बाद अब NPS केवल सुरक्षित निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें बेहतर रिटर्न की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

10 दिसंबर 2025 को जारी PFRDA के मास्टर सर्कुलर के तहत निवेश के दायरे को और ज्यादा आधुनिक और डाइवर्सिफाइड बनाया गया है। इस सर्कुलर के लागू होते ही पुराने सभी निवेश संबंधी सर्कुलर समाप्त हो गए हैं और नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।

अब किन नए विकल्पों में होगा निवेश

नए नियमों के तहत NPS, UPS और APY में निवेश के लिए कई नए एसेट क्लास जोड़े गए हैं। अब निवेशक गोल्ड ETF, सिल्वर ETF, निफ्टी 250 इंडेक्स और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF Category I और II) में भी परोक्ष रूप से निवेश का लाभ ले सकेंगे।

इस बदलाव से पेंशन निवेश सिर्फ बॉन्ड और सीमित इक्विटी तक सीमित नहीं रहेगा। अब इसमें कमोडिटी और मिडकैप ग्रोथ का भी हिस्सा जुड़ गया है, जो लंबे समय में रिटर्न बढ़ाने में मदद कर सकता है।

PFRDA ने बदलाव को क्यों बताया जरूरी

PFRDA के अनुसार यह मास्टर सर्कुलर PFRDA Act 2013 और पेंशन फंड रेगुलेशन के तहत जारी किया गया है। इसका मकसद पेंशन फंड को समय के साथ आधुनिक बनाना और निवेशकों को बेहतर जोखिम संतुलन देना है।

रेगुलेटर का मानना है कि लंबे समय के निवेश में केवल एक या दो एसेट क्लास पर निर्भर रहना सही नहीं होता। इसलिए निवेश को इक्विटी, डेट, ETF और वैकल्पिक एसेट्स में संतुलित तरीके से फैलाना जरूरी है।

नए नियमों के तहत निवेश की तय लिमिट

नए सर्कुलर में यह साफ किया गया है कि किस एसेट क्लास में अधिकतम कितना निवेश किया जा सकता है।

सरकारी बॉन्ड में निवेश की सीमा

सरकारी बॉन्ड यानी G-Secs में अधिकतम 65 प्रतिशत तक निवेश की अनुमति दी गई है। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के बॉन्ड, PSU के EBR बॉन्ड और गिल्ट म्यूचुअल फंड शामिल हैं। गिल्ट म्यूचुअल फंड में निवेश कुल G-Secs का अधिकतम 5 प्रतिशत तक हो सकता है।

कॉरपोरेट डेट में निवेश

कॉरपोरेट डेट में अधिकतम 45 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकेगा। इसमें AA या उससे ऊपर रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड, बैंक एफडी, डेट म्यूचुअल फंड और REIT या InvIT से जुड़े डेट इंस्ट्रूमेंट शामिल हैं। डेट म्यूचुअल फंड में निवेश की सीमा 5 प्रतिशत तय की गई है।

शॉर्ट टर्म डेट का विकल्प

शॉर्ट टर्म डेट इंस्ट्रूमेंट्स में अधिकतम 10 प्रतिशत तक निवेश की अनुमति है। इसमें T-Bills, Commercial Paper, Certificate of Deposit और लिक्विड या अल्ट्रा शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

इक्विटी निवेश में बड़ा बदलाव

इक्विटी में निवेश की सीमा अधिकतम 25 प्रतिशत तय की गई है। इसमें अब निफ्टी 250 के शेयरों में निवेश की अनुमति दी गई है, जो इस बदलाव का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा सेंसेक्स और निफ्टी ETF तथा इक्विटी म्यूचुअल फंड भी शामिल हैं। इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश की सीमा 5 प्रतिशत तक रखी गई है।

गोल्ड सिल्वर और अन्य वैकल्पिक निवेश

वैकल्पिक और अन्य निवेशों के लिए अधिकतम 5 प्रतिशत की सीमा तय की गई है। इसमें गोल्ड ETF और सिल्वर ETF शामिल हैं, जिनमें कुल AUM का अधिकतम 1 प्रतिशत तक निवेश किया जा सकेगा। इसके अलावा AIF Category I और II, REITs, InvITs और एसेट बैक्ड सिक्योरिटीज को भी शामिल किया गया है।

निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह बदलाव

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पेंशन निवेश अब ज्यादा डाइवर्सिफाइड हो गया है। गोल्ड और सिल्वर ETF से महंगाई के खिलाफ सुरक्षा मिलती है, जबकि निफ्टी 250 जैसे इंडेक्स से मिडकैप और ग्रोथ स्टॉक्स का फायदा मिलेगा।

लंबे समय में यह स्ट्रक्चर निवेश को बाजार के उतार चढ़ाव से बेहतर तरीके से बचा सकता है और रिटर्न को भी स्थिर बना सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव NPS को ज्यादा रिटर्न ओरिएंटेड और भविष्य के लिए मजबूत बनाता है।

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