NTA Reform Panel: PM मोदी ने परीक्षा सुधार के लिए बनाई 6 एक्सपर्ट्स की टीम, नंदन नीलेकणि करेंगे नेतृत्व|

PM मोदी ने NTA सुधार के लिए 6 विशेषज्ञों की हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाई। नंदन नीलेकणि करेंगे नेतृत्व, जानें पैनल के सदस्य और परीक्षा सुधार की पूरी योजना।

केंद्र सरकार ने NTA में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए छह विशेषज्ञों की हाई-लेवल टास्क फोर्स गठित की है। इस पैनल की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे।

नई दिल्ली: NTA Reform Panel के तहत केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए छह विशेषज्ञों की हाई-लेवल टास्क फोर्स बनाई है। इस पैनल का नेतृत्व नंदन नीलेकणि करेंगे, जबकि इसमें शिक्षा, अंतरिक्ष, साइबर सुरक्षा, प्रशासन और इंटेलिजेंस क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं।

परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनी हाई-लेवल टास्क फोर्स

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए छह विशेषज्ञों की हाई-लेवल टास्क फोर्स गठित की है। इस पैनल का नेतृत्व इंफोसिस के सह-संस्थापक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि करेंगे। सरकार का कहना है कि यह टीम परीक्षा प्रणाली को तकनीक आधारित, सुरक्षित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने के लिए व्यापक सुझाव देगी।

NTA Reform Panel: PM मोदी ने परीक्षा सुधार के लिए बनाई 6 एक्सपर्ट्स की टीम, नंदन नीलेकणि करेंगे नेतृत्व|

यह पहल ऐसे समय में की गई है जब हाल के महीनों में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों का भरोसा मजबूत करना और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को अधिक निष्पक्ष बनाना है।

पीएम मोदी ने बताई टास्क फोर्स की प्राथमिकताएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार छात्रों के हितों की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा से जुड़े अपराधों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाएगा।

सरकार के अनुसार, हाई-लेवल पैनल परीक्षा प्रणाली में डिजिटल तकनीक के बेहतर इस्तेमाल, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, संस्थागत जवाबदेही, बेहतर गवर्नेंस, पारदर्शिता और ऑपरेशनल दक्षता जैसे विषयों पर सुझाव देगा। इसके साथ ही पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों को रोकने के लिए नई व्यवस्था विकसित करने पर भी फोकस रहेगा।

इन छह विशेषज्ञों को मिली अहम जिम्मेदारी

टास्क फोर्स में विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को शामिल किया गया है ताकि परीक्षा प्रणाली के हर पहलू पर व्यापक सुधार किए जा सकें।

नंदन नीलेकणि को बड़े स्तर पर सुरक्षित डिजिटल परीक्षा प्रणाली और तकनीकी ढांचे को मजबूत बनाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने आधार (Aadhaar) और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. एस. सोमनाथ, जो इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं, परीक्षा संचालन में तकनीकी विश्वसनीयता और सिस्टम इंजीनियरिंग से जुड़े सुधारों पर काम करेंगे। उनके नेतृत्व में इसरो ने चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे महत्वपूर्ण मिशनों को सफल बनाया था।

तपन डेका, पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) प्रमुख, परीक्षा सुरक्षा, संगठित नकल और सुरक्षा जोखिमों से निपटने के लिए अपनी विशेषज्ञता देंगे। वहीं प्रो. वी. कामाकोटि, IIT मद्रास के निदेशक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली को बेहतर बनाने में योगदान देंगे।

इसके अलावा, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल को परीक्षा गवर्नेंस और संस्थागत सुधारों की जिम्मेदारी दी गई है। वरिष्ठ IAS अधिकारी अमृत लाल मीणा देशभर में परीक्षा संचालन, लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत बनाने के सुझाव देंगे।

पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली पर रहेगा फोकस

सरकार का कहना है कि यह पैनल केवल तकनीकी बदलावों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परीक्षा संचालन, संस्थागत क्षमता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और जवाबदेही की भी समीक्षा करेगा। पैनल की सिफारिशों के आधार पर ऐसी व्यवस्था विकसित करने की योजना है, जिससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित की जा सकें।

सरकार का मानना है कि इन सुधारों से परीक्षा प्रक्रिया में तकनीक का बेहतर उपयोग होगा, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी और देशभर के लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर और मजबूत होगा।

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