अमेरिका की पूर्व अटॉर्नी जनरल Pam Bondi थायरॉयड कैंसर से जूझ रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प प्रशासन छोड़ने के बाद उनका इलाज हुआ और वह अब धीरे-धीरे रिकवरी कर रही हैं। आधिकारिक बयान अभी नहीं आया है।
वाशिंगटन: अमेरिकी राजनीति से जुड़ी एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है। ट्रम्प प्रशासन में पूर्व अटॉर्नी जनरल रहीं Pam Bondi के बारे में रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि वह थायरॉयड कैंसर से जूझ रही हैं और फिलहाल उपचार के बाद रिकवरी के चरण में हैं। यह जानकारी अमेरिकी मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स और प्रशासनिक सूत्रों के हवाले से सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जस्टिस डिपार्टमेंट (Department of Justice) से हटने के बाद उन्हें यह बीमारी डायग्नोज हुई और उन्होंने निजी तौर पर इलाज कराया। अब उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि इस विषय पर उन्होंने स्वयं कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
कैसे सामने आई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर Axios और अन्य प्रमुख प्रकाशनों के अनुसार, पैम बॉन्डी के कैंसर की जानकारी तब सामने आई जब वे ट्रम्प प्रशासन से बाहर हो चुकी थीं। बताया जा रहा है कि पद छोड़ने के तुरंत बाद उनकी मेडिकल जांच में थायरॉयड कैंसर की पुष्टि हुई और इसके बाद उन्होंने इलाज शुरू किया।
इस बीच व्हाइट हाउस से जुड़े कुछ लोगों और सोशल मीडिया पोस्ट्स के जरिए भी उनके स्वास्थ्य को लेकर पुष्टि जैसी जानकारी साझा की गई। एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी के परिवार से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट पर यह कहा गया कि बॉन्डी पिछले कुछ हफ्तों से मजबूती से बीमारी से लड़ रही हैं और अब सुधार की ओर हैं।
ट्रम्प प्रशासन से हटाए जाने की पृष्ठभूमि
Donald Trump के प्रशासन में पैम बॉन्डी को एक महत्वपूर्ण कानूनी चेहरा माना जाता था। उन्होंने अटॉर्नी जनरल के रूप में कई हाई-प्रोफाइल मामलों और जांचों में भूमिका निभाई।
हालांकि, अप्रैल 2026 में उन्हें पद से हटा दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके हटाए जाने के पीछे मुख्य कारणों में न्याय विभाग के कुछ विवादित फैसले और विशेष रूप से जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों (Epstein files) का प्रबंधन बताया गया।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि प्रशासन के भीतर उनके कामकाज को लेकर असंतोष बढ़ रहा था, जिससे उनके पद पर बने रहना मुश्किल हो गया।
एपस्टीन केस बना विवाद का केंद्र
पैम बॉन्डी के कार्यकाल का सबसे विवादित हिस्सा जेफ्री एपस्टीन केस से जुड़ा रहा। इस केस में कई संवेदनशील दस्तावेज, जांच रिपोर्ट और आरोप शामिल हैं, जो लंबे समय से अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन फाइलों के सार्वजनिक रिलीज़ और हैंडलिंग को लेकर प्रशासन और राजनीतिक हलकों में मतभेद थे। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जांच प्रक्रिया और दस्तावेजों की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे, जबकि समर्थकों का कहना था कि कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही फैसले लिए गए।
इसी विवाद के चलते बॉन्डी को आलोचना का सामना करना पड़ा और अंततः उन्हें पद से हटाए जाने का फैसला लिया गया।

इलाज और रिकवरी की स्थिति
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, थायरॉयड कैंसर का इलाज आमतौर पर सर्जरी, हार्मोन थेरेपी और रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी जैसे तरीकों से किया जाता है। पैम बॉन्डी ने भी इसी तरह के उपचार से गुजरने के बाद अब रिकवरी शुरू की है।
सूत्रों के अनुसार, उनकी सेहत में सुधार देखा जा रहा है और वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन और सार्वजनिक भूमिकाओं की ओर लौट रही हैं। हालांकि, उनकी बीमारी की गंभीरता और उपचार की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
राजनीतिक वापसी और नई भूमिका
दिलचस्प बात यह है कि पद से हटाए जाने के बावजूद पैम बॉन्डी को पूरी तरह प्रशासनिक भूमिका से दूर नहीं किया गया है। हाल ही में उन्हें व्हाइट हाउस की AI एडवाइजरी कमेटी में शामिल किया गया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और तकनीकी नीतियों पर सरकार को सलाह देती है।
यह नियुक्ति संकेत देती है कि वह अभी भी अमेरिकी प्रशासनिक और नीति-निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभा सकती हैं, भले ही वह पहले की तरह न्याय विभाग का हिस्सा न हों।
अमेरिकी राजनीति में प्रतिक्रिया
उनकी बीमारी और राजनीतिक स्थिति को लेकर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ नेताओं और विश्लेषकों ने इसे व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला बताते हुए संवेदनशीलता की बात कही है, जबकि अन्य इसे ट्रम्प प्रशासन में हालिया बदलावों और विवादों से जोड़कर देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बॉन्डी का मामला अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर न्यायिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक निर्णय और राजनीतिक दबाव जैसे मुद्दों पर बहस को तेज कर सकता है।
एपस्टीन फाइल्स और राजनीतिक दबाव
एपस्टीन केस को लेकर उनकी भूमिका ने उन्हें लगातार सुर्खियों में बनाए रखा। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इन फाइलों के प्रबंधन को लेकर उन पर पारदर्शिता और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे।
कुछ आलोचकों का मानना था कि इस मामले ने उनके करियर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया, जबकि समर्थकों का कहना था कि यह एक बेहद जटिल और संवेदनशील कानूनी मामला था, जिसमें किसी भी निर्णय का राजनीतिक असर होना तय था।









