पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पर अमेरिका गाजा में सेना भेजने का दबाव डाल रहा है। यह कदम देश में विरोध और राजनीतिक तनाव बढ़ा सकता है, जबकि ट्रंप के साथ उनके संबंधों को भी चुनौती मिल सकती है।
Pakistan: पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर इस समय एक बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना कर रहे हैं। इस्लामाबाद में अपनी बढ़ती पकड़ बनाए रखने के बीच उन्हें अमेरिका की ओर से गाजा में सेना भेजने का दबाव झेलना पड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर जल्द ही वॉशिंगटन जाकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिल सकते हैं, जहां गाजा फोर्स और वहां की सुरक्षा स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मुनीर के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती पेश कर रही है। यदि वे गाजा स्थिरीकरण बल (Gaza Stabilization Force) में पाकिस्तानी सैनिक भेजते हैं, तो देश में विरोध और राजनीतिक उथल-पुथल पैदा हो सकती है। वहीं, अमेरिका की बात न मानने या सहयोग न करने पर ट्रंप नाराज हो सकते हैं। ऐसे में मुनीर को संतुलन बनाकर कदम उठाना पड़ रहा है।
ट्रंप से संभावित मुलाकात
सूत्रों के अनुसार, मुनीर आने वाले हफ्तों में अमेरिका जा सकते हैं और यह ट्रंप के साथ उनके बीच तीसरी मुलाकात होगी। इस मुलाकात का मुख्य फोकस गाजा फोर्स और वहां की सुरक्षा स्थिति पर होने की संभावना है। इनमें से एक सूत्र ने बताया कि मुनीर अमेरिका के साथ आर्थिक और सुरक्षा संबंधों के मुद्दों से भी करीब से जुड़े हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का 20-पॉइंट वाला गाजा प्लान इस क्षेत्र के पुनर्निर्माण और आर्थिक सुधार पर केंद्रित है। इस योजना के तहत मुस्लिम-बहुसंख्यक देशों की सेनाओं से कहा गया है कि वे इजरायली सेनाओं के हटने के बाद युद्ध से तबाह हुए फिलिस्तीनी इलाके में ट्रांजिशन पीरियड की देखरेख करें।
गाजा में सेना भेजने के निहित जोखिम

गाजा में सेना भेजने का कदम मुनीर के लिए संवेदनशील और जोखिम भरा है। कई देशों ने इस्लामी ग्रुप हमास को गैर-सैनिक बनाने के मिशन को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। ऐसा करने से पाकिस्तान विदेशी संघर्ष में उलझ सकता है और देश में फिलिस्तीन समर्थक और इजरायल विरोधी आबादी नाराज हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे पाकिस्तान में आंतरिक असंतोष और विरोधी आंदोलनों को बढ़ावा मिल सकता है।
मुनीर के लिए स्थिति और नाजुक इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच वर्षों से चल रहे अविश्वास को कम करने के लिए ट्रंप के साथ एक करीबी रिश्ता बनाया है। जून में उन्हें व्हाइट हाउस में लंच के लिए आमंत्रित किया गया था, जो इस बात का संकेत है कि अमेरिकी प्रशासन उन्हें गंभीरता से देखता है। ऐसे में ट्रंप को नाराज करना पाकिस्तान के लिए कोई आसान विकल्प नहीं है।
ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख का रिश्ता
विशेषज्ञों का कहना है कि मुनीर का ट्रंप के साथ मजबूत संबंध उनके लिए राजनीतिक लाभ भी लेकर आता है। वॉशिंगटन स्थित अटलांटिक काउंसिल के सीनियर फेलो माइकल कुगेलमैन ने रॉयटर्स को बताया कि यदि पाकिस्तान गाजा स्टेबिलाइजेशन फोर्स में योगदान नहीं देता है, तो ट्रंप नाराज हो सकते हैं। यह नाराजगी पाकिस्तानी सरकार के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है, क्योंकि ट्रंप की नजरों में अच्छा बने रहना सुरक्षा और आर्थिक मदद पाने के लिए जरूरी है।
मुनीर के सामने यह चुनौती है कि वे अपने देश की जनता की भावनाओं और अमेरिकी दबाव के बीच संतुलन बनाए रखें। गाजा में सेना भेजने से पाकिस्तान के राजनीतिक और सामाजिक माहौल पर असर पड़ सकता है, वहीं अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज करना भी उनके लिए मुश्किल होगा।











