अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डी.सी. में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई बैठक के दौरान एक सवाल ने माहौल को खासा ध्यान आकर्षित कर दिया।
World News: वॉशिंगटन में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान पाकिस्तान के विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री Ishaq Dar से इजरायल को मान्यता देने को लेकर अचानक पूछा गया सवाल चर्चा का केंद्र बन गया। यह बैठक अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio के साथ आयोजित की गई थी, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता, मध्य पूर्व की स्थिति और द्विपक्षीय संबंधों पर बातचीत हुई।
हालांकि बैठक के दौरान इस संवेदनशील सवाल का कोई सीधा जवाब नहीं दिया गया, लेकिन बाद में पाकिस्तान ने अपने पारंपरिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि उसकी फिलिस्तीन नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
वॉशिंगटन बैठक में क्या हुआ?
बैठक के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जोर से पूछा—“क्या पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देगा?” यह सवाल उस समय पूछा गया जब अमेरिका और कई देशों के बीच अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) को लेकर क्षेत्रीय कूटनीति तेज हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, न तो इशाक डार और न ही अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस सवाल पर कोई प्रतिक्रिया दी। बैठक का फोकस मुख्य रूप से द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर रहा।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में इशाक डार ने पाकिस्तान की नीति को दोहराते हुए कहा कि इस्लामाबाद फिलिस्तीन मुद्दे पर अपने लंबे समय से चले आ रहे रुख पर कायम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान तब तक इजरायल को मान्यता देने पर विचार नहीं करेगा जब तक फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की दिशा में ठोस प्रगति नहीं होती। पाकिस्तान का मानना है कि इस मुद्दे का समाधान “दो-राष्ट्र सिद्धांत” के आधार पर ही संभव है।

पाकिस्तान-इजरायल संबंधों की स्थिति
अब तक पाकिस्तान ने इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक राजनयिक संबंध भी स्थापित नहीं हैं। पाकिस्तान लंबे समय से फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा रहा है और उसने कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीनी अधिकारों की वकालत की है। पाकिस्तान का मानना है कि इजरायल के साथ किसी भी प्रकार के संबंध सामान्य करने से पहले फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना आवश्यक है।
अमेरिका की विदेश नीति में अब्राहम समझौते (Abraham Accords) एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल रहे हैं, जिनका उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी हाल ही में संकेत दिया था कि उन्होंने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों से इन समझौतों में शामिल होने और इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित करने का आग्रह किया है।
क्षेत्रीय कूटनीति पर बढ़ता दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका द्वारा अरब और मुस्लिम देशों पर बढ़ते कूटनीतिक दबाव के बीच पाकिस्तान की स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। हालांकि पाकिस्तान ने अभी तक इस दिशा में किसी बदलाव का संकेत नहीं दिया है। पाकिस्तान का स्पष्ट रुख यह दर्शाता है कि वह अपने पारंपरिक वैचारिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से हटने के लिए तैयार नहीं है, खासकर तब तक जब तक फिलिस्तीन मुद्दे पर कोई ठोस समाधान नहीं निकलता।









