पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 1000 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचने की चेतावनी दी गई है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि आपूर्ति संकट आने पर कीमत बढ़ सकती है। फिलहाल पेट्रोल 389.14 और हाई-स्पीड डीजल 424.04 रुपए है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने ईंधन की कीमतों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि देश में पेट्रोल की कमी पैदा होती है तो इसकी कीमत 1,000 पाकिस्तानी रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि फिलहाल देश में ईंधन की कमी नहीं है और सरकार आपूर्ति को बनाए रखने के लिए कदम उठा रही है।
पाकिस्तान में पेट्रोल की मौजूदा कीमत 389.14 रुपए प्रति लीटर है, जबकि हाई-स्पीड डीजल यानी HSD की कीमत 424.04 रुपए प्रति लीटर है। ये दरें 19 से 21 सितंबर 2026 के लिए लागू की गई थीं।
पेट्रोल की कीमत में करीब 50 फीसदी उछाल
पेट्रोलियम मंत्री के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में हाल के महीनों में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव है।
मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी का असर पाकिस्तान जैसे आयात पर निर्भर देश पर सीधे पड़ता है। पाकिस्तान अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों और समुद्री परिवहन में व्यवधान का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है।
पाकिस्तान सरकार ने हाल में ईंधन की कीमतों की समीक्षा और आपूर्ति प्रबंधन के लिए कई कदम उठाए हैं। सरकार ने आधिकारिक वाहनों के ईंधन आवंटन में कटौती समेत कुछ मितव्ययिता उपाय भी लागू किए हैं।
1000 रुपए की कीमत अभी अनुमान नहीं, आपूर्ति संकट की चेतावनी
पेट्रोल के 1,000 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचने की बात को मौजूदा कीमत का पूर्वानुमान नहीं माना जाना चाहिए। मंत्री ने इसे संभावित ईंधन आपूर्ति संकट की स्थिति में कीमत बढ़ने की चेतावनी के रूप में रखा है।
यानी यदि पाकिस्तान को पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल उपलब्ध नहीं होता या अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला गंभीर रूप से बाधित होती है, तो कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। फिलहाल सरकार का कहना है कि देश में पेट्रोल की आपूर्ति जारी है।
पेट्रोलियम मंत्री ने यह भी कहा है कि सरकार जनता को निर्बाध ईंधन उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रही है। पाकिस्तान सरकार के अनुसार, ईंधन आपूर्ति और सर्दियों की गैस जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध संसाधनों का प्रबंधन किया जा रहा है।
बाइक और छोटे वाहनों के लिए 100 रुपए प्रति लीटर राहत
बढ़ती कीमतों का असर कम करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने लक्षित Fuel Relief Scheme शुरू की है। इसके तहत मोटरसाइकिल, रिक्शा, Qingqi और अन्य पात्र दो-तीन पहिया वाहनों तथा 800cc तक की कारों के लिए पेट्रोल पर 100 रुपए प्रति लीटर की राहत दी जा रही है।
सरकार ने योजना को कम आय वाले और रोजमर्रा के आवागमन के लिए छोटे वाहनों पर निर्भर लोगों को राहत देने के उद्देश्य से शुरू किया है। आर्थिक समन्वय समिति ने इस योजना के लिए 75 अरब पाकिस्तानी रुपए की मंजूरी दी है।
मूल योजना के तहत दो और तीन पहिया वाहनों के लिए हर सप्ताह 500 रुपए की राहत, यानी 100 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से पांच लीटर तक ईंधन पर सहायता का प्रावधान था। 800cc तक की कारों के लिए 10 दिनों के आधार पर 1,000 रुपए की राहत का प्रावधान किया गया था।
हर महीने चार टोकन की व्यवस्था
सरकार ने योजना में बाद में बदलाव भी किए। मोटरसाइकिल, Qingqi और ऑटो-रिक्शा उपयोगकर्ताओं को चार टोकन प्रति माह दिए जाने की व्यवस्था की गई। प्रत्येक टोकन पर 500 रुपए की राहत का प्रावधान है।
800cc तक के वाहनों के लिए 100 रुपए प्रति लीटर की राहत 10 लीटर पेट्रोल पर हर 10 दिन में जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
सरकार ने यह भी घोषणा की है कि 1 जनवरी 2006 के बाद पंजीकृत मोटरसाइकिल, रिक्शा और Qingqi इस योजना में शामिल हो सकते हैं। बाद में SMS शुल्क हटाने और टोकन व्यवस्था में बदलाव जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
22 लाख से ज्यादा लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
पाकिस्तान सरकार के मुताबिक, 20 सितंबर तक 22 लाख से अधिक लोगों ने Fuel Relief Scheme के तहत पंजीकरण कराया था। सूचना मंत्री अताउल्लाह तारड़ के अनुसार, इनमें करीब 92 फीसदी मोटरसाइकिल, Qingqi और रिक्शा उपयोगकर्ता हैं।

इससे पहले सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री शाजा फातिमा ख्वाजा ने बताया था कि 19 सितंबर तक 17.5 लाख से अधिक रजिस्ट्रेशन, करीब 15 लाख टोकन जनरेट और 6.80 लाख टोकन रिडीम किए जा चुके थे। बाद में पंजीकरण की संख्या और बढ़ी।
सरकार ने पंजीकरण और शिकायत प्रक्रिया को SMS आधारित रखा है, ताकि स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुविधा न रखने वाले लोग भी योजना का लाभ ले सकें।
अक्टूबर तक घरेलू तेल मिलने की उम्मीद
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान में तेल के नए कुओं पर काम चल रहा है और अक्टूबर तक घरेलू कच्चे तेल के भंडार मिलने की उम्मीद है। सरकार ने तेल और गैस की खोज के लिए नए ब्लॉक भी कंपनियों को दिए हैं।
यदि इन कुओं से व्यावसायिक स्तर पर उत्पादन शुरू होता है, तो पाकिस्तान अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के एक हिस्से को घरेलू उत्पादन से पूरा कर सकता है। इससे आयात पर निर्भरता और अंतरराष्ट्रीय कीमतों के झटकों का असर कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, नए भंडार की खोज और व्यावसायिक उत्पादन के बीच कई तकनीकी और निवेश संबंधी चरण होते हैं। इसलिए संभावित घरेलू उत्पादन का वास्तविक आर्थिक प्रभाव उत्पादन शुरू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
बांग्लादेश में भी बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
ऊर्जा कीमतों का दबाव केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। बांग्लादेश ने भी 21 सितंबर 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की है। सरकार ने डीजल, पेट्रोल, ऑक्टेन और केरोसिन के नए दाम घोषित किए हैं।
नए रेट के अनुसार, डीजल 115 से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर, पेट्रोल 140 से बढ़कर 160 टका, ऑक्टेन 145 से बढ़कर 165 टका और केरोसिन 135 से बढ़कर 155 टका प्रति लीटर हो गया है। डीजल की कीमत में बढ़ोतरी 17.4 फीसदी है।
बांग्लादेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ईंधन लागत और सरकारी तेल कंपनी Bangladesh Petroleum Corporation (BPC) पर बढ़ते वित्तीय दबाव को कीमत बढ़ाने का प्रमुख कारण बताया है। Reuters के अनुसार, BPC को मार्च से अगस्त 2026 के बीच 228.76 अरब टका यानी करीब 1.9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
ईंधन महंगा होने का अर्थव्यवस्था पर असर
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने से माल ढुलाई, खाद्य वस्तुओं और औद्योगिक उत्पादन की लागत पर भी दबाव पड़ सकता है।
पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों के प्रति संवेदनशील हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष और प्रमुख समुद्री मार्गों में संभावित व्यवधान से तेल तथा LNG की आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। Reuters के मुताबिक, हालिया ऊर्जा संकट ने दोनों देशों को ईंधन और गैस आपूर्ति के प्रबंधन के लिए तत्काल कदम उठाने पर मजबूर किया है।
पाकिस्तान में फिलहाल सरकार का जोर ईंधन आपूर्ति बनाए रखने, कमजोर वर्गों को लक्षित राहत देने और घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ाने पर है। लेकिन यदि वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल की कीमत, आयात बिल और महंगाई पर दबाव आगे भी बना रह सकता है।











