यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस की कूलिंग कोटिंग से धूप में छत 22 डिग्री तक रहेगी ठंडी

यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस की पैसिव कूलिंग कोटिंग धूप में छत को 22 डिग्री तक ठंडा रख सकती है। जानें तकनीक, 96% रिफ्लेक्शन और फायदे।

यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के रिसर्चर्स ने ऐसी पैसिव कूलिंग कोटिंग तैयार की है, जो तेज धूप में छत का तापमान 22 डिग्री तक कम कर सकती है। ह्यूस्टन में इसका फील्ड टेस्ट भी किया गया।

सिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग: यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के रिसर्चर्स ने ऐसी कोटिंग विकसित की है, जिसे छतों पर फिल्म की तरह लगाया जा सकता है। यह बिना बिजली के सूरज की 96% तक रोशनी रिफ्लेक्ट करती है और गर्मी को बाहर निकालने में मदद करती है। ह्यूस्टन में हुए परीक्षणों में इससे मेटल रूफ आसपास के तापमान से काफी ठंडी पाई गई।

बिना बिजली के छत को ठंडा करने की कोशिश

गर्मियों में घरों और इमारतों की छतें सीधे सूरज की गर्मी सोखती हैं, जिससे अंदर का तापमान बढ़ जाता है। इसका असर AC और कूलर के इस्तेमाल पर पड़ता है और बिजली की खपत भी बढ़ती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के रिसर्चर्स ने एक ऐसी कूलिंग कोटिंग विकसित की है, जिसे छत की सतह पर फिल्म की तरह लगाया जा सकता है।

इस तकनीक की खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए किसी बाहरी बिजली, बैटरी या मशीनरी की जरूरत नहीं होती। कोटिंग सूरज की रोशनी को वापस रिफ्लेक्ट करने के साथ-साथ सतह से निकलने वाली गर्मी को इन्फ्रारेड रेडिएशन के जरिए बाहर भेजने में मदद करती है। यही प्रक्रिया छत को आसपास के वातावरण की तुलना में काफी ठंडा रखने में मदद करती है।

ह्यूस्टन में हुआ फील्ड टेस्ट

यह तकनीक सिर्फ लैब तक सीमित नहीं रही। रिसर्च टीम ने ह्यूस्टन के पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर इसका फील्ड टेस्ट किया। परीक्षण के दौरान खास तौर पर मेटल रूफ पर कोटिंग के प्रदर्शन को देखा गया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, धूप में उपचारित मेटल छतें आसपास के तापमान की तुलना में 22 डिग्री तक ठंडी दर्ज की गईं।

इस प्रोजेक्ट पर यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के पूर्व छात्र और प्रिंसिपल इंजीनियर अमन मेहता ने भी काम किया है। उनके अनुसार, इस फिल्म को प्रभावी बनाने के लिए किसी अतिरिक्त पावर सप्लाई की आवश्यकता नहीं होती। इसका काम मुख्य रूप से सूर्य की ऊर्जा को रिफ्लेक्ट करना और छत से इमारत की ओर जाने वाली गर्मी को कम करना है।

96% तक सूरज की रोशनी रिफ्लेक्ट करने की क्षमता

इस कूलिंग सिस्टम का आधार पैसिव डेटाइम रेडिएटिव कूलिंग तकनीक है। यह ऑप्टिक्स और थर्मोडायनामिक्स के सिद्धांतों पर काम करती है। एक खास पोरस पॉलीमर फिल्म सूर्य की करीब 96% तक रोशनी को रिफ्लेक्ट कर सकती है। सतह पर बची गर्मी को लॉन्ग-वेवलेंथ इन्फ्रारेड रेडिएशन के रूप में वातावरण के बाहर भेजने की प्रक्रिया इस तकनीक का अहम हिस्सा है।

इसका फायदा यह है कि छत सूर्य की सीधी गर्मी को कम सोखती है और उसकी सतह का तापमान नीचे रहता है। परिणामस्वरूप इमारत के अंदर गर्मी का ट्रांसफर भी कम हो सकता है। लंबे समय में ऐसी तकनीक AC पर निर्भरता और कूलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली बिजली को कम करने में मदद कर सकती है।

हालांकि, इस तरह की कोटिंग के सामने कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं। छत पर धूल, गंदगी और अन्य प्रदूषक जमा होने से इसकी reflective क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसी समस्या को कम करने के लिए रिसर्चर्स ने self-cleaning composite विकसित किया है, जिससे सतह पर गंदगी टिकने की संभावना कम होती है।

फिलहाल इसकी लागत और लंबे समय तक अलग-अलग मौसम में टिके रहने की क्षमता महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। यह सामान्य सफेद पेंट की तुलना में महंगी हो सकती है। इसके बावजूद, अगर तकनीक को बड़े स्तर पर कम लागत में विकसित किया जाता है, तो गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में इमारतों को ठंडा रखने और ऊर्जा की मांग घटाने के लिए इसका उपयोग बढ़ सकता है।

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