कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने गुरुवार को अहम बैठक की। बैठक में देश की पासपोर्ट व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
नई दिल्ली: भारत की पासपोर्ट व्यवस्था को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाने और पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में संभावित बदलावों को लेकर विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। कांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पासपोर्ट सिस्टम, ई-पासपोर्ट, पुलिस सत्यापन, नागरिकता और मौजूदा कानूनी प्रावधानों समेत कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद शशि थरूर ने कहा कि समिति ने अभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया है। उन्होंने बताया कि बैठक में करीब 15 सांसदों ने हिस्सा लिया और विदेश मंत्रालय तथा संबंधित अधिकारियों के सामने पासपोर्ट व्यवस्था से जुड़े कई सवाल उठाए गए।
ई-पासपोर्ट और पुलिस वेरिफिकेशन समेत कई मुद्दों पर चर्चा
संसदीय समिति की बैठक में भारत की मौजूदा पासपोर्ट प्रणाली की कार्यप्रणाली और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा हुई। इसमें विशेष रूप से ई-पासपोर्ट व्यवस्था, पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और नागरिकता से संबंधित मामलों पर विचार किया गया। थरूर के अनुसार, विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों के साथ काफी गंभीर और विस्तृत चर्चा हुई है। हालांकि, समिति की समीक्षा प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मंत्रालय से उठाए गए सवालों के जवाब मिलने के बाद इन विषयों पर आगे भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों से जानकारी लेने के बाद एक व्यापक और उपयोगी रिपोर्ट तैयार करना है। समिति इससे पहले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दौरे के दौरान भी पासपोर्ट अधिकारियों से बातचीत कर चुकी है। अब अन्य क्षेत्रों और व्यापक नीतिगत मुद्दों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी।

पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में संशोधन की मांग क्यों?
बैठक के दौरान कुछ सांसदों ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में बदलाव की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। यह कानून लगभग छह दशक पहले बनाया गया था, जबकि उसके बाद यात्रा, पहचान, डिजिटल तकनीक और सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव आ चुके हैं। आज के दौर में बायोमेट्रिक पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले ई-पासपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सुरक्षा आवश्यकताओं ने पासपोर्ट व्यवस्था को अधिक तकनीकी और जटिल बना दिया है। ऐसे में कुछ सांसदों का मानना है कि पुराने कानूनी ढांचे की समीक्षा कर उसे आधुनिक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए।
मौजूदा कानून में पासपोर्ट जारी करने, पासपोर्ट देने से इनकार करने, उसे जब्त करने या रद्द करने और कुछ परिस्थितियों में विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। समिति के कुछ सदस्यों का मानना है कि बदलते समय के साथ इन प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक हो सकती है, ताकि नागरिकों के अधिकारों, राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाया जा सके।
नागरिकता के मुद्दे पर भी जारी है विचार-विमर्श
बैठक में नागरिकता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की गई। शशि थरूर ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर भी समिति में बहस और समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल किसी संभावित सिफारिश या संशोधन को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि समिति सभी महत्वपूर्ण सवालों पर विदेश मंत्रालय से विस्तृत जवाब प्राप्त करने के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। ऐसे में पासपोर्ट अधिनियम में संशोधन को लेकर अभी किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।










