पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से अडियाला जेल भेज दिया गया। डॉक्टरों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं बताई। उनकी सेहत और कानूनी मामलों पर लगातार नजर बनी हुई है।
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान को शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से वापस रावलपिंडी की अडियाला जेल भेज दिया गया। 73 वर्षीय इमरान खान को गुरुवार देर रात कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में उनकी मेडिकल जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत की गई। जांच के बाद डॉक्टरों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती रखने की जरूरत नहीं बताई और उन्हें जेल में रखना सुरक्षित माना। इसके बाद सुरक्षा घेरे में उन्हें वापस अडियाला जेल ले जाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल लाया गया था
इमरान खान को अस्पताल ले जाने का घटनाक्रम पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश के बाद शुरू हुआ। अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की स्वतंत्र जांच और इलाज के लिए उन्हें शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने का निर्देश दिया था। अदालत ने मेडिकल बोर्ड गठित करने और उसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ इमरान के निजी चिकित्सक को शामिल करने की बात कही थी। कोर्ट ने उन्हें अगली सुनवाई तक अस्पताल में रखने का भी निर्देश दिया था।
अदालत का यह आदेश इमरान खान की सेहत को लेकर उनके परिवार और पार्टी की ओर से जताई गई चिंताओं के बाद आया। उनकी बहन डॉ. उजमा खान और अन्य पक्षों ने अदालत में दलील दी थी कि जेल में उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ रही है। PTI की ओर से खास तौर पर उनकी आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्या का मुद्दा उठाया गया था, जबकि पाकिस्तान सरकार का कहना रहा कि उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट में ऐसी आपात स्थिति नहीं दिखती, जिसके लिए तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती जरूरी हो।
अस्पताल में कड़ी सुरक्षा, मेडिकल जांच के बाद वापसी
गुरुवार देर रात इमरान खान को अडियाला जेल से शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल लाया गया। उनके अस्पताल पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। शुक्रवार तड़के मेडिकल जांच पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डॉक्टरों ने उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद उन्हें हिरासत में रखे जाने को सुरक्षित माना।
इस घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हुआ कि इमरान खान के इलाज को लेकर पाकिस्तान सरकार और न्यायपालिका के बीच मतभेद बने हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पताल में जांच और इलाज का रास्ता खोला, जबकि सरकार ने इस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दी चुनौती
पाकिस्तान सरकार ने 19 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दाखिल कर इमरान खान को निजी अस्पताल भेजने के आदेश पर पुनर्विचार की मांग की थी। सरकार ने अदालत के अंतरिम आदेश को अधिकार क्षेत्र से जुड़ा सवाल बताते हुए इसे संशोधित या वापस लेने की मांग की। सरकार का तर्क था कि जेल में बंद किसी एक कैदी को निजी अस्पताल की सुविधा देने से समानता और जेल प्रशासन से जुड़े व्यापक सवाल पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, 20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सरकार की समीक्षा याचिका वापस कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, याचिका के साथ जरूरी दस्तावेजों का पूरा सेट नहीं था। इसके बाद सरकार के पास आपत्तियां दूर कर याचिका दोबारा दाखिल करने का रास्ता खुला रहा।
इमरान के वकीलों और PTI ने उठाए सवाल
इमरान खान की पार्टी लगातार उनकी स्वास्थ्य स्थिति और जेल में मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठाती रही है। PTI का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री को बेहतर चिकित्सा सुविधा, परिवार से नियमित मुलाकात और कानूनी सलाह तक पर्याप्त पहुंच मिलनी चाहिए। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के अस्पताल संबंधी आदेश का स्वागत किया था और इसे इमरान की स्वास्थ्य स्थिति के स्वतंत्र आकलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।

दूसरी ओर, पाकिस्तान सरकार इमरान खान को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कहती रही है, लेकिन निजी अस्पताल में लंबे समय तक रखने के आदेश पर उसने आपत्ति जताई है। सरकार और PTI के बीच यह विवाद इमरान खान के व्यापक राजनीतिक और कानूनी संघर्ष का हिस्सा बन चुका है।
अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान खान
इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 2018 से अप्रैल 2022 तक रहा। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिर गई थी। इसके बाद उनके खिलाफ बड़ी संख्या में कानूनी मामले सामने आए। इमरान और PTI इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हैं, जबकि पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं।
उनके खिलाफ दर्ज मामलों में सरकारी तोहफों से जुड़े तोशाखाना मामले, अल-कादिर ट्रस्ट या 190 मिलियन पाउंड मामला, साइफर केस और इद्दत निकाह मामला प्रमुख रहे हैं। कुछ मामलों में उन्हें राहत मिल चुकी है, जबकि कई मामलों में सजा, अपील और कानूनी कार्यवाही जारी है।
तोशाखाना मामला क्या है?
तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का आधिकारिक भंडार है, जहां सरकारी पदों पर रहने वाले लोगों को विदेशों या विदेशी प्रतिनिधियों से मिले मूल्यवान उपहार जमा किए जाते हैं। इमरान खान पर आरोप लगा कि प्रधानमंत्री रहते हुए उन्हें मिले कुछ महंगे उपहारों को नियमों के तहत अपने पास रखने के बाद उनकी जानकारी और बिक्री से जुड़ी रकम का सही तरीके से खुलासा नहीं किया गया।
2023 में उन्हें तोशाखाना मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में निलंबित कर दिया गया। इसके बाद तोशाखाना से जुड़े दूसरे मामले में दिसंबर 2025 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह मामला सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले कथित बुल्गारी आभूषण सेट से जुड़ा है। इस फैसले के खिलाफ उनकी कानूनी लड़ाई जारी है।
अल-कादिर ट्रस्ट मामले में भी सजा
इमरान खान और बुशरा बीबी को जनवरी 2025 में अल-कादिर ट्रस्ट मामले में क्रमशः 14 और 7 साल की सजा सुनाई गई थी। मामला ब्रिटेन से पाकिस्तान लौटाए गए करीब 190 मिलियन पाउंड और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। इमरान खान आरोपों से इनकार करते हैं और कहते हैं कि उनके खिलाफ मामले राजनीतिक बदले की कार्रवाई हैं।
साइफर मामले में मिली 10 साल की सजा बाद में पलट दी गई और जून 2024 में उन्हें इस मामले में राहत मिली। इद्दत निकाह मामले में भी इमरान और बुशरा बीबी को जुलाई 2024 में बरी कर दिया गया था। हालांकि, अन्य मामलों में कानूनी कार्यवाही जारी रहने के कारण इमरान खान जेल से बाहर नहीं आ सके।
आगे क्या होगा?
इमरान खान को फिलहाल मेडिकल जांच के बाद वापस अडियाला जेल भेज दिया गया है। उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर मेडिकल बोर्ड की आगे की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। साथ ही, सरकार की समीक्षा याचिका और इमरान खान की लंबित कानूनी अपीलें यह तय करेंगी कि आने वाले समय में उन्हें चिकित्सा राहत या जेल से बाहर आने का कोई कानूनी रास्ता मिलता है या नहीं।
इमरान खान का मामला केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री की जेल और स्वास्थ्य स्थिति तक सीमित नहीं है। यह पाकिस्तान में न्यायपालिका, सरकार, सेना और विपक्ष के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक तनाव से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए उनकी मेडिकल स्थिति और अदालतों में चल रही कार्यवाही पर पाकिस्तान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर बनी हुई है।












