पठानकोट से चंबा-भरमौर का सफर 30 KM होगा कम, 3000 करोड़ से बनेगी टनल और पुल; यात्रा में लगेगा कम समय

हिमाचल में पठानकोट-चंबा-भरमौर हाईवे के कायाकल्प पर 3000 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है। टनल और पुल बनने से दूरी 30 KM कम हो सकती है।
पठानकोट से चंबा-भरमौर का सफर 30 KM होगा कम, 3000 करोड़ से बनेगी टनल और पुल; यात्रा में लगेगा कम समय
Photo Credit / Attribution: Google

चंबा: हिमाचल प्रदेश के चंबा और भरमौर क्षेत्र में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के लिए पठानकोट-चंबा-भरमौर हाईवे के कायाकल्प की योजना से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। प्रस्तावित सड़क विकास कार्यों के तहत टनल, पुल और हाईवे के विभिन्न हिस्सों को बेहतर बनाने की योजना है। इस परियोजना पर करीब 3,000 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। योजना के अनुसार, सड़क मार्ग में बदलाव और दूरी कम होने से पठानकोट से चंबा-भरमौर तक का सफर लगभग 30 किलोमीटर कम हो सकता है। इससे यात्रा में लगने वाला समय भी घटने की उम्मीद है।
चंबा और भरमौर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक यात्राओं और स्थानीय लोगों की आवाजाही के लिए सड़क संपर्क बेहद महत्वपूर्ण है। मौजूदा मार्ग पर पहाड़ी मोड़, संकरी सड़कें और कुछ हिस्सों में लंबा सफर यात्रियों के लिए चुनौती पैदा करते हैं। खासकर बरसात और सर्दियों के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध होने और खराब मौसम के कारण आवागमन प्रभावित हो सकता है।
प्रस्तावित हाईवे विकास योजना का उद्देश्य यात्रा को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाना है। टनल बनने से पहाड़ों के घुमावदार रास्तों से गुजरने की जरूरत कुछ हिस्सों में कम हो सकती है। वहीं, नए पुल बनने से नदी और घाटियों के पार आवागमन बेहतर होगा। इससे न केवल निजी वाहनों से यात्रा करने वालों को लाभ मिल सकता है, बल्कि बसों, मालवाहक वाहनों और स्थानीय परिवहन को भी सुविधा मिलने की संभावना है।
पठानकोट से चंबा और भरमौर की ओर जाने वाला मार्ग पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। चंबा अपनी ऐतिहासिक विरासत, मंदिरों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जबकि भरमौर में स्थित मणिमहेश यात्रा हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। सड़क संपर्क बेहतर होने पर तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है।
भरमौर क्षेत्र में मणिमहेश यात्रा के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। लंबी दूरी तय करके आने वाले यात्रियों के लिए सड़क की स्थिति और यात्रा में लगने वाला समय अहम होता है। यदि प्रस्तावित परियोजना के तहत दूरी घटती है और रास्ते में बाधाएं कम होती हैं, तो इससे यात्रियों की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजना के पूरा होने और नए मार्ग के चालू होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस हाईवे के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से कृषि उत्पादों, स्थानीय सामान और निर्माण सामग्री की ढुलाई आसान हो सकती है। इसके अलावा, पर्यटन से जुड़े कारोबार जैसे होटल, होमस्टे, टैक्सी और छोटे दुकानदारों को भी फायदा मिल सकता है। दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच होने से स्वास्थ्य सेवाओं और आपातकालीन परिवहन में भी मदद मिल सकती है।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान पर्यावरण और भूगर्भीय परिस्थितियों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है। टनल और पुलों के निर्माण के लिए पहाड़ों की संरचना, नदी के बहाव, भूस्खलन की आशंका और वर्षा के प्रभाव का तकनीकी अध्ययन आवश्यक है। निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि परियोजना लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।
करीब 3,000 करोड़ रुपये की इस योजना से चंबा-भरमौर क्षेत्र के सड़क नेटवर्क में बड़े बदलाव की उम्मीद है। प्रस्तावित कार्य पूरे होने पर पठानकोट से दूरी करीब 30 किलोमीटर तक कम होने और यात्रा समय में कमी आने का अनुमान है। हालांकि, परियोजना की विस्तृत समयसीमा, निर्माण के अलग-अलग चरणों और टनल-पुलों के चालू होने की तारीखों की आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

Leave a comment