हिमाचल प्रदेश में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर सफर करने वाले लोगों के लिए सड़क कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव की तैयारी है। इस मार्ग पर सुरंगों के निर्माण और उनकी अलाइनमेंट में सुधार से वाहनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने का लक्ष्य है। खास तौर पर करीब दो किलोमीटर लंबी सुरंग से यातायात को सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही झलोगी सुरंग की अलाइनमेंट बदलने की योजना भी चर्चा में है, जिससे इस पहाड़ी मार्ग पर सफर के दौरान आने वाली चुनौतियों को कम करने में मदद मिल सकती है।
कीरतपुर-मनाली फोरलेन हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सड़क मार्गों में शामिल है। यह मार्ग मैदानी क्षेत्रों से बिलासपुर, मंडी, कुल्लू और मनाली की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए अहम कड़ी का काम करता है। पर्यटन सीजन, छुट्टियों और धार्मिक अवसरों पर इस सड़क पर वाहनों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में सड़क की क्षमता, सुरंगों की उपलब्धता और संवेदनशील स्थानों पर यातायात व्यवस्था का बेहतर होना यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण है। पहाड़ी रास्तों पर कम दूरी में ऊंचाई का बड़ा अंतर, तीखे मोड़, संकरी सड़कें और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक चुनौतियां सफर को प्रभावित कर सकती हैं। फोरलेन परियोजना में सुरंगों और पुलों का इस्तेमाल इन्हीं मुश्किलों को कम करने के लिए किया जाता है।
करीब दो किलोमीटर लंबी सुरंग से वाहनों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। पहाड़ों को काटकर लंबा घुमावदार रास्ता बनाने के बजाय सुरंग के जरिए सीधा मार्ग उपलब्ध कराने से यात्रा की दूरी और समय घटाने में मदद मिल सकती है। इससे वाहन चालकों को पहाड़ी मोड़ों से गुजरने की जरूरत कम हो सकती है और यातायात का प्रवाह भी बेहतर हो सकता है। हालांकि, इस सुरंग से कितना समय बचेगा, इसे कब तक यातायात के लिए खोला जाएगा और इसके संचालन से जुड़ी अंतिम व्यवस्था क्या होगी, इसकी पुष्टि संबंधित परियोजना एजेंसी की आधिकारिक जानकारी से ही की जा सकती है।
फोरलेन पर सुरंगों का महत्व केवल यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं है। पहाड़ी इलाकों में सड़क का एक हिस्सा भूस्खलन, चट्टान खिसकने या खराब मौसम के कारण प्रभावित होने पर यातायात बाधित हो सकता है। बेहतर इंजीनियरिंग के साथ तैयार सुरंगें कुछ संवेदनशील हिस्सों में सड़क को अधिक सुरक्षित और मौसम के असर से अपेक्षाकृत कम प्रभावित बनाने में मदद कर सकती हैं। फिर भी सुरंगों में सुरक्षित यात्रा के लिए पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन, जल निकासी, अग्नि सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन निकास जैसी व्यवस्थाओं का दुरुस्त होना जरूरी है।
ताजा जानकारी के अनुसार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दयोड़ और हणोगी की बाईं ओर की सुरंगों को अगले तीन महीने के भीतर यातायात के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों ने निर्माण कंपनी और विशेषज्ञों के साथ बैठक कर शेष तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की है। इन सुरंगों के चालू होने के बाद मंडी से कुल्लू की ओर जाने वाले वाहनों और कुल्लू से मंडी की ओर आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग सुरंगों का इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे दोनों दिशाओं में यातायात को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दयोड़ और हणोगी के इस हिस्से में सुरंगों का निर्माण इसलिए भी अहम है, क्योंकि पुराने मार्ग पर कई स्थानों पर तीखे मोड़ और संकरे हिस्से यातायात की गति को प्रभावित करते रहे हैं। पर्यटन सीजन में जब चंडीगढ़, पंजाब, दिल्ली और दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में वाहन कुल्लू-मनाली पहुंचते हैं, तो इन स्थानों पर जाम लगने की आशंका बढ़ जाती है। नई सुरंगों से वाहन चालकों को पुराने घुमावदार हिस्सों से बचकर आगे बढ़ने का विकल्प मिलता है। इससे यात्रा अधिक सहज होने के साथ-साथ समय की बचत और सड़क पर वाहनों के दबाव को नियंत्रित करने में भी सहायता मिल सकती है।
झलोगी सुरंग की अलाइनमेंट में बदलाव भी इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्ष 2025 में भारी बारिश और भूस्खलन के दौरान पहाड़ से मलबा और चट्टानें गिरने के कारण सुरंग के प्रवेश द्वार यानी पोर्टल को नुकसान पहुंचा था। सुरंग के अंदरूनी हिस्से पर भी क्षति की आशंका जताई गई थी। ऐसे में केवल पुराने क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत करना ही पर्याप्त नहीं माना जा रहा है, बल्कि भविष्य में दोबारा ऐसी घटना होने के जोखिम को ध्यान में रखते हुए नए विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
योजना के अनुसार, झलोगी सुरंग का नया पोर्टल मौजूदा स्थान से लगभग 150 मीटर दूर थलौट की दिशा में बनाया जा सकता है। अलाइनमेंट में बदलाव का उद्देश्य सुरंग के प्रवेश वाले हिस्से को बार-बार होने वाले भूस्खलन के खतरे से अपेक्षाकृत सुरक्षित बनाना है। हालांकि, अंतिम डिजाइन और निर्माण संबंधी निर्णय विशेषज्ञों की जांच तथा तकनीकी आकलन के बाद ही स्पष्ट होंगे। इसके लिए विशेषज्ञों का दल सुरंग के अंदर जाकर क्षति का निरीक्षण करेगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि किन हिस्सों की मरम्मत जरूरी है और किस तरह का निर्माण सबसे उपयुक्त रहेगा।
पहाड़ी राष्ट्रीय राजमार्गों पर किसी सुरंग का निर्माण या पुनर्निर्माण सामान्य सड़क निर्माण से अधिक जटिल होता है। चट्टानों की प्रकृति, पानी का रिसाव, ढलान की स्थिरता, आसपास के पहाड़ों की स्थिति और बारिश के दौरान मलबा गिरने की आशंका जैसे पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करना पड़ता है। झलोगी में अलाइनमेंट बदलने की योजना के पीछे भी सुरक्षा को प्राथमिकता देना अहम कारण है। नए पोर्टल के स्थान और सुरंग की संरचना को तय करते समय इन तकनीकी चुनौतियों का ध्यान रखना जरूरी होगा।
स्थानीय लोगों के लिए इस मार्ग की बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा संबंध रोजमर्रा की आवाजाही से भी है। मंडी और कुल्लू के बीच आने-जाने वाले कर्मचारी, व्यापारी, विद्यार्थी, मरीज और मालवाहक वाहन इस सड़क पर निर्भर हैं। यातायात सुचारु रहने से जरूरी सामान की आपूर्ति और आपातकालीन सेवाओं को भी लाभ मिल सकता है। यदि सुरंगों के दोनों मार्ग व्यवस्थित रूप से संचालित होते हैं और क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप पूरी होती है, तो इस क्षेत्र में यात्रा अधिक भरोसेमंद बन सकती है।
कुल्लू-मनाली हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हैं। गर्मियों की छुट्टियों, दशहरा और सर्दियों में बर्फबारी के मौसम के दौरान यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे समय में सड़क पर जाम लगने से पर्यटकों की यात्रा प्रभावित होती है और स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ता है। बेहतर सुरंग कनेक्टिविटी से होटल, टैक्सी, परिवहन, रेस्तरां और दूसरे पर्यटन आधारित कारोबारों को अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही स्थानीय निवासियों को भीड़भाड़ वाले सड़क हिस्सों से राहत मिल सकती है।
हालांकि, सुरंगों के शुरू होने के बाद भी यात्रियों को पहाड़ी मार्गों पर सावधानी बरतनी होगी। बारिश, भूस्खलन, सड़क पर मलबा और मौसम में अचानक बदलाव के कारण यातायात प्रभावित हो सकता है। वाहन चालकों को यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह देखनी चाहिए तथा सुरंगों में निर्धारित गति सीमा और सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए। विशेष रूप से रात में या खराब मौसम में वाहन चलाते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
दयोड़ और हणोगी की बाईं तट की सुरंगों को अगले तीन महीने के भीतर खोलने का लक्ष्य और झलोगी सुरंग के पोर्टल को नए स्थान पर बनाने की योजना कीरतपुर-मनाली फोरलेन को अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। अब इन योजनाओं का वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने, तकनीकी जांच और यातायात के लिए सुरक्षित संचालन शुरू होने पर निर्भर करेगा। यात्रियों को सुरंगों के उद्घाटन और मार्ग व्यवस्था में होने वाले बदलावों की आधिकारिक सूचना के आधार पर ही अपनी यात्रा की योजना बनानी चाहिए।









