हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती के बाद अब कीवी बागवानों के लिए कमाई का नया विकल्प बनकर उभर रहा है। शिमला जिले में कीवी की फसल को अच्छा बाजार भाव मिलने से उत्पादकों के चेहरे खिल उठे हैं। स्थानीय बाजार में कीवी की कीमत 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जा रही है। मांग बढ़ने के साथ ही यहां उत्पादित फल दिल्ली सहित दूसरे बड़े बाजारों तक भेजे जा रहे हैं। इससे किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फल उत्पादन में विविधता लाने का अवसर मिल रहा है।
हिमाचल प्रदेश लंबे समय से सेब उत्पादन के लिए देशभर में अपनी पहचान रखता है। शिमला, कोटखाई, रोहड़ू और आसपास के पर्वतीय इलाकों में बड़ी संख्या में परिवार सेब की बागवानी पर निर्भर हैं। हालांकि, बदलते मौसम, उत्पादन लागत और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण बागवान अब दूसरी फल फसलों की ओर भी ध्यान दे रहे हैं। कीवी इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।
कीवी की खेती को लेकर बागवानों की दिलचस्पी बढ़ने की एक बड़ी वजह बाजार में इसकी कीमत और उपभोक्ताओं के बीच बढ़ती मांग है। कीवी को पोषक तत्वों से भरपूर फल माना जाता है और शहरी बाजारों में इसकी खपत अच्छी रहती है। ऐसे में यदि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के साथ उचित बाजार और परिवहन की सुविधा मिलती है, तो यह फसल उनकी आय बढ़ाने में मदद कर सकती है।
शिमला में कीवी की बिक्री के लिए दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक सप्लाई पहुंचना उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण है। बड़े शहरों में फल की मांग रहने से किसानों को स्थानीय मंडियों के अलावा दूसरे बाजारों में भी बिक्री का अवसर मिलता है। हालांकि, किसानों को वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें बाग से बाजार तक फल पहुंचाने में कितना खर्च करना पड़ता है और बिक्री के समय उन्हें कितना भाव मिलता है।
कीवी की खेती से जुड़े किसानों के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में पौधों का उचित चयन, जल निकासी, सहारे की व्यवस्था, समय पर छंटाई और रोगों से बचाव पर ध्यान देना जरूरी होता है। फल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए तुड़ाई के बाद उचित पैकिंग और भंडारण भी महत्वपूर्ण हैं। यदि इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाए, तो किसान बेहतर गुणवत्ता का फल तैयार कर बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमत हासिल कर सकते हैं।
सेब की खेती पर निर्भर रहने वाले बागवानों के लिए कीवी एक अतिरिक्त आय का विकल्प बन सकता है। हालांकि, नई फसल लगाने से पहले किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की सुविधा और बाजार की उपलब्धता का आकलन करना चाहिए। बागवानी विशेषज्ञों की सलाह लेकर खेती शुरू करना भी उपयोगी हो सकता है।
शिमला में कीवी को 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक भाव मिलने और दिल्ली तक इसकी सप्लाई पहुंचने की खबर से हिमाचल के फल उत्पादकों के बीच इस फसल को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। यदि बाजार में मांग बनी रहती है और किसानों को उचित कीमत मिलती है, तो आने वाले समय में कीवी राज्य की बागवानी में सेब के साथ एक अहम भूमिका निभा सकता है।







