PC एंड्रयू हार्पर के हत्यारों की रिहाई पर ब्रिटेन में घमासान, एंडी बर्नहम बोले- जेल में रखने को लेकर बढ़ा भरोसा

लंदन: ब्रिटेन में PC एंड्रयू हार्पर के हत्यारों की संभावित समयपूर्व रिहाई पर विवाद बढ़ा। PM एंडी बर्नहम जेल क्षमता बढ़ाकर रिहाई रोकने को लेकर आश्वस्त हैं।

ब्रिटेन में PC एंड्रयू हार्पर के हत्यारों की संभावित समयपूर्व रिहाई को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने जेल क्षमता बढ़ाकर उन्हें जेल में रखने का भरोसा जताया, जबकि विपक्ष ने सरकार पर बार-बार रुख बदलने और पीड़ित परिवारों को परेशान करने का आरोप लगाया।

लंदन: ब्रिटेन में पुलिस अधिकारी PC एंड्रयू हार्पर की हत्या के दोषियों की संभावित समयपूर्व रिहाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा है कि उन्हें अब भरोसा बढ़ रहा है कि सरकार जेलों में अतिरिक्त क्षमता पैदा करके हार्पर के हत्यारों को समय से पहले रिहा होने से रोक सकती है। यह मामला सरकार की नई जेल रिहाई नीति और गंभीर अपराधों के दोषियों के प्रति उसके रुख को लेकर भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

जेलों में जगह बढ़ाने की योजना पर सरकार का जोर

ब्रिटेन सरकार अक्टूबर से इंग्लैंड और वेल्स की जेलों में भीड़ कम करने के लिए एक नई शुरुआती रिहाई योजना लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कई कैदियों को उनकी सजा का निर्धारित हिस्सा पूरा होने से पहले जेल से बाहर आने का मौका मिलेगा। सरकार का तर्क है कि जेलों में क्षमता का संकट लंबे समय से बना हुआ है और अतिरिक्त जगह उपलब्ध कराना जरूरी है।

प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने कहा कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए जेल क्षमता बढ़ाने के कई विकल्पों पर काम कर रही है। इनमें विदेशी कैदियों को तेजी से उनके देशों में भेजना और महिला जेलों की उपलब्ध क्षमता का सुरक्षित तरीके से पुरुष कैदियों के लिए इस्तेमाल करना भी शामिल है। सरकार का दावा है कि इन कदमों से गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को जेल में रखने के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है।

हार्पर के हत्यारों की रिहाई पर क्यों विवाद?

PC एंड्रयू हार्पर की 2019 में हत्या कर दी गई थी। इस मामले में जेसी कोल और अल्बर्ट बोवर्स को 2020 में दोषी ठहराया गया और जेल की सजा सुनाई गई थी। प्रस्तावित शुरुआती रिहाई व्यवस्था के कारण दोनों के समय से पहले जेल से बाहर आने की संभावना ने हार्पर के परिवार और आम लोगों में नाराजगी पैदा कर दी है।

हार्पर की हत्या ब्रिटेन में लंबे समय तक चर्चा का विषय रही थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। अब संभावित रिहाई की खबरों ने पुराने जख्म फिर से ताजा कर दिए हैं।

हार्पर की मां डेबी एडलम ने भी सरकार की बदलती घोषणाओं को लेकर अपनी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों के कारण परिवार मानसिक रूप से बेहद मुश्किल स्थिति से गुजर रहा है। उनके लिए यह केवल जेल नीति का सवाल नहीं, बल्कि बेटे की हत्या के बाद न्याय की भावना से जुड़ा विषय है।

सरकार के बदलते रुख पर विपक्ष का हमला

हार्पर के हत्यारों की संभावित रिहाई को लेकर सरकार के रुख में बदलाव को लेकर विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधा है। शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिल्प ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार अपना रुख बदल रही है और इससे पीड़ित परिवारों को दोबारा मानसिक आघात पहुंच रहा है।

फिल्प ने कहा कि सरकार को शुरुआती रिहाई के मुद्दे पर स्पष्ट नीति अपनानी चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि पहले सरकार ने संकेत दिया था कि केवल एक या दो विशेष कैदियों को नियमों से बाहर रखना संभव नहीं है, लेकिन अब जेलों में जगह बनाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

विपक्ष का कहना है कि ऐसी स्थिति में पीड़ित परिवारों को लगातार बदलती जानकारी के कारण असमंजस और परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

न्याय मंत्री ने भी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई

ब्रिटेन के न्याय मंत्री एलेक्स नॉरिस ने कहा कि सरकार गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए लोगों को लंबे समय तक जेल में रखने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता की उचित अपेक्षा है कि गंभीर अपराधियों के लिए जेलों में पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए।

नॉरिस के मुताबिक, सरकार जेल क्षमता बढ़ाने के लिए हर गंभीर विकल्प पर विचार कर रही है। इसमें विदेशी अपराधियों को जल्द निर्वासित करना, महिला जेलों की क्षमता का सुरक्षित उपयोग और इंडिफिनिट पब्लिक प्रोटेक्शन यानी IPP से जुड़े मामलों की समीक्षा शामिल है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपलब्ध जेल स्थान का इस्तेमाल उन अपराधियों के लिए किया जाए जिन्हें समाज के लिए अधिक गंभीर खतरा माना जाता है।

शुरुआती रिहाई योजना में क्या बदलाव होगा?

नई योजना के तहत इंग्लैंड और वेल्स में कुछ निश्चित अवधि की सजा पाने वाले कैदियों को मौजूदा व्यवस्था की तुलना में जल्दी रिहा किया जा सकता है। सामान्य निश्चित सजा वाले कैदियों को जहां पहले अपनी सजा का करीब आधा हिस्सा जेल में बिताने के बाद रिहाई मिलती थी, वहां यह अवधि घटाकर लगभग एक-तिहाई की जा सकती है।

गंभीर यौन और हिंसक अपराधों में निश्चित अवधि की सजा पाने वाले कुछ कैदियों के लिए भी रिहाई की अवधि में बदलाव प्रस्तावित है। हालांकि, इन कैदियों पर जेल से बाहर आने के बाद कड़ी निगरानी रखी जाएगी और नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें दोबारा हिरासत में भेजा जा सकता है।

सबसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए गए कुछ कैदी, जिनमें उम्रकैद की सजा पाने वाले लोग शामिल हैं, इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे। सरकार ने हाल में बलात्कार, गंभीर बाल यौन अपराध और कुछ ग्रूमिंग अपराधों के दोषियों को भी प्रस्तावित बदलावों से बाहर रखने की घोषणा की थी।

हार्पर परिवार अकेला नहीं

समयपूर्व रिहाई की नीति से प्रभावित परिवारों की संख्या केवल हार्पर परिवार तक सीमित नहीं है। ब्रिटेन में कई अन्य पीड़ित परिवार भी इस नीति को लेकर चिंता जता चुके हैं।

कैल्विन बकले ने भी सरकार की शुरुआती रिहाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उनकी गर्भवती साथी फ्रेंकी जूल्स-हफ की तेज रफ्तार से हुई एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बकले ने कहा था कि दोषी को समय से पहले रिहाई की पात्रता मिलना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।

इसी तरह क्लेयर कॉर्करी के माता-पिता की भी तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से मौत हुई थी। उनका परिवार भी इस बात से चिंतित है कि गंभीर अपराधों के दोषियों को अपेक्षाकृत जल्दी जेल से बाहर आने का मौका मिल सकता है।

स्थानीय लोगों ने भी जताई चिंता

रीडिंग शहर के लोगों से बातचीत में भी हार्पर मामले को लेकर नाराजगी सामने आई। स्थानीय निवासी मेडेलीन डेनियल्स ने कहा कि उन्हें अपने पूरे जीवन में इस क्षेत्र में ऐसी भयावह घटना याद नहीं है। उनके मुताबिक, हार्पर की हत्या के समय लोगों में भारी आक्रोश था और संभावित रिहाई की खबर ने उस भावना को फिर से जगा दिया है।

कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि शुरुआती रिहाई के फैसले मामलों की गंभीरता और पीड़ितों की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अलग-अलग किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि सभी कैदियों पर एक समान नियम लागू करने के बजाय अपराध की प्रकृति और समाज पर उसके प्रभाव को भी देखा जाना चाहिए।

सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा

हार्पर के हत्यारों की संभावित रिहाई अब ब्रिटेन सरकार के लिए केवल न्याय व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा नहीं रह गया है। यह प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम के नेतृत्व और उनकी सरकार की नीति-निर्माण क्षमता की भी परीक्षा बन चुका है।

एक तरफ सरकार जेलों में बढ़ती भीड़ और सीमित क्षमता की समस्या से निपटना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ गंभीर अपराधों के दोषियों को जेल से जल्दी बाहर आने से रोकने का दबाव बढ़ रहा है। सरकार को दोनों चुनौतियों के बीच संतुलन बनाना होगा।

बर्नहम ने कहा है कि जेलों में अतिरिक्त क्षमता पैदा करने के प्रयासों से उन्हें अब अधिक भरोसा है कि हार्पर के हत्यारों को समय से पहले रिहाई से रोका जा सकता है। हालांकि, विपक्ष सरकार के बदलते बयानों पर सवाल उठा रहा है।

आने वाले दिनों में सरकार की ओर से जेल क्षमता और शुरुआती रिहाई नीति को लेकर और स्पष्ट फैसले सामने आने की उम्मीद है। इस बीच हार्पर का परिवार और अन्य पीड़ित परिवार सरकार से ऐसी न्याय व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जिसमें जेलों की क्षमता की समस्या का समाधान करते हुए गंभीर अपराधों के पीड़ितों और उनके परिवारों के अधिकारों को भी प्राथमिकता दी जाए।

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