PFRDA ने NPS इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। नए ढांचे के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड का प्रायोजक बनने की सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।
PFRDA: पेंशन कोष नियामक व विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। नियामक ने सैद्धांतिक रूप से एक नए ढांचे को मंजूरी दी है, जिसके तहत अब अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (Scheduled Commercial Banks – SCB) स्वतंत्र रूप से पेंशन फंड के प्रायोजक बन सकेंगे।
इस फैसले को NPS इकोसिस्टम के विस्तार और मजबूती के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल पेंशन फंड मैनेजमेंट में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि निवेशकों यानी NPS सब्सक्राइबर्स के लिए विकल्प भी ज्यादा होंगे।
क्या है PFRDA का नया ढांचा
PFRDA द्वारा मंजूर किया गया यह नया ढांचा पेंशन के मौजूदा पारिस्थितिकीतंत्र में मौजूद कुछ नियामकीय बाधाओं को हटाने पर केंद्रित है। अभी तक बैंकों की भूमिका पेंशन फंड प्रबंधन में काफी सीमित थी। वे सीधे तौर पर स्वतंत्र पेंशन फंड प्रायोजक के रूप में काम नहीं कर सकते थे।
नए ढांचे के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को NPS की परिसंपत्तियों के प्रबंधन के लिए स्वतंत्र पेंशन फंड प्रायोजक बनने की अनुमति दी जाएगी। इसका मतलब है कि बैंक अब सीधे पेंशन फंड मैनेजमेंट बिजनेस में उतर सकेंगे, बशर्ते वे तय पात्रता मानदंडों को पूरा करें।
क्यों जरूरी था यह बदलाव
NPS का दायरा लगातार बढ़ रहा है। निजी क्षेत्र के कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी और स्वरोजगार से जुड़े लोग बड़ी संख्या में NPS से जुड़ रहे हैं। ऐसे में पेंशन फंड प्रबंधन को और मजबूत, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना जरूरी हो गया था।
PFRDA का मानना है कि बैंकों की भागीदारी से पेंशन फंड इंडस्ट्री में अनुभव, पूंजी और संस्थागत मजबूती आएगी। बैंक पहले से ही बड़े पैमाने पर फाइनेंशियल सिस्टम का हिस्सा हैं और उनके पास जोखिम प्रबंधन, अनुपालन और गवर्नेंस का अच्छा अनुभव होता है।
NPS सब्सक्राइबर्स की सुरक्षा पर जोर
हालांकि PFRDA ने साफ किया है कि इस ढांचे में NPS सदस्यों यानी सब्सक्राइबर्स की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। नियामक के बयान के अनुसार, सभी नियामकीय बाधाओं को हटाते समय निवेशकों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
इस नए सिस्टम में पात्रता मानदंड काफी सख्त रखे जाएंगे ताकि केवल मजबूत और स्थिर बैंक ही पेंशन फंड प्रायोजक बन सकें।
RBI के मानदंडों के अनुरूप पात्रता शर्तें
PFRDA ने स्पष्ट किया है कि बैंकों की पात्रता तय करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके तहत बैंकों की निवल संपत्ति (Net Worth), बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) और विवेकपूर्ण सुदृढ़ता (Prudential Soundness) जैसे मानकों की जांच की जाएगी।
इन शर्तों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि केवल पर्याप्त पूंजी वाले और प्रणालीगत रूप से मजबूत बैंक ही पेंशन फंड प्रायोजित कर सकें। इससे NPS की परिसंपत्तियों की सुरक्षा और स्थिरता बनी रहेगी।
विस्तृत दिशानिर्देश होंगे अलग से जारी
PFRDA ने बताया है कि इस नए ढांचे से जुड़े विस्तृत दिशानिर्देश अलग से अधिसूचित किए जाएंगे। ये दिशानिर्देश नए पेंशन फंड्स के साथ-साथ मौजूदा पेंशन फंड्स पर भी लागू होंगे।
इसका मतलब है कि पहले से काम कर रहे पेंशन फंड मैनेजर्स को भी नए नियमों और मानकों का पालन करना होगा। इससे पूरे सिस्टम में एकरूपता और पारदर्शिता आएगी।
NPS ट्रस्ट बोर्ड को किया गया मजबूत
पेंशन सिस्टम को और सुदृढ़ बनाने के लिए PFRDA ने NPS ट्रस्ट के बोर्ड में भी अहम बदलाव किए हैं। औपचारिक चयन प्रक्रिया के बाद बोर्ड में तीन नए न्यासी नियुक्त किए गए हैं। इन नियुक्तियों का मकसद ट्रस्ट के संचालन में अनुभव, विशेषज्ञता और बेहतर गवर्नेंस लाना है।
दिनेश कुमार खारा बने NPS ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष
नए न्यासियों में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व अध्यक्ष दिनेश कुमार खारा का नाम सबसे प्रमुख है। उन्हें NPS ट्रस्ट बोर्ड का अध्यक्ष नामित किया गया है।
दिनेश कुमार खारा के पास बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर का लंबा अनुभव है। उनके नेतृत्व में NPS ट्रस्ट से बेहतर निगरानी और रणनीतिक दिशा की उम्मीद की जा रही है।
कौन हैं अन्य नए न्यासी
NPS ट्रस्ट बोर्ड में दो अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें स्वाति अनिल कुलकर्णी और डॉ. अरविंद गुप्ता शामिल हैं। स्वाति अनिल कुलकर्णी यूटीआई एएमसी की पूर्व कार्यकारी उपाध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्हें एसेट मैनेजमेंट और निवेश प्रबंधन का व्यापक अनुभव है।
डॉ. अरविंद गुप्ता डिजिटल इंडिया फाउंडेशन के सह-संस्थापक और प्रमुख हैं। इसके अलावा वे सिडबी फंड ऑफ फंड्स योजना की नैशनल वेंचर्स कैपिटल निवेश समिति के सदस्य भी हैं।












