पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर BJP उम्मीदवार देबांग्शु बड़ी बढ़त के साथ जीत के करीब पहुंच गए हैं। 20 राउंड की गिनती में वे 1 लाख से ज्यादा वोटों से आगे हैं, जबकि TMC उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर खिसक गए।
फालता: पश्चिम बंगाल की चर्चित फालता विधानसभा सीट पर मतगणना के बीच भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। शुरुआती रुझानों और 20 राउंड की गिनती के बाद भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु एक लाख से अधिक वोटों से आगे चल रहे हैं। इस सीट पर भाजपा की संभावित जीत को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार दोपहर 4:30 बजे तक भाजपा उम्मीदवार को 1.4 लाख से ज्यादा वोट मिल चुके थे। वहीं Communist Party of India (Marxist) के उम्मीदवार शंभूनाथ कुर्मी करीब 40 हजार वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान को लेकर हो रही है, जो चुनाव से हटने की घोषणा के बावजूद चौथे स्थान पर चल रहे हैं।
TMC उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे नंबर पर
All India Trinamool Congress के उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से पहले चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी। हालांकि उनका नाम और चुनाव चिन्ह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM पर बना रहा। इसके चलते मतदाताओं ने उन्हें वोट भी डाले।
मतगणना के दौरान जहांगीर खान को लगभग 7 हजार वोट मिले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति भारतीय चुनावी प्रक्रिया में एक दुर्लभ उदाहरण बन गई है, जहां उम्मीदवार ने सार्वजनिक रूप से पीछे हटने की बात कही लेकिन कानूनी रूप से नाम वापस नहीं लिया।
फालता सीट पर दोबारा मतदान क्यों हुआ?
फालता सीट पर 21 मई को सभी 285 बूथों पर दोबारा मतदान कराया गया था। इससे पहले 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद कई गंभीर आरोप सामने आए थे।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि कई मतदान केंद्रों पर EVM में भाजपा के चुनाव चिन्ह वाले बटन पर टेप चिपकाया गया था, जिससे वोटिंग प्रभावित हुई। शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने जांच शुरू की और कई बूथों पर अनियमितताओं के संकेत मिले।
चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर सुब्रत गुप्ता ने खुद क्षेत्र का दौरा किया था। जांच में लगभग 60 बूथों पर कथित छेड़छाड़ के सबूत सामने आए। इसके बाद आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया।
वेब कैमरों की फुटेज से छेड़छाड़ के आरोप
जांच के दौरान केवल EVM में गड़बड़ी ही नहीं, बल्कि मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों की रिकॉर्डिंग में भी कथित छेड़छाड़ के संकेत मिले। अधिकारियों के अनुसार कुछ कैमरों की फुटेज अधूरी पाई गई, जबकि कुछ जगहों पर रिकॉर्डिंग में तकनीकी गड़बड़ियां सामने आईं।
इन घटनाओं ने फालता उपचुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया। विपक्षी दलों ने चुनावी पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जबकि चुनाव आयोग ने निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की।

रीपोलिंग में बढ़ा मतदान प्रतिशत
चुनाव आयोग के मुताबिक फालता में रीपोलिंग के दौरान 88.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह पहले चरण के मतदान से करीब 2 प्रतिशत अधिक था। 29 अप्रैल को यहां 86.71 प्रतिशत वोटिंग हुई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोबारा मतदान और बढ़ी हुई सुरक्षा व्यवस्था के कारण मतदाताओं का भरोसा बढ़ा, जिससे मतदान प्रतिशत में इजाफा हुआ।
भाजपा के लिए क्यों अहम है फालता सीट?
फालता विधानसभा सीट लंबे समय तक Communist Party of India (Marxist) का गढ़ मानी जाती थी। बाद में यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का मजबूत आधार बन गया। 2011 के बाद से लगातार TMC यहां जीत दर्ज करती रही है।
हालांकि भाजपा इस सीट पर कभी जीत हासिल नहीं कर पाई। ऐसे में मौजूदा बढ़त भाजपा के लिए प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दक्षिण 24 परगना जिले में भाजपा का बढ़ता प्रभाव
फालता सीट South 24 Parganas जिले के अंतर्गत आती है। जिले की 31 सीटों में भाजपा पहले ही 10 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है।
सागर, काकद्वीप, गोसाबा और सोनारपुर जैसे इलाकों के अलावा जादवपुर, टॉलीगंज और बेहला जैसे शहरी क्षेत्रों में भी भाजपा ने अपनी मौजूदगी मजबूत की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फालता में संभावित जीत भाजपा की राज्य में बढ़ती स्वीकार्यता का संकेत हो सकती है।
जहांगीर खान का नाम EVM में क्यों बना रहा?
चुनावी नियमों के अनुसार नामांकन वापसी की अंतिम तिथि समाप्त होने के बाद उम्मीदवार आधिकारिक रूप से चुनाव से बाहर नहीं हो सकता। यही वजह रही कि जहांगीर खान द्वारा चुनाव न लड़ने की घोषणा के बावजूद उनका नाम EVM पर मौजूद रहा।
चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने केवल सार्वजनिक बयान दिया था, लेकिन आधिकारिक लिखित प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। इसलिए EVM में TMC के चुनाव चिन्ह के साथ उनकी फोटो और नाम यथावत रखा गया।
क्या जहांगीर खान जीत का दावा कर सकते हैं?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि चुनाव आयोग उनकी उम्मीदवारी को वैध मानता है, तो ज्यादा वोट मिलने की स्थिति में वे तकनीकी रूप से जीत का दावा कर सकते थे।
हालांकि चूंकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से चुनाव न लड़ने की बात कही थी, इसलिए मामला पूरी तरह चुनाव आयोग की व्याख्या और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव
राजनीतिक परिदृश्य में यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा लगातार अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
हालिया विधानसभा चुनावों में भाजपा ने 293 सीटों में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि Mamata Banerjee की पार्टी TMC को 80 सीटें मिली थीं। यदि भाजपा फालता सीट भी जीत जाती है, तो उसकी कुल सीट संख्या 208 हो जाएगी।
राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि फालता उपचुनाव का असर केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेगा। यह परिणाम आने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले विपक्ष और सत्ताधारी दलों की रणनीति को प्रभावित कर सकता है।
फालता की लड़ाई केवल एक सीट का चुनाव नहीं रही, बल्कि यह चुनावी पारदर्शिता, राजनीतिक ध्रुवीकरण और बदलते जनमत का बड़ा संकेत बन चुकी है।










