वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता डेट टू GDP रेश्यो को कम करना होगी। कोविड के बाद बढ़े कर्ज को नियंत्रित करने के लिए केंद्र और राज्यों को फिस्कल डिसिप्लिन अपनाना होगा।
New Delhi: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ शब्दों में कहा है कि आने वाले वित्त वर्ष में सरकार का सबसे बड़ा फोकस डेट टू GDP रेश्यो को कम करने पर रहेगा। बुधवार को टाइम्स नेटवर्क के इंडिया इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान भारत का डेट टू GDP रेश्यो 60 प्रतिशत से ऊपर चला गया था, जो किसी भी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय होता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह अनुपात अब धीरे धीरे नीचे आ रहा है, लेकिन इसे और कम करना बेहद जरूरी है। उनके अनुसार, अगले वित्त वर्ष में सरकार की नीतियों और फैसलों का केंद्र यही रहेगा।
कोविड के बाद कर्ज का दबाव
वित्त मंत्री ने बताया कि कोविड के समय अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर खर्च करना पड़ा था। इसका सीधा असर सरकारी कर्ज पर पड़ा और डेट टू GDP रेश्यो काफी बढ़ गया। उन्होंने कहा कि अब जब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है, तो कर्ज को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है। ज्यादा कर्ज और ऊंची ब्याज दरें लंबे समय में विकास की रफ्तार को धीमा कर सकती हैं। इसलिए सरकार अब फिस्कल डिसिप्लिन पर खास ध्यान दे रही है।
राज्यों को भी दी अहम सलाह
सीतारमण ने सिर्फ केंद्र सरकार की नहीं, बल्कि राज्यों की वित्तीय स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने राज्यों से अपील की कि वे भी अपने डेट टू GDP रेश्यो को कम करने पर गंभीरता से काम करें। उन्होंने RBI के आंकड़ों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ क्षेत्रों में कर्ज का स्तर चिंता बढ़ाने वाला है। हालांकि उन्होंने किसी राज्य का नाम नहीं लिया, लेकिन संकेत साफ थे कि राज्यों को भी वित्तीय अनुशासन अपनाने की जरूरत है। उनका कहना था कि जब तक ऊंची ब्याज दरों पर जमा हो रहे कर्ज को स्वीकार्य स्तर तक नहीं लाया जाता, तब तक विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।
बॉन्ड मार्केट को मजबूत करने की योजना
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार बॉन्ड मार्केट को और गहरा और मजबूत बनाने पर भी काम कर रही है। इसका मकसद यह है कि अर्थव्यवस्था में ज्यादा फंड उपलब्ध हो सके और सरकार के साथ साथ निजी क्षेत्र को भी सस्ते और लंबे समय के फाइनेंसिंग विकल्प मिलें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने स्थिर नीतियों और अनुशासन का परिचय दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा बना है। उनके मुताबिक, एक स्थिर सरकार ही लंबे समय की आर्थिक रणनीति को सफलतापूर्वक लागू कर सकती है।
सीतारमण ने दोहराया कि फिस्कल मैनेजमेंट सरकार की प्राथमिकता में बना रहेगा। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक साल के लिए नहीं, बल्कि हर साल इस अनुशासन को बनाए रखना जरूरी है। सरकार का लक्ष्य है कि विकास और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाया जाए। इसके लिए खर्च और कर्ज दोनों पर नजर रखना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।
टैरिफ को लेकर बदला वैश्विक माहौल
वैश्विक व्यापार पर बात करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आज का अंतरराष्ट्रीय व्यापार पहले जैसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत टैरिफ किंग है, लेकिन सच्चाई यह है कि आज टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि भारत का इरादा कभी भी टैरिफ को हथियार बनाने का नहीं था। लेकिन मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात में कई देश टैरिफ बाधाएं खड़ी कर रहे हैं और इसे सामान्य बात मान लिया गया है।
भारत को सोच समझकर चलने की जरूरत
सीतारमण ने कहा कि भारत को अपनी अर्थव्यवस्था और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा करनी है, लेकिन इसके लिए बहुत संतुलित और सोच समझकर कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि आज बिना ज्यादा आलोचना के टैरिफ का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है। नए खिलाड़ी वैश्विक व्यापार में टैरिफ बैरियर खड़े कर रहे हैं और यह नया नॉर्मल बनता जा रहा है। ऐसे माहौल में भारत को बेहद सावधानी से अपनी रणनीति बनानी होगी।
GDP में सेवा क्षेत्र का अहम योगदान
वित्त मंत्री ने सेवा क्षेत्र की भूमिका की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत की GDP वृद्धि में करीब 60 प्रतिशत योगदान सेवा क्षेत्र का है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सेवाएं सिर्फ IT तक सीमित नहीं हैं। पर्यटन, आतिथ्य और अन्य सेवाओं को भी आगे आना होगा। सरकार का प्रयास है कि हर क्षेत्र को अपनी गति से बढ़ने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए जरूरी इकोसिस्टम मिले।
सीतारमण ने कहा कि सेवा क्षेत्र के साथ साथ विनिर्माण सेक्टर में भी तेजी देखने को मिल रही है। सरकार की नीतियों का उद्देश्य है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज दोनों मिलकर भारत की विकास कहानी को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि बैलेंस्ड ग्रोथ ही लंबे समय में टिकाऊ विकास की कुंजी है।
निजी क्षेत्र को मजबूत करना जरूरी
निजी क्षेत्र की भूमिका पर जोर देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि प्राइवेट एंटरप्राइजेज को बढ़ने में मदद करना बेहद जरूरी है। इससे ज्यादा रोजगार पैदा होंगे और GDP में योगदान बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स में की गई कटौती एक जरूरी और सही फैसला था। इससे कंपनियों को निवेश और विस्तार का मौका मिला है।
GCC और डेटा सेंटर्स पर फोकस
वित्त मंत्री ने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डेटा सेंटर्स की बढ़ती संख्या का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों के विकास के लिए ऊर्जा सुरक्षा बेहद अहम है। इसी दिशा में सरकार परमाणु ऊर्जा पर भी काम कर रही है। उन्होंने बताया कि स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर पर काम हो रहा है और इसे बड़े स्तर पर समर्थन दिया जाएगा, ताकि भारत स्वच्छ ऊर्जा के रूप में इस पर भरोसा कर सके।
सीतारमण ने कहा कि जहां भी उद्यमशीलता की क्षमता है, चाहे वह छोटे शहर हों या गांव, उसे पूरा समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के छोटे शहरों में आंत्रप्रेन्योरशिप तेजी से बढ़ रही है। इससे न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो रही हैं, बल्कि वैश्विक मांग को पूरा करने की क्षमता भी बढ़ रही है।
क्रेडिट पहुंच में हुआ बड़ा सुधार
उन्होंने बताया कि भारत में आम लोगों की क्रेडिट तक पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बेहतर हुई है। ज्यादा लोग अब सीधे बैंक क्रेडिट से जुड़ पा रहे हैं। इससे छोटे कारोबार और नए उद्यम शुरू करने में मदद मिल रही है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत भू आर्थिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर रहा है और आलोचकों को इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।










