फ्रांस में भीषण गर्मी और रेड हीटवेव अलर्ट के बीच सरकार ने कुछ संगीत समारोहों में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया है। तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
पेरिस: यूरोप के कई देशों में जारी भीषण गर्मी के बीच France ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। देश के कई हिस्सों में रेड हीटवेव अलर्ट जारी होने के बाद सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले प्रसिद्ध संगीत महोत्सवों के कुछ कार्यक्रमों में शराब के सेवन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब फ्रांस के बड़े हिस्से में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में गर्मी का स्तर हाल के वर्षों के रिकॉर्ड को भी चुनौती दे सकता है।
फेट द ला म्यूजिक उत्सव में उमड़ती है लाखों लोगों की भीड़
फ्रांस में हर वर्ष आयोजित होने वाला Fête de la Musique दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक संगीत आयोजनों में गिना जाता है। इस आयोजन के दौरान देशभर की सड़कों, पार्कों, चौकों और सार्वजनिक स्थानों पर हजारों संगीत कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
चार दशक से अधिक पुरानी इस परंपरा में हर साल लाखों लोग भाग लेते हैं। राजधानी Paris में ही पिछले वर्ष लगभग 20 लाख लोगों ने विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था। हालांकि इस बार भीषण गर्मी के कारण उत्सव के आयोजन पर विशेष स्वास्थ्य दिशानिर्देश लागू किए गए हैं।
रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में शराब पर रोक
फ्रांसीसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन क्षेत्रों में रेड हीटवेव चेतावनी लागू है, वहां सार्वजनिक स्थानों पर शराब के सेवन को सीमित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान शराब का सेवन शरीर में पानी की कमी, चक्कर आने, बेहोशी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सरकार और उससे जुड़े संस्थानों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शराब उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव को रोकना और चिकित्सा संसाधनों को सबसे अधिक जरूरतमंद लोगों के लिए उपलब्ध रखना है।
40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है तापमान
मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस से लेकर पेरिस क्षेत्र और बर्गंडी तक कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कुछ स्थानों पर यह आंकड़ा 41 डिग्री सेल्सियस तक भी जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की यह लहर सामान्य मौसमी तापमान से 10 से 15 डिग्री सेल्सियस अधिक है। यही कारण है कि इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर गर्मी की घटनाओं में शामिल किया जा रहा है। पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार को तापमान अपने चरम स्तर पर पहुंच सकता है और कुछ क्षेत्रों में ऐतिहासिक रिकॉर्ड के करीब पहुंचने की संभावना है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ सकता है दबाव
अत्यधिक गर्मी के दौरान अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ना सामान्य बात है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, सांस संबंधी समस्याएं और हृदय रोगों से जुड़ी आपात स्थितियों में वृद्धि देखी जाती है। इसी वजह से सरकार लोगों को पर्याप्त पानी पीने, धूप से बचने और शराब जैसे शरीर को निर्जलित करने वाले पदार्थों से दूरी बनाए रखने की सलाह दे रही है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
राजधानी पेरिस में विशेष इंतजाम
भीषण गर्मी से राहत देने के लिए पेरिस प्रशासन ने कई विशेष कदम उठाए हैं। शहर के पार्कों और सार्वजनिक उद्यानों को रातभर खुला रखने का फैसला किया गया है ताकि स्थानीय निवासी और पर्यटक अपेक्षाकृत ठंडे वातावरण में समय बिता सकें।
इसके अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों में पेयजल सुविधाएं बढ़ाई गई हैं और नागरिकों को लगातार स्वास्थ्य संबंधी सलाह जारी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों को देर रात तक खुला रखने से लोगों को घरों में बढ़ते तापमान से कुछ राहत मिल सकती है।
परिवहन और शिक्षा क्षेत्र भी प्रभावित
गर्मी की इस लहर का असर केवल स्वास्थ्य क्षेत्र तक सीमित नहीं है। अत्यधिक तापमान के कारण कई परिवहन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कुछ रेल सेवाओं को रद्द करना पड़ा है, जबकि कई क्षेत्रों में स्कूलों और शैक्षणिक गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक जारी रहने वाली गर्मी बुनियादी ढांचे पर भी असर डाल सकती है। रेल पटरियों, सड़कों और बिजली नेटवर्क पर बढ़ते तापमान का अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
जलवायु परिवर्तन पर फिर छिड़ी बहस
यूरोप में लगातार बढ़ती गर्मी की घटनाओं ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन को लेकर बहस तेज कर दी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण हीटवेव की घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र रूप में सामने आ रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में यूरोप के कई देशों ने रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, जंगलों की आग और सूखे जैसी समस्याओं का सामना किया है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में ऐसी परिस्थितियां और गंभीर हो सकती हैं।
नागरिकों को जारी की गई सलाह
फ्रांसीसी स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर निकलने से बचने, हल्के कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने और जरूरत पड़ने पर ठंडे स्थानों में रहने की सलाह दी है।
इसके अलावा लोगों से कहा गया है कि वे अपने आसपास रहने वाले बुजुर्गों और अकेले रहने वाले व्यक्तियों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि अत्यधिक गर्मी का सबसे अधिक असर कमजोर वर्गों पर पड़ता है।











