पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव पर शिवराज चौहान का विरोध, बोले- संघीय ढांचे के खिलाफ कदम

पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव पर शिवराज चौहान का विरोध, बोले- संघीय ढांचे के खिलाफ कदम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि संसद से पारित कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव लाना संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है और संवैधानिक संतुलन को कमजोर करता है।

New Delhi: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पंजाब विधानसभा द्वारा विकसित भारत–ग्राम जी अधिनियम (Developed India–Gram G Act) के खिलाफ पारित प्रस्ताव पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने साफ कहा कि संसद से पारित किसी कानून के विरोध में राज्य विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना भारत के संघीय ढांचे (Federal Structure) की मूल भावना के खिलाफ है। चौहान के मुताबिक यह कदम संवैधानिक संतुलन को कमजोर करता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की आत्मा पर सवाल खड़ा करता है।

संसद में हुई लंबी बहस का हवाला

शिवराज चौहान ने इस मुद्दे पर संसद में हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा कि लोकसभा में इस विधेयक पर आठ घंटे से ज्यादा समय तक विस्तृत बहस हुई थी। उन्होंने बताया कि बहस के दौरान हर सांसद को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिला और सरकार ने सभी सुझावों को गंभीरता से सुना। चौहान ने कहा कि उन्होंने स्वयं प्रत्येक सांसद के सुझाव नोट किए और जवाब देने का प्रयास किया। उनके अनुसार संसद में पर्याप्त चर्चा के बाद ही इस विधेयक को पारित किया गया।

विपक्ष पर हंगामे का आरोप

केंद्रीय मंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि उन्होंने चर्चा के दौरान केवल हंगामा किया और उनकी प्रतिक्रिया सुनने की कोशिश नहीं की। चौहान ने कहा कि उन्होंने विपक्ष से पहले ही अपील की थी कि वे उनकी बात सुनें, लेकिन उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने इसे संसद की मर्यादा का उल्लंघन बताया, हालांकि यह भी कहा कि इसके बावजूद उन्होंने मजबूती से सरकार का पक्ष रखा।

विधानसभा के विशेष सत्र पर सवाल

शिवराज चौहान ने पंजाब विधानसभा द्वारा एक दिन का विशेष सत्र बुलाने के उद्देश्य पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद से कानून बन जाने के बाद राज्य विधानसभा में उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करना संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है। उनके मुताबिक संसद और विधानसभा की अपनी-अपनी सीमाएं तय हैं और इन्हें लांघना संघीय व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है।

संघीय ढांचे की मूल भावना

केंद्रीय मंत्री ने दो टूक कहा कि भारत का संविधान केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का स्पष्ट बंटवारा करता है। संसद द्वारा पारित कानून पर विधानसभा में विरोध प्रस्ताव लाना इस संतुलन को बिगाड़ता है। चौहान के अनुसार यह न केवल संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाता है बल्कि देश की संघीय व्यवस्था की बुनियाद को भी कमजोर करता है।

राष्ट्रपति की मंजूरी से बना कानून

इस पूरे विवाद के बीच शिवराज चौहान ने यह भी याद दिलाया कि विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद यह विधेयक कानून का रूप ले चुका है और अब इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चौहान ने कहा कि संवैधानिक रूप से मंजूरी मिलने के बाद किसी राज्य द्वारा इसके खिलाफ प्रस्ताव पारित करना गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

ग्रामीण रोजगार में बड़ा बदलाव

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को प्रति वित्तीय वर्ष 125 दिनों तक वैधानिक मजदूरी रोजगार की गारंटी दी जाएगी। चौहान के अनुसार यह कदम ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और रोजगार सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

सशक्तिकरण पर केंद्र का फोकस

शिवराज चौहान ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों का सशक्तिकरण (Empowerment) करना है। इसके जरिए समावेशी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और विभिन्न विकास पहलों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संतृप्ति-आधारित वितरण के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की दिशा

केंद्रीय मंत्री के अनुसार यह अधिनियम एक समृद्ध, लचीले और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और विकास के अवसर बढ़ें ताकि गांवों से शहरों की ओर पलायन कम हो सके। यह कानून उसी सोच का हिस्सा है जो 2047 में विकसित भारत (Developed India) के लक्ष्य को सामने रखकर बनाई गई है।

शिवराज चौहान ने स्पष्ट किया कि यह नया अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को एक आधुनिक वैधानिक ढांचे से प्रतिस्थापित करता है। उनके अनुसार नई व्यवस्था आजीविका सुरक्षा को और मजबूत करती है और बदलती जरूरतों के हिसाब से ग्रामीण रोजगार नीति को नया आकार देती है।

संवैधानिक मर्यादा का सवाल

केंद्रीय मंत्री ने दोहराया कि संसद द्वारा पारित कानून का विरोध करना हर किसी का लोकतांत्रिक अधिकार हो सकता है, लेकिन इसके लिए संवैधानिक मर्यादाओं का पालन जरूरी है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने से बेहतर होता कि पंजाब सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए अपनी आपत्तियां दर्ज कराती।

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