पंजाब सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना का नाम बदलने के केंद्र सरकार के फैसले पर चर्चा करने के लिए मंगलवार को विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है।
चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने मंगलवार को विशेष सत्र बुलाया, जिसमें महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के नाम बदलने और हाल के संशोधनों पर चर्चा की जाएगी। केंद्र सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर 'विकसित भारत - रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (VB-GRAM-G) कर दिया है। विपक्ष इसे गरीब विरोधी कदम मान रहा है।
विशेष सत्र में मनरेगा एक्ट में किए गए बदलावों को वापस लेने की मांग की जाएगी और केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया जाएगा। हालांकि इस सत्र में प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं होगा, जिसे लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है।
कांग्रेस का तीखा आरोप: सत्र को मजाक बना दिया

पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा, इस सरकार की सबसे बुरी बात यह है कि हर सत्र को तथाकथित स्पेशल सत्र में बदल दिया जाता है, लेकिन नतीजा शून्य होता है। संविधान के मुताबिक कम से कम तीन नियमित सत्र होने चाहिए, लेकिन इस सरकार ने मुश्किल से 7-8 वर्किंग डे ही पूरे किए हैं। आज का विशेष सत्र भी किसी सार्थक नतीजे तक नहीं पहुंचा।
कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "इस सत्र को मज़ाक बना दिया गया है। परंपरा के अनुसार तीन बड़े सत्र होते थे, लेकिन आम आदमी पार्टी ने उन्हें छोटे-छोटे बैठकों में बदल दिया, जिससे कोई सार्थक बहस नहीं हो पाती। सब कुछ ज़बरदस्ती पास किया जा रहा है। स्पीकर भी पक्षपाती हैं। MGNREGA पर प्रस्ताव कोई संशोधन नहीं बल्कि संघीय ढांचे पर हमला है। इस सरकार ने पंजाब विधानसभा के सत्रों को मज़ाक बना दिया है।
वहीं, आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह विशेष सत्र केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पेश करने के लिए बुलाया गया है। पार्टी का दावा है कि यह कदम पंजाब के गरीब और मजदूर वर्ग के हित में है। भाजपा ने फिलहाल इस सत्र पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया, लेकिन उनकी नज़र भी केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर बनी हुई है।











