प्रकाश राज का BJP पर हमला, SIR को बताया ‘इलेक्टोरल जेनोसाइड’ का औजार

प्रकाश राज ने धारवाड़ में SIR को लेकर BJP पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने का दावा करते हुए प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।

अभिनेता प्रकाश राज ने धारवाड़ में ‘फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध रैली’ में SIR को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसे “इलेक्टोरल जेनोसाइड” बताते हुए पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग की।

बेंगलुरु: अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए चुनाव आयोग की सिस्टमेटिक इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि SIR के जरिए 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और इसे उन्होंने “इलेक्टोरल जेनोसाइड” यानी “चुनावी नरसंहार” का औजार बताया।

प्रकाश राज ने रविवार को धारवाड़ में आयोजित ‘फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध रैली’ को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया का विरोध किया जाना चाहिए और सभी मतदाताओं के नाम बहाल होने तक इसे समाप्त करने की मांग जारी रहनी चाहिए।

प्रकाश राज ने SIR को लेकर उठाए सवाल

धारवाड़ में अपने संबोधन के दौरान प्रकाश राज ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्य से कर रही है। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप इन लोगों को प्रभावी रूप से अपने ही देश में गैर-नागरिक जैसा घोषित कर दिया गया है।

प्रकाश राज ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया का तब तक विरोध किया जाना चाहिए, जब तक इसे पूरी तरह समाप्त नहीं कर दिया जाता और सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल नहीं किए जाते।

‘13 करोड़ सिर्फ आंकड़े नहीं, इंसान हैं’

प्रकाश राज ने अपने संबोधन में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि 13 करोड़ मतदाता केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि वे अधिकारों वाले इंसान हैं। प्रकाश राज के अनुसार, मौजूदा कानूनों के तहत सरकारी एजेंसियों के माध्यम से यह कार्रवाई की गई है।

उन्होंने दावा किया कि SIR के कारण प्रभावित लोगों का “कानूनी जीवन” समाप्त कर दिया गया है। उनका कहना था कि मतदाता सूची से नाम हटने का असर लोगों के अधिकारों और लोकतांत्रिक भागीदारी पर पड़ सकता है।

धारवाड़ में ‘फासीवाद के खिलाफ प्रतिरोध रैली’

प्रकाश राज रविवार को धारवाड़ में आयोजित ‘प्रति‍रोध रैली अगेंस्ट फासिज्म’ में शामिल हुए। इस रैली का आयोजन कई संगठनों की ओर से किया गया था।

कार्यक्रम का आयोजन सौंदत्ती रोड स्थित बुद्ध रक्षित आवासीय विद्यालय के मैदान में किया गया। रैली में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया और राजनीतिक तथा लोकतांत्रिक मुद्दों पर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

प्रकाश राज ने इसी मंच से SIR और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

सभी मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग

प्रकाश राज ने कहा कि SIR के खिलाफ विरोध तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक पूरी प्रक्रिया को वापस नहीं लिया जाता। उन्होंने सभी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बहाल करने की मांग की। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची केवल प्रशासनिक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के चुनावी अधिकारों से सीधे जुड़ी हुई है। उन्होंने इस मुद्दे पर व्यापक स्तर पर विरोध की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि SIR को पूरी तरह समाप्त किए जाने तक अभियान जारी रहना चाहिए।

SIR को लेकर राजनीतिक विवाद

SIR को लेकर देश में राजनीतिक बहस पहले से जारी है। विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, जबकि चुनाव संबंधी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की अपनी-अपनी दलीलें हैं।

प्रकाश राज का बयान इसी व्यापक राजनीतिक विवाद के बीच आया है। उन्होंने इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए भाजपा और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया।

हालांकि, प्रकाश राज द्वारा लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और उन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर जताई चिंता

प्रकाश राज ने अपने संबोधन में मतदाता अधिकारों को लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका कहना था कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम होना उसके चुनावी अधिकारों के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने से उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं। इसी आधार पर उन्होंने SIR के खिलाफ विरोध को जारी रखने की अपील की।

उनका तर्क था कि चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और किसी भी पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रभावित लोगों के अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

भाजपा पर राजनीतिक हमला

प्रकाश राज लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। धारवाड़ की रैली में भी उन्होंने भाजपा को निशाने पर लिया और SIR को लेकर पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने भाजपा पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए इसे “इलेक्टोरल जेनोसाइड” बताया। साथ ही उन्होंने इस प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने और मतदाता सूची में सभी नाम बहाल करने की मांग दोहराई। उनके इस बयान से SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

आगे भी जारी रखने की अपील

रैली के दौरान प्रकाश राज ने समर्थकों और अन्य लोगों से इस मुद्दे पर विरोध जारी रखने की अपील की। उनका कहना था कि जब तक SIR की पूरी प्रक्रिया खत्म नहीं होती और प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल नहीं किए जाते, तब तक इसका विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को नागरिक और चुनावी अधिकारों से जोड़ते हुए इसे लोकतांत्रिक भागीदारी का विषय बताया।

धारवाड़ में आयोजित यह रैली ऐसे समय हुई है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और SIR को लेकर राजनीतिक दलों तथा सामाजिक संगठनों के बीच बहस जारी है। प्रकाश राज के बयान ने इस विवाद में एक और राजनीतिक आवाज जोड़ दी है।

फिलहाल SIR को लेकर प्रकाश राज द्वारा लगाए गए आरोपों पर राजनीतिक प्रतिक्रिया की नजर बनी हुई है। उनका मुख्य आग्रह है कि मतदाता सूची से हटाए गए सभी नाम बहाल किए जाएं और SIR की प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।

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