यह कहानी साहस और दूसरों की मदद करने के बारे में है। अर्जुन नाम का एक छोटा लड़का अपने गाँव में बहती नदी के किनारे खेलना पसंद करता था। वह हमेशा साहसी और दयालु था। एक दिन उसने देखा कि नदी में एक छोटा कुत्ता डूब रहा था। उसने बिना डर के उसे बचाने का साहस दिखाया।
कहानी
गाँव की सुबह हमेशा शांत और सुंदर होती थी। पेड़-पौधे हरे-भरे, पक्षी अपने मधुर गीत गा रहे और नदी का पानी धीरे-धीरे बह रहा था। अर्जुन, दस साल का साहसी और दयालु लड़का, रोज़ सुबह नदी किनारे खेलता और आसपास के जानवरों का ध्यान रखता।
एक दिन, जैसे ही वह नदी के पास पहुँचा, उसने देखा कि पानी में एक छोटा कुत्ता तैरते-तैरते डूब रहा था। आसपास कोई नहीं था, और नदी का बहाव तेज था। अर्जुन का दिल डर से धड़कने लगा, लेकिन उसने तुरंत सोचा, 'मैं डरूंगा नहीं, मुझे उसे बचाना होगा।'
उसने गहरी साँस ली और साहस जुटाकर नदी में छलांग लगा दी। ठंडा और तेज बहाव वाला पानी उसे थकाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अर्जुन ने हिम्मत नहीं हारी। उसने धीरे-धीरे कुत्ते की ओर तैरना शुरू किया।
कुत्ता डर के कारण बार-बार पानी में डूबने लगा, लेकिन अर्जुन ने उसे संभाला। कई बड़ी चट्टानों और तेज लहरों को पार करते हुए, अर्जुन ने कुत्ते को अपने पास मजबूत पकड़ में रखा और किनारे की ओर बढ़ा।
अर्जुन के साहस को देखकर गाँव के लोग नदी किनारे इकट्ठा होने लगे। उन्होंने तालियाँ बजाई और उसका हौसला बढ़ाया। अंततः, अर्जुन कुत्ते को सुरक्षित किनारे तक ले आया। कुत्ता खुशी से भौंकने लगा और अर्जुन की ओर देखकर धन्यवाद देने जैसा भाव दिखाया।
अर्जुन थक गया था, लेकिन उसकी आँखों में संतोष और खुशी थी। उसकी माँ भी वहाँ आई और उसे गले लगाकर बोली, 'तुम्हारा साहस और दयालुता हम सबको गर्व दिलाती है।' उस दिन अर्जुन ने न केवल एक कुत्ते की जान बचाई, बल्कि पूरे गाँव को यह सिखाया कि मुश्किल समय में साहस और दूसरों की मदद करने की भावना कितनी महत्वपूर्ण होती है।
सिख
मुश्किल घड़ी में डर को छोड़कर साहस दिखाना बहुत जरूरी है। दूसरों की मदद करना और सही काम करने की हिम्मत रखना इंसान को महान बनाता है। साहस केवल शारीरिक ताकत नहीं है, बल्कि यह आत्मविश्वास, धैर्य और दूसरों की भलाई के लिए प्रयास करने की क्षमता है।









