प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरे सचिन पायलट, योगी सरकार पर साधा निशाना

प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में उतरे सचिन पायलट, योगी सरकार पर साधा निशाना

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के धरने ने अब धार्मिक दायरे से निकलकर राजनीतिक रंग ले लिया है। बीते पांच दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य के समर्थन में कांग्रेस महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट खुलकर सामने आए हैं। 

Rajasthan: प्रयागराज माघ मेले में बीते पांच दिनों से धरने पर बैठे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में अब सियासत भी गर्मा गई है। कांग्रेस महासचिव और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट टोंक से खुलकर उनके समर्थन में सामने आए हैं, जिससे यह मामला राजनीतिक रूप से और अहम बन गया है।

सचिन पायलट ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कतई उचित नहीं है। उन्होंने यह बयान राजस्थान के टोंक जिले में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।

सचिन पायलट का खुला समर्थन, टोंक से दिया बयान

राजस्थान के टोंक जिले में मीडिया से बातचीत करते हुए सचिन पायलट ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को अनुचित, आपत्तिजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि एक सम्मानित धर्मगुरु को इस तरह से परेशान करना न केवल दुखद है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं पर भी सवाल खड़े करता है।

पायलट ने साफ शब्दों में कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ की जा रही “ताबड़तोड़ कार्रवाई” का कोई औचित्य नहीं है और यह केवल राजनीतिक असहमति का परिणाम लगती है।

“धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले ही धर्मगुरुओं को परेशान कर रहे” - सचिन पायलट

सचिन पायलट ने उत्तर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग खुद को हिंदू धर्म का संरक्षक बताते हैं, वही आज धर्मगुरुओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बीजेपी की राजनीतिक विचारधारा से सहमत नहीं हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

पायलट ने कहा, अगर कोई धर्मगुरु सरकार की लाइन से अलग सोच रखता है, तो उसे दबाने की कोशिश की जाती है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अपने बयान में सचिन पायलट ने बेहद भावनात्मक लहजे में कहा कि शंकराचार्य जैसे वरिष्ठ संत को रोने पर मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया, बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी के लिए भी खतरा करार दिया।

पायलट के अनुसार, जो भी लोग बीजेपी की बात नहीं मानते, उन्हें मजा चखाने की कोशिश की जाती है। शंकराचार्य के साथ जो कुछ हो रहा है, वह पूरी तरह अस्वीकार्य है।

क्या है पूरा मामला?

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज माघ मेले में कुछ मुद्दों को लेकर धरने पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन और सरकार उनकी मांगों और आपत्तियों को गंभीरता से नहीं ले रही है। बीते कुछ दिनों में उनके साथ हुई कथित प्रशासनिक सख्ती और कार्यक्रमों पर रोक को लेकर विवाद गहराता गया, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।

शंकराचार्य का कहना है कि वह धर्म और समाज से जुड़े मुद्दों को उठा रहे हैं, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक नजरिए से देख रही है। सचिन पायलट के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि यह मुद्दा अब केवल एक संत या माघ मेले तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दल भी इस विषय पर सरकार को घेर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनावों के माहौल में ऐसे मुद्दे सरकार और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर सकते हैं।

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