ग्वालियर में आयोजित रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में मध्य प्रदेश को इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहरों का प्रमुख केंद्र बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि यहां मौजूद यूनेस्को धरोहर स्थल और अनूठी विरासत राज्य को फिल्म निर्माताओं और पर्यटकों की पसंदीदा मंज़िल बना रहे हैं।
MP News: ग्वालियर में रविवार को आयोजित रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश अपनी विरासत, संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के कारण तेजी से पर्यटन का नया हब बन रहा है। कार्यक्रम में बताया गया कि राज्य में 750 से अधिक संरक्षित केंद्र और 18 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं। ग्वालियर को भी यूनेस्को द्वारा "क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक" घोषित किया गया है, जिससे इसे वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिली है।
प्रदेश का 30 प्रतिशत क्षेत्र जंगलों से ढका
मध्य प्रदेश का लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र घने जंगलों से ढका है। यहां 12 नेशनल पार्क और कई अभयारण्य मौजूद हैं, जो देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। श्योपुर क्षेत्र में चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट के बाद इनकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे राज्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।
धार्मिक दृष्टि से भी यह प्रदेश खास है। महाकाल और ओंकारेश्वर जैसे दो ज्योतिर्लिंग, भगवान राम और कृष्ण से जुड़े पदचिह्न, और मां नर्मदा का आध्यात्मिक महत्व हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
पर्यटन और फिल्म टूरिज्म का हब बन रहा है मध्य प्रदेश
प्रदेश सरकार का दावा है कि नई पर्यटन नीति ने निवेशकों को खासा आकर्षित किया है। इसमें 100 करोड़ रुपये तक के निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जा रही है। 50 से अधिक स्थलों को पर्यटन उद्योग विकास के लिए चिह्नित किया गया है।
फिल्म टूरिज्म को भी नई पहचान मिली है। शूटिंग परमिशन ऑनलाइन कर दी गई है और निवेशकों को छूट की सुविधाएं दी जा रही हैं। नतीजतन, आज हर 10 में से 3 से 4 फिल्में मध्य प्रदेश में शूट की जा रही हैं, जिससे राज्य फिल्म निर्माताओं की पहली पसंद बनता जा रहा है।
मध्य प्रदेश केवल प्राकृतिक धरोहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां ग्रामीण और सांस्कृतिक पर्यटन भी तेजी से विकसित हो रहा है। प्रदेश में 350 से अधिक होमस्टे विकसित किए गए हैं, जहां पर्यटक जनजातीय जीवनशैली और पारंपरिक खानपान का अनुभव कर सकते हैं।
लाड़पुरा और छिंदवाड़ा के होमस्टे को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। वहीं, चंदेरी की साड़ियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हैं और प्राणपुरा गांव को ‘क्राफ्ट विलेज’ का दर्जा मिला है।
ग्वालियर को संगीत और विरासत का हब बनाने की तैयारी
ग्वालियर, जिसे यूनेस्को द्वारा “क्रिएटिव सिटी ऑफ म्यूजिक” का दर्जा दिया गया है, सरकार की योजनाओं के केंद्र में है। यहां शास्त्रीय संगीत को बढ़ावा देने और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र की धरोहरों को वैश्विक स्तर पर प्रचारित करने की योजना बनाई गई है।
चंबल घाटी की रॉक आर्ट साइट्स और चौसठ योगिनी मंदिर को यूनेस्को हेरिटेज साइट्स में शामिल कराने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके अलावा, सरकार ग्वालियर को दिल्ली-आगरा-जयपुर गोल्डन ट्रायंगल से जोड़कर ‘डायमंड रिंग’ टूरिज्म सर्किट विकसित करने पर काम कर रही है।