पश्चिम बंगाल में नई सरकार गठन की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे

पश्चिम बंगाल में BJP विधायक दल की बैठक आज होगी। अमित शाह और मोहन माझी की मौजूदगी में नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान संभव। मुख़्यमंत्री की रेस में सुवेंदु आगे

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के चार दिन बाद नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो रही है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर फैसला हो सकता है। सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहली बार राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। चुनाव परिणाम आने के चार दिन बाद अब नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो रही है।

भाजपा नेतृत्व ने सरकार गठन की जिम्मेदारी संभालने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को केंद्रीय पर्यवेक्षक और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी को सह-पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। दोनों नेता शुक्रवार को कोलकाता पहुंचेंगे और भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल होंगे, जहां नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा होने की संभावना है।

9 मई को हो सकता है शपथ ग्रहण समारोह

सूत्रों के अनुसार, भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए चुने गए नेता का नाम औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को कोलकाता के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में आयोजित किया जा सकता है।

यह समारोह भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी पहली बार पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने जा रही है।

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सुवेंदु अधिकारी सबसे आगे

राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी का नाम सबसे आगे चल रहा है। सुवेंदु अधिकारी ने इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मौजूदा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है।

इसके अलावा, उन्होंने नंदीग्राम सीट से भी जीत दर्ज की है। नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 विधानसभा चुनाव में भी सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को हराया था। लगातार दूसरी बार ममता को चुनावी मुकाबले में हराना भाजपा के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।

4 मई: भाजपा को ऐतिहासिक जीत

4 मई को घोषित विधानसभा चुनाव परिणामों में भाजपा ने 293 सीटों में से 206 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) 81 सीटों तक सिमट गई।

राज्य की कुल 294 विधानसभा सीटों में से एक सीट फालता पर पुनर्मतदान होना है, जिसका परिणाम 24 मई को घोषित किया जाएगा।

भाजपा की यह जीत पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि राज्य में लंबे समय से क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है।

ममता बनर्जी ने हार को बताया साजिश

चुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में हार स्वीकार करने से इनकार करते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी जनादेश से नहीं बल्कि “साजिश” के कारण हारी है। ममता ने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि भाजपा के साथ मिलकर उनकी पार्टी की सीटें प्रभावित की गईं।

ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी और राजनीतिक संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने खुद को “आज़ाद पंछी” बताते हुए कहा कि वह सड़क से लेकर विधानसभा तक लड़ाई लड़ेंगी।

सुवेंदु अधिकारी के करीबी की हत्या से बढ़ा तनाव

चुनाव परिणाम के बाद राज्य में राजनीतिक तनाव भी बढ़ता दिखाई दिया। 6 मई को सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई।

रिपोर्टों के अनुसार, चंद्रनाथ रथ कोलकाता से अपने घर लौट रहे थे, तभी मध्यमग्राम के पास हमलावरों ने उनकी गाड़ी को रोककर कई राउंड फायरिंग की। गोली लगने से उनकी मौके पर गंभीर हालत हो गई और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

इस घटना ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।

सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर साधा निशाना

घटना के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उनके पीए की हत्या राजनीतिक दुश्मनी का परिणाम हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने ममता बनर्जी को चुनाव में हराया।

सुवेंदु ने कहा कि हत्या की जिस तरह से योजना बनाई गई, वह बेहद चिंताजनक है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत

भाजपा की जीत को केवल चुनावी बदलाव नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्य में भाजपा का सत्ता तक पहुंचना राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में राज्य में प्रशासनिक बदलाव, औद्योगिक निवेश और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे नई सरकार की प्राथमिकता होंगे।

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