पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला: ‘बात बिहार की’ केस में प्रशांत किशोर को दी बड़ी राहत

Patna High Court ने ‘बात बिहार की’ मामले में Prashant Kishor को बड़ी राहत दी है। कोर्ट के इस फैसले को बिहार की राजनीति में अहम माना जा रहा है। जानें पूरा मामला

Prashant Kishor को ‘बात बिहार की’ अभियान से जुड़े आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। Patna High Court ने उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए कहा कि मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की धाराएं प्रथम दृष्टया साबित नहीं होतीं।

पटना: बिहार की राजनीति से जुड़े चर्चित मामले ‘बात बिहार की’ अभियान में चुनाव रणनीतिकार और राजनीतिक नेता Prashant Kishor को बड़ी कानूनी राहत मिली है। पटना हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक प्राथमिकी (FIR) को पूरी तरह रद्द कर दिया है। यह फैसला बिहार की राजनीतिक और कानूनी हलकों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मामला 2020 विधानसभा चुनाव से पहले चलाए गए एक राजनीतिक अभियान से जुड़ा था।

पटना हाई कोर्ट का अहम फैसला

पटना हाई कोर्ट ने अपने 51 पन्नों के विस्तृत फैसले में स्पष्ट किया कि इस मामले में लगाए गए जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप प्रथम दृष्टया साबित नहीं होते। न्यायमूर्ति संदीप कुमार ने अपने निर्णय में कहा कि Prashant Kishor के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि FIR की सामग्री में ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि किसी प्रकार की धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए थे।

क्या था ‘बात बिहार की’ विवाद?

‘बात बिहार की’ अभियान 2020 विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में एक प्रमुख चर्चा का विषय बना था। इसी दौरान आरोप लगाए गए थे कि एक अन्य राजनीतिक अभियान ‘बिहार की बात’ से जुड़ी सामग्री, डिजाइन और कॉन्सेप्ट का कथित रूप से उपयोग किया गया। शिकायतकर्ता का दावा था कि उनके सहयोगी ओसामा खुर्शीद एक लैपटॉप लेकर गए थे, जिसमें मौजूद सामग्री का इस्तेमाल बाद में इस अभियान में किया गया। इस आरोप के आधार पर FIR दर्ज की गई थी, जिसमें जालसाजी और साजिश जैसी धाराएं शामिल थीं।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस मामले में लगाए गए आरोप कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं हैं। अदालत ने कहा कि FIR में यह साबित नहीं होता कि किसी प्रकार का फर्जी दस्तावेज बनाया गया या किसी को धोखे से संपत्ति हस्तांतरित करने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि केवल किसी “आइडिया” या “थीम” पर कॉपीराइट का दावा नहीं किया जा सकता। कानून केवल अभिव्यक्ति (expression) की रक्षा करता है, न कि विचार (idea) की।

अदालत ने यह भी कहा कि जब मूल अपराध के तत्व ही मौजूद नहीं हैं, तो भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) भी लागू नहीं हो सकती।इस आधार पर पूरे आपराधिक मामले को रद्द कर दिया गया और Prashant Kishor को पूर्ण राहत प्रदान की गई।

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