राहुल गांधी की सदस्यता खत्म करने का प्रस्ताव, BJP सांसद के कदम के बाद PM मोदी से मिले किरन रिजिजू

लोकसभा में राहुल गांधी की संसद सदस्यता खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया गया। BJP सांसद के कदम से सियासी हलचल तेज हुई, किरन रिजिजू ने PM मोदी से मुलाकात की।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने को लेकर BJP सांसद ने प्रस्ताव पेश किया। इस कदम से राजनीतिक माहौल गरमा गया। संसद में गतिरोध बढ़ा और किरन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

New Delhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर गुरुवार को संसद का माहौल अचानक गरमा गया। भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए लोकसभा में एक अहम प्रस्ताव का नोटिस दिया। इस प्रस्ताव के जरिए उन्होंने राहुल गांधी की संसद सदस्यता समाप्त करने और भविष्य में चुनाव लड़ने पर आजीवन रोक लगाने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी है।

निशिकांत दुबे का सब्सटेंसिव मोशन

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक सब्सटेंसिव मोशन पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के इशारों पर देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। दुबे के अनुसार, राहुल गांधी के बयान न केवल संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि देश की एकता और संप्रभुता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

निशिकांत दुबे ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं है, बल्कि संसद के भीतर एक गंभीर मुद्दे पर चर्चा कराना है। उन्होंने कहा कि इस मोशन के जरिए राहुल गांधी के बयानों पर विस्तार से चर्चा होनी चाहिए और यह तय किया जाना चाहिए कि क्या ऐसे बयानों के बाद कोई व्यक्ति संसद सदस्य बने रहने का हकदार है।

सदस्यता खत्म करने की मांग

निशिकांत दुबे ने अपने प्रस्ताव में यह मांग भी रखी है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। बीजेपी सांसद का तर्क है कि विपक्ष के नेता जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को बेहद जिम्मेदारी से बोलना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी बार-बार ऐसी भाषा और आरोपों का इस्तेमाल करते हैं, जो देशहित के खिलाफ हैं।

इस मांग के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञ इसे बेहद असाधारण कदम मान रहे हैं, क्योंकि विपक्ष के नेता के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव पहले बहुत कम देखने को मिला है।

प्रिविलेज मोशन पर स्थिति साफ

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने यह भी साफ किया कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ कोई प्रिविलेज मोशन नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया गया है, जबकि ऐसा नहीं है। उनके मुताबिक, उन्होंने संसद के नियमों के तहत एक जरूरी मोशन पेश किया है, जिसका उद्देश्य राहुल गांधी को संसद से सस्पेंड करने पर विचार करना है।

संसद में गतिरोध

राहुल गांधी के बयान और उस पर बीजेपी की प्रतिक्रिया के बाद संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बीजेपी सांसदों का कहना है कि राहुल गांधी लगातार संसद की मर्यादा को तोड़ रहे हैं, जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार आलोचना से डरकर विपक्ष की आवाज दबाना चाहती है।

किरन रिजिजू की पीएम मोदी से मुलाकात

संसद में बढ़ते गतिरोध के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस बैठक में उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में बने हालात की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि संसद की कार्यवाही को कैसे सुचारू रूप से चलाया जाए और विपक्ष के साथ संवाद का क्या रास्ता निकाला जा सकता है। हालांकि इस मुलाकात के बाद सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

राहुल गांधी के भाषण पर आपत्ति

बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने भी इस मामले में कदम उठाते हुए लोकसभा स्पीकर को एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने राहुल गांधी के हालिया भाषण से कुछ शब्दों और टिप्पणियों को हटाने की मांग की है। संजय जायसवाल का कहना है कि राहुल गांधी ने अपने भाषण में ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जो संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है।

जगदंबिका पाल की प्रतिक्रिया

लोकसभा में उस समय कार्यवाही चला रहे बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने भी राहुल गांधी के बयान पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उन्हें अपने पद की मर्यादा समझनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संसदीय लोकतंत्र में इस तरह की भाषा और आरोप स्वीकार्य हैं।

जगदंबिका पाल ने कहा कि संसद केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच नहीं है, बल्कि यह देश की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था है, जहां शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर किया जाना चाहिए।

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