राजधानी की एंबुलेंस व्यवस्था पर सवाल, ऑक्सीजन खत्म होने से नवजात की मौत

जयपुर में एंबुलेंस की लापरवाही उजागर। ऑक्सीजन सिलेंडर की कमी और मनमाना किराया नवजात की मौत का कारण बना। जांच में सैकड़ों एंबुलेंस बिना जरूरी सुविधा के मिलीं।

नवजात की मौत ने एंबुलेंस व्यवस्था की गंभीर लापरवाही उजागर की है। ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधा की कमी और मनमाना किराया मरीजों की जान पर भारी पड़ रहा है। प्रशासन को सख्ती से नियम लागू कर एंबुलेंस को सच में जीवन रक्षक बनाना होगा।

Rajasthan: जयपुर में करीब 1023 एंबुलेंस संचालित हो रही हैं, लेकिन इनमें से 837 एंबुलेंस बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के चल रही हैं। ये एंबुलेंस अधिकतर सरकारी अस्पतालों के बाहर खड़ी रहती हैं और जरूरत पड़ने पर मरीजों को ले जाने का दावा करती हैं। हकीकत यह है कि इनका इस्तेमाल अधिकतर डेड बॉडी ले जाने या छुट्टी पाए मरीजों को घर छोड़ने के लिए किया जा रहा है।

भरतपुर से एक नवजात को ऑक्सीजन सपोर्ट पर जयपुर लाया जा रहा था। रास्ते में बस्सी के पास एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया। समय पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से नवजात की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना के बाद एंबुलेंस सेवाओं की जांच की गई, जिसमें गंभीर लापरवाही सामने आई।

एसएमएस अस्पताल का हाल

सुबह करीब 11:43 बजे एसएमएस अस्पताल के बांगड़ क्षेत्र में 100 से अधिक एंबुलेंस खड़ी मिलीं। पूछताछ में पता चला कि इनमें से ज्यादातर में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं था। मथुरा मरीज ले जाने की बात करने पर चालक साबिर ने साफ कहा कि एंबुलेंस तो मिल जाएगी, लेकिन ऑक्सीजन नहीं है। अगर चाहिए तो अलग से पैसे देने होंगे। बड़े सिलेंडर के 1000 रुपए और छोटे के 500 रुपए मांगे गए। साथ ही किराया 15 रुपए प्रति किलोमीटर बताया गया।

जेके लोन अस्पताल में स्थिति

रात 9 बजे जेके लोन अस्पताल में भी यही हाल मिला। चालक जितेंद्र कुमार ने कहा कि ऑक्सीजन सिलेंडर अभी नहीं है, मंगवाना पड़ेगा। अगर रास्ते में ऑक्सीजन खत्म हो गई तो जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी। छोटे सिलेंडर को 3 घंटे और बड़े को 5 घंटे चलने वाला बताया गया। किराया 14 रुपए प्रति किलोमीटर और दोनों तरफ का पैसा मांगा गया।

जयपुरिया अस्पताल की सच्चाई

रात 10 बजे जयपुरिया अस्पताल के बाहर खड़ी एंबुलेंस के चालक सूबेदार ने बताया कि यहां खड़ी एंबुलेंस ज्यादातर डेड बॉडी या डिस्चार्ज मरीजों को ले जाती हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर अलग से मंगाना पड़ता है और इसके लिए अलग से भुगतान करना होता है। बीच रास्ते में ऑक्सीजन खत्म होने की जिम्मेदारी भी चालक लेने को तैयार नहीं।

आरटीओ के नियम

आरटीओ द्वारा एंबुलेंस किराया तय होने के बावजूद चालकों द्वारा मनमानी की जा रही है। नियम के अनुसार पहले 10 किलोमीटर का किराया 500 रुपए है। इसके बाद छोटे वाहनों का किराया 12.50 रुपए प्रति किलोमीटर और बड़े वाहनों का 14.50 से 17.50 रुपए प्रति किलोमीटर तय है। इसके बावजूद कई एंबुलेंस चालक 20 रुपए प्रति किलोमीटर तक वसूल रहे हैं। ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर अलग से रकम ली जा रही है, जो नियमों के खिलाफ है।

Leave a comment