राजस्थान के चर्चित JJM घोटाले में ACB ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के करीबी संजय बड़ाया को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह घोटाले का मास्टरमाइंड था और टेंडर, ट्रांसफर-पोस्टिंग व पैसों के लेनदेन में सक्रिय भूमिका निभाता था।
जयपुर: भारत के राजस्थान राज्य में कथित 900 करोड़ रुपए के Jal Jeevan Mission (JJM) घोटाले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने पूर्व जलदाय मंत्री Mahesh Joshi के करीबी सहयोगी संजय बड़ाया को गिरफ्तार कर लिया है। एसीबी ने उसे रविवार देर रात दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया, जब वह थाईलैंड से भारत लौटा।
जांच एजेंसियों के अनुसार संजय बड़ाया इस कथित घोटाले का प्रमुख सूत्रधार माना जा रहा है। वह कथित तौर पर टेंडर प्रक्रिया, पैसों के लेन-देन और अधिकारियों के बीच समन्वय में बिचौलिये की भूमिका निभाता था।
थाईलैंड से लौटते ही एयरपोर्ट पर गिरफ्तारी
सूत्रों के मुताबिक संजय बड़ाया थाईलैंड में एक शादी समारोह में शामिल होने गया था। भारत लौटने पर दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारियों ने उसे रोका और तुरंत एसीबी को सूचना दी।
बताया गया है कि उसके खिलाफ पहले से ही लुक आउट नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद रात करीब 2 बजे एसीबी टीम ने उसे औपचारिक रूप से हिरासत में ले लिया।
अब उसे पूछताछ के लिए जयपुर लाया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में अभी तीन अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
महेश जोशी और सुबोध अग्रवाल से करीबी संबंधों का आरोप
जांच अधिकारियों का दावा है कि संजय बड़ाया के संबंध पूर्व मंत्री महेश जोशी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी Subodh Agarwal से बेहद करीबी थे।
एसीबी और अन्य एजेंसियों के अनुसार बड़ाया कथित तौर पर ट्रांसफर-पोस्टिंग, ठेकों में अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन में सक्रिय भूमिका निभाता था। अधिकारियों का कहना है कि कई संवेदनशील फैसलों और टेंडर प्रक्रियाओं में उसका प्रभाव दिखाई देता था।

इंश्योरेंस कंपनी की नौकरी से करोड़ों की संपत्ति तक
जांच में यह भी सामने आया है कि संजय बड़ाया वर्ष 2022 तक एक निजी इंश्योरेंस कंपनी में काम करता था, जहां उसका वार्षिक वेतन लगभग 7 लाख रुपए बताया गया है।
हालांकि जांच एजेंसियों का दावा है कि जेजेएम घोटाले के दौरान उसकी संपत्ति में अचानक भारी वृद्धि हुई और वह कम समय में करोड़ों रुपए का मालिक बन गया।
इस मामले में Enforcement Directorate (ED) ने भी पहले कार्रवाई की थी। ईडी ने जुलाई 2024 में उसे गिरफ्तार किया था, जबकि बाद में दिसंबर 2024 में उसे सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी।
फर्जी दस्तावेजों और जमीन कब्जे के आरोप
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि संजय बड़ाया ने “मैसर्स चमत्कारेश्वर बिल्डर्स एंड डेवलपर” नाम से एक कंपनी बनाई थी। इस कंपनी में उसकी पत्नी नैना बड़ाया भी साझेदार थीं।
जांच एजेंसियों के मुताबिक इस कंपनी के जरिए जयपुर में करोड़ों रुपए के रियल एस्टेट लेन-देन किए गए। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर Jaipur Development Authority (JDA) की जमीनों पर कब्जे की कोशिशों के आरोप भी सामने आए हैं।
महेश जोशी आज एसीबी कोर्ट में पेश होंगे
पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी को एसीबी ने 7 मई को गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें 11 मई तक एसीबी रिमांड पर भेजा था।
रिमांड अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें एसीबी कोर्ट में पेश किया जाएगा। इससे पहले अप्रैल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी सुबोध अग्रवाल की भी गिरफ्तारी हो चुकी है और वह फिलहाल जेल में हैं।
दोष सिद्ध होने पर 10 साल तक की सजा संभव
एसीबी की प्रारंभिक जांच और दाखिल दस्तावेजों के अनुसार यदि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप साबित होते हैं, तो आरोपियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की कठोर कारावास की सजा हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राजस्थान की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े सबसे बड़े कथित भ्रष्टाचार मामलों में से एक बनता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, संपत्तियों और टेंडर प्रक्रियाओं की गहराई से जांच कर रही हैं।
जल जीवन मिशन क्या है?
Jal Jeevan Mission भारत सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के हर घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर पाइपलाइन, जल स्रोत और वितरण नेटवर्क विकसित किए जाते हैं।
राजस्थान में इस योजना के तहत हुए कथित घोटाले ने सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।









