Indian Navy: 16 अक्टूबर को नौसेना में शामिल होगा पहला मल्टी-पर्पज वेसल ‘समर्थक’, समुद्री आपदा राहत में निभाएगा अहम भूमिका

भारतीय नौसेना को 16 अक्टूबर को पहला मल्टी-पर्पज वेसल ‘समर्थक’ मिलने जा रहा है। स्वदेशी जहाज समुद्री निगरानी से लेकर आपदा राहत तक अहम भूमिका निभाएगा।

भारतीय नौसेना में 16 अक्टूबर, शुक्रवार को पहला मल्टी-पर्पज वॉरशिप ‘समर्थक’ शामिल किया जाएगा। इसे कर्नाटक के कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर आयोजित कार्यक्रम में नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा।

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री परिचालन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। 16 अक्टूबर को स्वदेश में निर्मित बहुउद्देश्यीय जहाज ‘समर्थक’ को नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत तैयार किया गया यह पोत समुद्री निगरानी, गश्त, बचाव अभियान और मानवीय सहायता जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

‘समर्थक’ भारतीय नौसेना के लिए प्रस्तावित चार मल्टी-पर्पज वेसल में पहला जहाज है। इसे अलग-अलग तरह के समुद्री अभियानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। इसकी बहुउद्देश्यीय क्षमताएं नौसेना को नियमित समुद्री गतिविधियों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में भी सहायता प्रदान कर सकती हैं।

कारवार नौसैनिक अड्डे पर शामिल किए जाने की तैयारी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 अक्टूबर को कर्नाटक के कारवार स्थित नौसैनिक अड्डे पर ‘समर्थक’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। इस अवसर को भारत के स्वदेशी रक्षा निर्माण कार्यक्रम और नौसैनिक क्षमताओं के विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन विवेक मधवाल के अनुसार, इस जहाज का बेड़े में शामिल होना रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के भारत के प्रयासों की दिशा में एक अहम उपलब्धि है। उन्होंने संकेत दिया कि आधुनिक समुद्री अभियानों और नौसेना की बदलती परिचालन जरूरतों को पूरा करने में यह पोत उपयोगी साबित होगा।

देश में विकसित और निर्मित रक्षा प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ने से भारतीय उद्योग की भूमिका भी मजबूत होती है। ‘समर्थक’ इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत घरेलू कंपनियों की तकनीकी क्षमता और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उनकी भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है।

समुद्री निगरानी और गश्त में होगी अहम भूमिका

‘समर्थक’ को मुख्य रूप से समुद्री निगरानी और गश्त जैसे कार्यों के लिए तैयार किया गया है। समुद्री क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने और विभिन्न अभियानों को सहयोग देने के लिए ऐसे बहुउद्देश्यीय जहाज उपयोगी होते हैं। इस पोत का इस्तेमाल कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों यानी Low Intensity Maritime Operations (LIMO) में भी किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, यह विभिन्न लक्ष्यों की तैनाती और परीक्षण गतिविधियों के लिए एक प्लेटफॉर्म के रूप में काम कर सकता है।

जहाज की एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता मानव रहित और स्वायत्त प्रणालियों को सहयोग देने की क्षमता है। इसे ऐसी प्रणालियों के लिए मदरशिप के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे नौसेना को आधुनिक तकनीकों पर आधारित समुद्री अभियानों के संचालन और परीक्षण में मदद मिल सकती है।

बचाव अभियान और आपदा राहत में भी उपयोगी

‘समर्थक’ की भूमिका सैन्य और निगरानी संबंधी गतिविधियों तक सीमित नहीं होगी। प्राकृतिक आपदाओं, समुद्री दुर्घटनाओं और अन्य आपात स्थितियों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा। जहाज को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में सहयोग देने के लिए तैयार किया गया है. आवश्यकता पड़ने पर इसे सीमित चिकित्सा सुविधाओं वाले अस्पताल जहाज के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। 

इसके अलावा, बचाव कार्यों और मलबा हटाने से संबंधित अभियानों में भी इसकी उपयोगिता हो सकती है। इस तरह यह पोत नौसेना को रक्षा संबंधी जिम्मेदारियों के साथ मानवीय सहायता के कार्यों में भी अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराएगा।

स्वदेशी सेंसर और आधुनिक प्रणालियों से लैस

‘समर्थक’ में एकीकृत कॉम्बैट सूट लगाया गया है। इसमें स्वदेशी सेंसर, हथियार और इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियां शामिल हैं। इन उपकरणों को समुद्र की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। स्वदेशी तकनीक का उपयोग भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को आगे बढ़ाने के साथ-साथ महत्वपूर्ण प्रणालियों के घरेलू विकास को भी प्रोत्साहित करता है। 

हालांकि, जहाज की वास्तविक परिचालन क्षमता और विभिन्न प्रणालियों के प्रदर्शन का आकलन उसके आधिकारिक तकनीकी विवरणों के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

Leave a comment