महात्मा गांधी मनरेगा योजना के तहत फार्म पॉण्ड श्रेणी में टांका निर्माण की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंजूरी से राजस्थान के ग्रामीण व रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
जयपुर: राजस्थान के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी मनरेगा योजना के अंतर्गत फार्म पॉण्ड श्रेणी में टांका निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह अनुमति मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के बाद केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदान की। इस कदम से राज्य के विशेषकर पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी और जल-संकटग्रस्त जिलों में पानी के पारंपरिक भंडारण ढांचे को बढ़ावा मिलेगा।
टांका निर्माण से ग्रामीण परिवारों को वर्षा जल को संरक्षित करने, खेती-किसानी में स्थिरता लाने और पेयजल समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से मनरेगा के माध्यम से जल संरक्षण के कार्यों में तेजी आएगी और स्थानीय रोजगार अवसर भी बढ़ेंगे। कुल मिलाकर, यह पहल राजस्थान के ग्रामीण विकास और जल प्रबंधन में एक प्रभावी बदलाव लाने की क्षमता रखती है।
किसानों को मिलेगी जल-सुरक्षा की मजबूती
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर केंद्र सरकार ने निजी कृषि भूमि पर मनरेगा के तहत टांका निर्माण को पूर्व की तरह अनुमति दे दी है। पिछले महीने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने तर्क दिया था कि टांका ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक जल संरचना का प्रभावी साधन है, जो जल सुरक्षा बढ़ाने, फसलों की उत्पादकता सुधारने और बदलती जलवायु परिस्थितियों में किसानों की आजीविका को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कम लागत और टिकाऊ संरचना होने के कारण यह किसानों के लिए एक विश्वसनीय जल-संरक्षण विकल्प साबित होता है।

केंद्र ने दी स्पष्ट अनुमति
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि मनरेगा दिशा-निर्देशों में व्यक्तिगत लाभार्थियों के लिए फार्म पॉण्ड निर्माण पहले से ही अनुमत श्रेणी में शामिल है। ऐसे में पात्रता और निर्धारित नियमों का पालन करते हुए टांका निर्माण को भी इसी श्रेणी में समायोजित किया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में व्यक्तिगत जल-संरक्षण संरचनाओं को बढ़ावा मिलेगा।
इस निर्णय के बाद राज्य में मनरेगा के तहत जल-संरक्षण से जुड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। टांका—जो परंपरागत जल भंडारण प्रणाली है—स्थानीय किसानों की वर्षा जल पर निर्भरता को कम करने और सूखे की स्थिति में राहत देने में उपयोगी माना जाता है। केंद्र की स्वीकृति से यह संरचना अब अधिक व्यवस्थित रूप से किसानों तक पहुंच सकेगी।
किसानों को राहत, जल संरक्षण को मजबूती
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केंद्र के इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह कदम ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को वास्तविक राहत देगा। उन्होंने बताया कि टांका निर्माण की अनुमति मिलते ही जल संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी, जिससे खेतों में जल उपलब्धता बढ़ेगी और कृषि चक्र अधिक स्थिर होगा।
मुख्यमंत्री ने इसे डबल इंजन सरकार की प्राथमिकताओं का हिस्सा बताया, जहां कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार निर्णायक फैसले लिए जा रहे हैं। उनके अनुसार, कम लागत और टिकाऊ संरचना होने के कारण टांका किसानों के लिए एक स्थायी समाधान साबित होता है, और यह फैसला जल संकट से जूझ रहे जिलों के लिए बेहद लाभकारी रहेगा।









